- डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी दी है.
- इस बीच इजरायल ईरानी मिसाइल हमले से बचने के लिए कमर कस चुका है. मैगन डेविड एडोम इसकी तैयारी कर रहा है.
- मैगन डेविड एडोम के पास दो हजार एंबुलेंस, हजार से अधिक टू-व्हीलर, दस हेलिकॉप्टर और विशेष बचाव बोट उपलब्ध हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम का बाद दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व की ओर है . ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान नहीं माना, तो उसके बुनियादी ढांचे और पुलों को तबाह कर दिया जाएगा. इससे पहले भी ट्रंप ईरान को पाषाण युग में पहुंचाने की बात कह चुके हैं. इस तनाव के बीच सबसे बड़ा खतरा इजरायल पर मंडरा रहा है, क्योंकि अमेरिका ईरान से भगौलिक लिहाज से दूर है, लेकिन ईरान की मिसाइलें सीधे इजरायल को अपना निशाना बना सकती हैं.
इस भीषण खतरे के बीच एनडीटीवी की टीम इजरायल के तेल अवीव से सटे रामला शहर में जमीन से 50 मीटर नीचे बने उस 'अंडरग्राउंड कमांड सेंटर' में पहुंची, जहां से पूरे इजरायल की सुरक्षा और लोगों की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात चौकन्ना रहना पड़ता है.
"Tuesday. 8 pm. Eastern Time": Trump's Latest After "Hell" Warning To Iran
— NDTV (@ndtv) April 6, 2026
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सुरक्षा का अभेद्य किला
मैगन डेविड एडोम (MDA) की तुलना भारत की NDMA या NDRF से की जा सकती है, लेकिन इसकी तकनीक और तैयारी हैरान कर देने वाली है. MDA के पास वर्तमान में 2000 एंबुलेंस, 1200 टू-व्हीलर और 10 से ज्यादा हेलिकॉप्टर्स का बेड़ा है. इतना ही नहीं, समंदर में बचाव कार्य के लिए इनके पास स्पेशल बोट भी हैं. इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इनके पास मौजूद 'एडवांस्ड बसें' हैं, जो असल में चलते-फिरते अस्पताल हैं. इन बसों के भीतर ऑन-द-गो सर्जरी करने तक की सुविधा मौजूद है.

युद्ध की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए MDA ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है. यह इजरायल की सुरक्षा प्रणाली का 'नर्वस सिस्टम' है. यहां की स्क्रीन पर पल-पल की जानकारी अपडेट होती है. इससे पता चलता है कि देश के किस कोने में मिसाइल गिरी है और कहां मदद की दरकार है.
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बिना इंसानी हस्तक्षेप के चलता है रेस्क्यू ऑपरेशन
इस कंट्रोल रूम की तकनीक इतनी उन्नत है कि इसे इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF), सैटेलाइट और रडार से सीधा डेटा मिलता है. यहां का सिस्टम एआई और आधुनिक एल्गोरिदम पर काम करता है.
कंट्रोल रूम की बड़ी स्क्रीन पर अलग-अलग रंगों के कोड चलते रहते हैं. नीला रंग बताता है कि एंबुलेंस रास्ते में है, लाल रंग का मतलब है कि टीम मौके पर पहुंच चुकी है और पीला रंग यह दिखाता है कि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. इजरायल की हर एंबुलेंस में खास सेंसर लगे हैं. ये सेंसर विस्फोट होते ही खुद-ब-खुद कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देते हैं.

एनडीटीवी टीम इजरायल के अंडरग्राउंड कमांड सेंटर के अंदर पहुंची.
अंडरग्राउंड 'हॉस्पिटल ऑन व्हील्स'
50 मीटर गहराई में बने इस सेंटर के भीतर सैकड़ों एंबुलेंस और बाइक्स का स्टैंड बना हुआ है. यहां 'हॉस्पिटल ऑन व्हील्स' कही जाने वाली बसें तैनात हैं. ये बसें आईसीयू, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं से लैस हैं. मिसाइल हमलों के दौरान जब घायलों को सामान्य अस्पतालों तक ले जाना जोखिम भरा होता है, तब ये बसें युद्ध क्षेत्र में ही मरीजों की जान बचाने का काम करती हैं.
इस पूरे सुरक्षा तंत्र को और भी मजबूत बनाने के लिए MDA सीधे तौर पर इजरायली सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसी 'मोसाद' के साथ तालमेल बिठाकर काम करता है. ट्रंप के अल्टीमेटम की घड़ी खत्म होने के साथ ही इजरायल का यह 'अंडरग्राउंड वॉर रूम' अब हाई अलर्ट पर है.
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