भारत और नेपाल के बीच रोजाना हजारों लोग सीमा पार आते-जाते हैं और अब इस सफर को पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है. नेपाल सरकार ने भारत से आधिकारिक तौर पर अनुरोध किया है कि उसके नए बायोमेट्रिक राष्ट्रीय पहचान पत्र (National Identity Card यानी NID) को दोनों देशों के बीच यात्रा के लिए एक मान्य दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाए.
यदि भारत सरकार इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा देती है, तो नेपाली नागरिकों को भारत आने-जाने के लिए बार-बार पासपोर्ट या पुराना नागरिकता प्रमाण पत्र साथ लेकर घूमने की मजबूरी से बड़ी राहत मिल जाएगी.
कूटनीतिक रास्तों से नई दिल्ली पहुंचा प्रस्ताव
नेपाल के इमीग्रेशन विभाग के महानिदेशक राम चंद्र तिवारी ने पुष्टि की है कि यह प्रस्ताव विदेश मंत्रालय के जरिए नई दिल्ली भेजा जा चुका है. नेपाली अधिकारी फिलहाल भारत के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं.
क्या हैं मौजूदा नियम और क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
मौजूदा नियमों के तहत, यदि कोई नेपाली नागरिक हवाई मार्ग या सड़क मार्ग से भारत आता है, तो उसे अपनी पहचान के तौर पर वैध पासपोर्ट या मूल नागरिकता प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य होता है. वहीं दूसरी ओर, भारतीय नागरिकों को नेपाल में प्रवेश करने के लिए पासपोर्ट या फोटो वाला मूल मतदाता पहचान पत्र दिखाना होता है.
नेपाल सरकार अब धीरे-धीरे पुराने नागरिकता प्रमाण पत्र को पूरी तरह खत्म करने की योजना बना रही है. बैंक खाता खुलवाने, जमीन की रजिस्ट्री, पासपोर्ट बनवाने और तमाम सरकारी सेवाओं के लिए बायोमेट्रिक NID कार्ड को अनिवार्य किया जा रहा है. भविष्य में नेपाल में केवल यही एक मुख्य पहचान पत्र रहेगा. इसी वजह से नेपाल चाहता है कि भारत भी इसे आधिकारिक ट्रैवल डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता दे दे.
तकनीक से लैस और पूरी तरह सुरक्षित है यह NID कार्ड
नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि यह बायोमेट्रिक कार्ड फर्जीवाड़े को रोकने में बेहद असरदार है. इसमें नागरिक का फिंगरप्रिंट, चेहरे की डिजिटल फोटो, आईरिस स्कैन अटैच रहता है.
जैसे उन्नत बायोमेट्रिक फीचर्स शामिल हैं. बायोमेट्रिक फीचर्स की वजह से यह पहचान पत्र कागजी नागरिकता प्रमाण पत्र की तुलना में काफी सुरक्षित और आधुनिक है. इससे हवाई अड्डों और जमीनी सीमाओं पर इमीग्रेशन प्रोसेस बेहद तेज और पारदर्शी हो जाएगी.
सीमा सुरक्षा और डेटा प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
दोनों देशों के बीच बिना वीजा के आवाजाही की छूट है, लेकिन अब तक जमीनी सीमा से गुजरने वाले हर व्यक्ति का सटीक डेटा रखना एक चुनौती रहा है. द्विपक्षीय बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर भी चर्चा की है कि इस बायोमेट्रिक कार्ड के जरिए सीमा पार करने वाले यात्रियों का एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को भी निगरानी में मदद मिलेगी.
नेपाल के इमीग्रेशन विभाग का मानना है कि यद्यपि अभी सभी नागरिकों को यह कार्ड नहीं मिला है, लेकिन जिनके पास यह है, उनके लिए यात्रा बेहद आसान हो जाएगी. पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 1.5 लाख नेपाली नागरिकों ने हवाई मार्ग से भारत की यात्रा की थी, जबकि सड़क मार्ग से आने-जाने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है. भारत की मंजूरी मिलते ही लाखों यात्रियों को सीधा फायदा पहुंचेगा.
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