- मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण वैश्विक ईंधन संकट गहराया है, जिसके असर से ईंधन की कीमतों में वृद्धि
- दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सीएनजी की कीमतों में दो दिनों के भीतर दूसरी बार वृद्धि की गई है
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है
मिडिल ईस्ट संघर्ष की वजह से दुनियाभर में ईंंधन का संकट गहराया हुआ है. इसका असर अब धीरे-धीरे ही सही भारत में भी दिख रहा है. नतीजतन दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दामों में फिर बढ़ोतरी की गई है. आज से सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है, जिसके बाद दिल्ली में सीएनजी 80.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गए. इस लिहाज से दिल्ली में दो दिन के भीतर सीएनजी के दाम में करीब चार फीसद का इजाफा हो गया है. नोएडा-गाजियाबाद में 88.70 रुपये प्रति किलो हो गई है. यह दो दिनों के भीतर दूसरी बार कीमत बढ़ाई गई है, इससे पहले 15 मई को भी सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो महंगी की गई थी.

तेल के दाम में भी हो चुका इजाफा
इससे पहले शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. चार साल से भी ज़्यादा समय में यह पहली बार है जब कीमतों में इतनी बढ़ोतरी हुई है. ईरान युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं, जिसके चलते सरकारी तेल कंपनियों को अपने बढ़ते नुकसान का को कम करने के लिए इसका कुछ भार ग्राहकों पर भी डालना पड़ा. इससे पहले, कई महीनों तक और अहम राज्यों में चुनावों के दौरान कीमतों को स्थिर रखा गया था. लेकिन चुनाव के बाद इसमें बढ़ोतरी कर दी गई.
गैस के लिए दूसरे देशों पर निर्भर भारत
मिडिल ईस्ट में संघर्ष गहराने के बाद अब इसका असर ऊर्जा बाजार के दूसरे हिस्सों पर भी साफ दिखने लगा है. कच्चे तेल के साथ-साथ गैस की सप्लाई पर भी दबाव बढ़ा है. खासतौर पर ईरान द्वारा कतर में हमले के बाद गैस सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. देश लगभग 50 फीसदी एलएनजी (LNG) और 60 फीसदी एलपीजी (LPG) विदेशों से मंगाता है. ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में सप्लाई बाधित होने का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है.
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होर्मुज बन रहा राह की सबसे बड़ी अड़चन
ईरान के कतर पर हमले के बाद और होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से गैस की सप्लाई सामान्य तरीके से कई देशों तक नहीं पहुंच पा रही है. इसका असर भारत पर भी पड़ा है, जहां पहले की तरह नियमित सप्लाई नहीं हो पा रही. इन हालातों में भारत को अब गैस के लिए दूसरे देशों का रुख करना पड़ रहा है. खाड़ी देशों की जगह अमेरिका से गैस खरीदनी पड़ रही है. हालांकि यह विकल्प भारत के लिए महंगा साबित हो रहा है, क्योंकि अमेरिका की दूरी ज्यादा होने से ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ जाती है.
महज कुछ दिन में 4 फीसद बढ़े सीएनजी के दाम
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर एलएनजी उत्पादन में करीब 8 फीसदी की कमी आई है. इसके साथ ही सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है. इस संकट का असर घरेलू बाजार में भी दिख रहा है. दिल्ली में कुछ दिन पहले सीएनजी की कीमत 77.09 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 80.09 रुपये प्रति किलो हो गई है. यानी राजधानी में सीएनजी की कीमत में करीब 4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
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कांग्रेस के निशाने पर सरकार
देशभर में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार को निशाने पर ले चुकी है. कांग्रेस ने कहा कि तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ना भी तय है. कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया कि सालों तक जब अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें कम थीं या गिर रही थीं, तब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लगातार यह मांग करती रही कि उसका लाभ भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए और गैस, पेट्रोल व डीजल की घरेलू कीमतों में कमी की जाए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उपभोक्ताओं को लूटा गया.
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