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इबोला के बढ़ते खतरे के बीच भारत और अफ्रीकी संघ का नई दिल्ली शिखर सम्मेलन स्थगित

भारत में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगमन से पहले और बाद की स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस प्रबंधन, रेफरल तंत्र और लैबरोटरी टेस्ट पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर्स (एसओपी) के साथ सभी स्तरों पर तैयार रहने के लिए कहा गया है.

इबोला के बढ़ते खतरे के बीच भारत और अफ्रीकी संघ का नई दिल्ली शिखर सम्मेलन स्थगित
इबोला कांगो में कई लोगों की जान ले चुका है.
  • अफ्रीका में इबोला वायरस के प्रसार के कारण भारत और अफ्रीकी संघ का शिखर सम्मेलन स्थगित किया गया है
  • भारत सरकार ने शिखर सम्मेलन की नई तिथियों को आपसी परामर्श के बाद घोषित करने का निर्णय लिया है
  • भारत में इबोला का कोई मामला नहीं आया है लेकिन निगरानी और तैयारियों को तेज किया गया है

अफ्रीका के कई हिस्सों में इबोला वायरस फैल रहा है. अब इसको देखते हुए 28 मई से दिल्ली में होने वाले अफ्रीकी संघ और भारत का एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन को स्थगित करना पड़ा है. दोनों पक्षों ने आज एक बयान में यह जानकारी दी है. भारत और अफ्रीकी संघ चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे थे. मगर इबोला के खतरे के कारण दोनों पक्षों ने इस सम्मेलन को कुछ समय के लिए टालने का फैसला किया. .

अब कब होगा सम्मेलन?

भारत सरकार ने कहा कि शिखर सम्मेलन की नई तिथियों को आपसी परामर्श के माध्यम से अंतिम रूप दिया जाएगा और उचित समय पर सूचित किया जाएगा. शिखर सम्मेलन को स्थगित करने का निर्णय भारत और अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष तथा अफ्रीकी संघ आयोग के बीच हुए परामर्श के बाद लिया गया. सरकार ने कहा, "इन परामर्शों के बाद, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन को बाद में आयोजित करना उचित होगा."

क्या भारत में भी आ गया इबोला

भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्सों में फैले इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता मानते हुए हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रखा है. इसके बाद भारत सरकार ने देश भर में निगरानी और तैयारियों के उपायों को भी तेज कर दिया है.

सूत्रों के अनुसार, भारत में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगमन से पहले और बाद की स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस प्रबंधन, रेफरल तंत्र और लैबरोटरी टेस्ट पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर्स (एसओपी) के साथ सभी स्तरों पर तैयार रहने के लिए कहा गया है.

अंतर्राष्ट्रीय सतर्कता की आवश्यकता इस तथ्य से और भी बढ़ जाती है कि इबोला वायरस सिर्फ एक तरह नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग वायरल स्ट्रेन के रूप में प्रकट होता है. इनमें से प्रत्येक की घातकता, फैलने की गति और चिकित्सा अलग-अलग हैं.फिलहाल बंडीबुग्यो वेरिएंट का इबोला फैल रहा है. ये सबसे कुख्यात जैरे स्ट्रेन की तुलना में बहुत कम बार सामने आता है. इसने 2014 से 2016 तक पश्चिम अफ्रीका में महामारी फैल गई थी. बंडीबुग्यो वेरिएंटसे सबसे ज्यादा मौतें कांगों में हुईं हैं.

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