- ईरान और इजरायल के बीच जारी लड़ाई में दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के शहरों को निशाना बना रहे हैं
- धार्मिक समिति ने मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाने पर चर्चा की, और आईआरजीसी ने उनका समर्थन किया है
- इजरायल के हमले में क़ोम की एक इमारत नष्ट हुई, जहां शिया सत्ता का प्रमुख केंद्र बताया जाता है
ईरान-इजरायल के बीच बीते पांच दिनों से लड़ाई जारी है. ईरान लगातार इजरायल के शहरों को निशाना बना रहा है, उधर इजरायल भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है. मीडिल ईस्ट में जारी इस युद्ध के बीच अब ईरान से एक बड़ी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि ईरान की एलिट फोर्स पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई के बेटे को सुप्रीम लीडर बनाने के पक्ष में है. आपको बता दें कि ईरान पर 37 वर्षों तक शासन करने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई की फरवरी के आखिरी दिन अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में अचानक हत्या कर दी गई. उनकी मृत्यु के बाद ईरान में उत्तराधिकारी नियुक्त करने की अफरा-तफरी मच गई थी. आठ महीनों में ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान पर किए गए दूसरे हमले में हुई इस हत्या से नेतृत्व का एक बड़ा शून्य पैदा हो गया. 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता सभी प्रमुख नीतियों पर अंतिम निर्णय लेते थे, और उनकी अनुपस्थिति ने ईरान की सत्ता संरचना के दो स्तंभों - धार्मिक प्रतिष्ठान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) - को अस्थिरता की स्थिति में डाल दिया है.
रिवोल्यूशनरी गार्ड ईरान की धर्मतांत्रिक सरकार के भीतर एक शक्तिशाली फोर्स है, जो केवल सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह है. ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल भंडार की निगरानी करने और विदेशों में अभियान चलाने वाला यह बल मध्य पूर्व में ईरान के बढ़ते हमलों के कारण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.1980 के दशक में इराक के साथ हुए लंबे और विनाशकारी युद्ध के दौरान, क्रांतिकारी गार्ड ईरान के नियमित सशस्त्र बलों के समानांतर कार्य करता था और इसकी प्रमुखता और शक्ति में वृद्धि हुई. हालांकि युद्ध के बाद इसके विघटन की आशंका थी, अली खामेनेई ने इसे निजी उद्यमों में विस्तार करने की शक्तियां प्रदान कीं, जिससे यह बल एक आर्थिक और खुफिया शक्ति केंद्र बन गया.अब यह अपनी खुद की खुफिया सेवाएं संचालित करता है और बंद कमरे में हुई सुनवाई में जासूसी के आरोपों पर दोहरी नागरिकता वाले लोगों और पश्चिमी देशों से संबंध रखने वाले लोगों की गिरफ्तारी और सजा की एक श्रृंखला के पीछे रहा है.
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आपको बता दें कि बैठक के हालात बेहद अस्थिर थे. इज़राइल ने दावा किया कि उसके मिसाइल हमलों में क़ोम स्थित वह इमारत नष्ट हो गई, जो शिया सत्ता का प्रमुख केंद्र है, जहां कथित तौर पर विधानसभा की बैठक हो रही थी. हालांकि, आईआरजीसी से संबद्ध फ़ार्स न्यूज़ ने बताया कि हमले के समय इमारत खाली थी. ईरानी राजनीति के विशेषज्ञ मोजतबा को एक महत्वपूर्ण, हालांकि विवादास्पद, विकल्प मानते हैं.57 वर्ष की आयु में, उन्होंने अपने पिता के कार्यालय के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आईआरजीसी और कुद्स फ़ोर्स (जो अपरंपरागत युद्ध में विशेषज्ञता रखने वाली शाखा है) के शीर्ष नेतृत्व से उनके गहरे संबंध हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान गार्ड्स ने उनकी नियुक्ति के लिए दबाव डाला था. उनका तर्क था:संकट के इस दौर में ईरान का नेतृत्व करने के लिए मोजतबा के पास आवश्यक योग्यताएं थीं.
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