- खबरों की मानें तो ईरान अब चीन से बेहद आधुनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें खरीदने के करीब है.
- चीन CM-302 को दुनिया की सबसे बेहतरीन एंटी-शिप मिसाइल बताता है, जो विमानवाहक पोत को डुबोने में सक्षम है
- चीन से MANPADS मिसाइल सिस्टम, एंटी-बैलिस्टिक हथियार और एंटी-सैटेलाइट हथियार सौदे पर भी बात हो रही है
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के मंडराते बादलों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आ रहा है. खबरों की मानें तो ईरान अब चीन से बेहद आधुनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें खरीदने के करीब है. वैसे तो इस डील को लेकर 2 साल से बातचीत चल रही है, लेकिन पिछले साल ईरान और इजरायल के संघर्ष के बाद इसमें काफी तेजी आई है. यह खबर ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी कर दी है और मिडिल ईस्ट में अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है.
सुपरसोनिक एंटी शिप क्रूज मिसाइल का सौदा!
चीन 1980 के दशक में ईरान को हथियारों की आपूर्ति करने वाला प्रमुख देश था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते इसमें कमी आ गई थी. अब रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में बनी CM-302 मिसाइलों का सौदा लगभग पूरा होने वाला है. हालांकि अभी डिलीवरी डेट पर अंतिम मुहर नहीं लगी है. दावा किया जा रहा है कि ईरान CM-302 एंटी शिप क्रूज मिसाइल के अलावा चीन से सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम MANPADS, एंटी-बैलिस्टिक हथियार और एंटी-सैटेलाइट हथियार हासिल करने के लिए भी बातचीत कर रहा है.

CM-302 मिसाइल कितनी खतरनाक
- CM-302 एक सुपरसोनिक मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता लगभग 290 किमी है.
- चीन CM-302 को दुनिया की सबसे बेहतरीन एंटी-शिप मिसाइल बताता है.
- यह किसी भी विमानवाहक पोत या डिस्ट्रॉयर को डुबोने में सक्षम है.
- इसे जहाजों, विमानों या चलते-फिरते वाहनों से भी लॉन्च किया जा सकता है.
- यह रडार से बचकर बहुत कम ऊंचाई पर तेज रफ्तार से उड़ सकती है.
ईरान के लिए गेमचेंजर होगी ये मिसाइल
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मिसाइलों की तैनाती से ईरान की हमलावर क्षमता में भारी इजाफा होगा, जो इलाके में मौजूद अमेरिकी नेवी के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है. इजरायली खुफिया अधिकारी डैनी सिट्रीनोविक इस मिसाइल को गेमचेंजर मानते हैं क्योंकि सुपरसोनिक मिसाइलों को बीच रास्ते में रोकना बेहद मुश्किल होता है.
ईरान को मिलेगी सबसे बड़ी ताकत
अगर ये मिसाइल सौदा होता है तो चीन की तरफ से ईरान को दिए गए अब तक के सबसे एडवांस हथियारों में से एक होगी. ये सौदा 2006 में पहली बार लगे संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के भी विपरीत होगा. हालांकि 2015 में ईरान से परमाणु डील के दौरान इन्हें हटा लिया गया था, लेकिन पिछले साल सितंबर में इन्हें फिर से लागू कर दिया गया है.
अमेरिका के वर्चस्व को सीधी चुनौती?
चीन की इस डील का सीधा मतलब होगा कि ईरान के साथ उसके सैन्य संबंध मजबूत हो रहे हैं. यह ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को रोकने के अमेरिका के प्रयासों के लिए चुनौती की तरह होगी. इसका ये भी मतलब होगा कि चीन अब उस इलाके में अपनी पैठ बढ़ा रहा है जहां लंबे समय तक अमेरिकी सैन्य शक्ति का दबदबा रहा है. जानकारों का कहना है कि चीन नहीं चाहता कि ईरान में कोई पश्चिम समर्थक सरकार आए क्योंकि ऐसा होने पर इससे चीन के हितों को झटका लग सकता है.
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