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अफ्रीका में Ebola के नए मामले: क्या भारत के लिए खतरा है? समझें सब कुछ आसान भाषा में

अफ्रीका में इबोला का नया मामला सामने आते ही दुनिया भर की हेल्थ एजेंसियां अलर्ट हो जाती हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर इबोला को इतना खतरनाक वायरस क्यों माना जाता है.

अफ्रीका में Ebola के नए मामले: क्या भारत के लिए खतरा है? समझें सब कुछ आसान भाषा में
Ebola Virus: क्या है, कैसे फैलता है और कितना खतरनाक है?

Ebola Outbreak: इबोला एक ऐसा वायरस, जिसके नाम के साथ ही लोगों के दिमाग में लाल चेतावनी, PPE किट पहने डॉक्टर और क्वारंटीन जोन की तस्वीरें घूमने लगती हैं. अफ्रीका में इबोला के नए मामलों ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. सबसे ज्यादा डर इबोला में डेथ रेट का ज्यादा होना है. कई बार मरीज की हालत बहुत तेजी से बिगड़ने लगती है. यही वजह है कि अफ्रीका में इबोला का नया मामला सामने आते ही दुनिया भर की हेल्थ एजेंसियां अलर्ट हो जाती हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर इबोला को इतना खतरनाक वायरस क्यों माना जाता है.

इबोला एक खतरनाक वायरस है जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है और इसकी मौत दर काफी ज्यादा हो सकती है

इबोला का नाम सुनते ही दिमाग में डर और खतरे की तस्वीरें आ जाती हैं—लेकिन यह वायरस इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

आखिर क्या है इबोला वायरस? (What Is Ebola?)

इबोला एक खतरनाक वायरल बीमारी है, जो किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार या शरीर से निकलने वाले दूसरे फ्लूइड्स के संपर्क में आने से फैल सकती है.

इन्फेक्टेड सीरिंज, मेडिकल इक्विपमेंट या गंदगी भी इसकी वजह बन सकती हैं. माना जाता है कि यह वायरस सबसे पहले जंगली जानवरों, खासकर चमगादड़ों से इंसानों तक पहुंचा था.

इबोला नाम अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की इबोला नदी के नाम पर पड़ा, जहां 1976 में इसका बड़ा outbreak सामने आया था.

इबोला से जुड़े जरूरी फैक्ट्स:

  • पहली बार 1976 में सामने आया
  • शरीर के फ्लूइड्स से फैलता है
  • डेथ रेट ज्यादा हो सकता है
  • हवा से नहीं फैलता

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क्यों डराता है Ebola? (Why Is Ebola So Feared?)

इबोला को लेकर सबसे बड़ा डर इसकी मौत दर को लेकर रहता है. कई बार इस वायरस की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है. कुछ मामलों में मरीज की हालत इतनी तेजी से बिगड़ती है कि इलाज का मौका तक कम मिल पाता है.

शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं, जैसे बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द. लेकिन गंभीर मामलों में उल्टी, डायरिया, अंदरूनी रक्तस्राव और कई अंगों के फेल होने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.

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इबोला को खतरनाक क्यों माना जाता है?

  • हाई डेथ रेट
  • तेजी से हालत बिगड़ना
  • शुरुआती लक्षण सामान्य जैसे लगना

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इस बार इस बीमारी को लेकर डर और भी ज्यादा है क्योंकि इसके मामले एक से ज्यादा इलाको से सामने आ रहे हैं.

कांगो के बाद युगांडा और अब कुछ अन्य जगहों से भी इसके केस सामने आ चुके हैं. इस बार इबोला का  Bundibugyo strain सामने आया है. 2007 में इसे पहली बार पहचाना गया था. वैज्ञानिक इसे इबोला के कम देखने वाले प्रकारों में गिनते हैं.

क्या इबोला कोविड की तरह तेजी से फैल सकता है? (Can Ebola Spread Like Covid?)

इबोला, कोविड की तरह हवा में आसानी से फैलने वाला वायरस नहीं माना जाता. कोविड जहां हवा के जरिए तेजी से फैल सकता था, वहीं इबोला आमतौर पर किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी या दूसरे बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क से फैलता है.

यही वजह है कि इसका फैलाव कोविड जितना तेज नहीं माना जाता. हालांकि अस्पतालों, भीड़भाड़ वाली जगहों या मरीज की देखभाल कर रहे परिवारों में इसका खतरा तेजी से बढ़ सकता है.

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क्या भारत तक पहुंच सकता है इबोला? (Can Ebola Reach India?)

आज के दौर में लोग घंटों में एक देश से दूसरे देश पहुंच जाते हैं, इसलिए किसी भी वायरस को लेकर पूरी तरह निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता. हालांकि फिलहाल भारत में इबोला को लेकर किसी बड़े खतरे जैसी स्थिति नहीं बताई जा रही. आमतौर पर ऐसे मामलों में एयरपोर्ट पर जांच बढ़ा दी जाती है और संदिग्ध मरीजों पर नजर रखी जाती है.

इबोला का डर सिर्फ उसके लक्षणों की वजह से नहीं, बल्कि उसके पुराने रिकॉर्ड की वजह से भी है. दुनिया 2014 का वो दौर देख चुकी है, जब पश्चिम अफ्रीका में इस वायरस ने भारी तबाही मचा दी थी और हजारों लोगों की जान चली गई थी.

कई देशों के हेल्थ सिस्टम तक हिल गए थे. यही वजह है कि आज भी इबोला का नया मामला सामने आते ही दुनिया भर की हेल्थ एजेंसियां अलर्ट मोड में आ जाती हैं.

फिलहाल घबराने जैसी स्थिति नहीं बताई जा रही, लेकिन इस वायरस को हल्के में लेने की गलती भी कोई नहीं करना चाहता.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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