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12वीं के री-इवैल्यूएशन में अगर छात्र के नंबर बढ़े तो पैसे करेंगे वापस- OSM मार्किंग विवाद पर CBSE

19 तारीख से री- इवैल्यूएशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इस बार कॉपी का चार्ज CBSE जो पहले लेती थी, उसको कम कर दिया गया है. बोर्ड ने बताया कि इस बार 98 लाख आंसर शीट को स्कैन किया गया. स्कैन को तीन लेयर की सिक्योरिटी में किया गया.

12वीं के री-इवैल्यूएशन में अगर छात्र के नंबर बढ़े तो पैसे करेंगे वापस- OSM मार्किंग विवाद पर CBSE
CBSE में पुनर्मूल्यांकन का विकल्प हमेशा से उपलब्ध रहा है.

CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा की ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर चल रहे विवादों के बीच आज बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान CBSE ने साफ किया कि OSM सिस्टम पहली बार प्रयोग नहीं किया गया है, इसे पहले भी इस्तेमाल किया गया था. संजय कुमार,सचिव स्कूल शिक्षा ने कहा, ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर छात्रो के अंदर कुछ संदेह है, इसको लेकर हम इसपर स्पष्ट करने के लिए आए है. यह चिंता जताई जा रही है, बच्चों को ज़्यादा नंबर आने चाहिए थे, लेकिन कम आए. विश्व में कई देश में यह सिस्टम उपयोग होता है. छात्रों के लिए री- इवैल्यूएशन की व्यवस्था उपलब्ध है.

संजय कुमार ने आगे कहा,  "सभी बच्चों का कल्याण हमारे लिए सर्वोपरि है. हम नहीं चाहते कि छात्रों को ऐसा महसूस हो कि उनकी योग्यता का सम्मान नहीं किया जा रहा है. CBSE में पुनर्मूल्यांकन का विकल्प हमेशा से उपलब्ध रहा है. CBSE ने यह निर्णय लिया है की अगर आप कॉपी देखना चाहते है और अगर आपको लगता है कि कॉपी ग़लत चेक हुई है, तो उसके लिए अब सिर्फ़ 100 रुपये लिए जाएंगे". बता दें कि 700 रुपए में जो कॉपी चेकिंग होती थी, वह अब 100 रुपये कर दी गई है.  हर सवाल की चेकिंग के अब 25 रुपए प्रति सवाल कर दिया गया है.

मैन्युअल भी चेक की कॉपी

बोर्ड ने बताया कि स्कैन को तीन लेयर की सिक्योरिटी में किया गया है. इस OSM करने से हमारे पास यह सुविधा हो गई की इसे हम रीजनल ऑफिस के बाहर भी कॉपी चेक करवा सकते है. ऑनलाइन सिस्टम होने से टोटेटलिंग में जो गलतिया होती थी वह दूर हो गई, टीचर को इस सिस्टम को लेकर ट्रेनिंग दे गई. 17 मार्च से इस सिस्टम की शुरुआत की गई. ऐसी कुल 13 हज़ार आंसर शीट ऐसी थी जो स्कैन करने के बाद भी सही से स्कैन नहीं हो पाई. इन कॉपियों को मैनुअली चेक किया गया.

इस बार जब 12वीं की 98 लाख आंसर शीट को स्कैन किया गया. स्कैन को तीन लेयर की सिक्योरिटी में किया गया. टीचर को इस सिस्टम को लेकर ट्रेनिंग दे गई. 17 मार्च से इस सिस्टम की शुरुआत की गई. 

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