- न्यूयॉर्क शहर 6 बिलियन डॉलर के बजट घाटे से जूझ रहा है और कमाई के नए स्रोत तलाश रहा है.
- ब्रुकलिन ब्रिज के नीचे 13,000 स्क्वायर फीट जगह को लीज पर देने का प्रस्ताव न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल ने रखा है.
- इन जगहों से मैनहट्टन के औसत किराए पर सालाना करीब 17 मिलियन डॉलर की कमाई हो सकती है.
दुनिया के सबसे अमीर शहरों में शुमार न्यूयॉर्क अब अपनी तंगी छिपा नहीं पा रहा. न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक 6 बिलियन डॉलर के बजट घाटे से जूझ रहा शहर का प्रशासन अब उन जगहों से कमाई के रास्ते तलाश कर रहा है, जिन पर कभी किसी ने ध्यान नहीं दिया. यहां तक कि ऐतिहासिक ब्रुकलिन ब्रिज (Brooklyn Bridge) के नीचे की बंद पड़ी जगहें भी अब ‘कमाई का जरिया' बन सकती हैं.
ब्रुकलिन ब्रिज के नीचे छिपा ‘खजाना' अब बाजार में
न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल ने ब्रुकलिन ब्रिज के नीचे मौजूद करीब 13,000 स्क्वायर फीट की जगह को लीज पर देने का प्रस्ताव रखा है. यह वही जगह है जहां कभी आर्ट शो हुआ करते थे, लेकिन 2001 के बाद से ये बंद पड़ी है. आज इन वॉल्ट्स का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी गाड़ियों की पार्किंग के लिए हो रहा है. यानी एक तरह से 'महंगी जमीन, सस्ता इस्तेमाल'. दिलचस्प बात यह भी है कि 1960 के दशक में इनमें से कुछ हिस्सों को न्यूक्लियर फॉलआउट शेल्टर के तौर पर भी तैयार किया गया था.
अब योजना है कि इन्हें कमर्शियल या मिक्स्ड-यूज स्पेस में बदला जाए, ताकि शहर को ऐसी जगह से भी कमाई हो, जो अभी तक ‘डेड एसेट' बनी हुई थी.
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कितनी कमाई की उम्मीद?
काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, अगर इन जगहों को मैनहट्टन के औसत किराए पर दिया गया, तो हर साल करीब 17 मिलियन डॉलर (161 करोड़ रुपये) की कमाई हो सकती है. यह प्रस्ताव New York City Council के 127 बिलियन डॉलर के वैकल्पिक बजट प्लान का हिस्सा है, जो मेयर जोहरान ममदानी की योजना से अलग रास्ता सुझाता है.
सिर्फ ब्रिज ही नहीं, हर कोना ‘कमाई का मौका'
काउंसिल ने सिर्फ ब्रिज तक खुद को सीमित नहीं रखा है. शहर के 15 मरीना में डॉकिंग फीस बढ़ाने का प्रस्ताव है. करीब 1 मिलियन डॉलर सालाना कमाई को उम्मीद है. इसके अलावा पार्कों में 'डेस्टिनेशन कंसेशंस' (बार, फूड हॉल, बैठने की जगह) बनाने की भी योजना है. इससे लगभग 10 मिलियन डॉलर सालाना की उम्मीद जताई जा रही है. यानी साफ है कि न्यूयॉर्क अब हर खाली कोने को 'रेवेन्यू मशीन' में बदलने की तैयारी में है.
टैक्स बनाम जुगाड़: असल लड़ाई यहां है
इस पूरी योजना के पीछे असली टकराव है. टैक्स बढ़ाया जाए या नए कमाई के रास्ते निकाले जाएं? मेयर जोहरान ममदानी 'टैक्स द रिच' की रणनीति पर जोर दे रहे हैं, जबकि सिटी काउंसिल का कहना है कि टैक्स बढ़ाए बिना, सेवाओं में कटौती किए बिना और इमरजेंसी फंड छुए बिना भी शहर की वित्तीय हालत सुधारी जा सकती है. काउंसिल मेंबर Julie Menin ने साफ कहा है कि शहर की जरूरतें पूरी करने का बोझ आम लोगों या किरायेदारों पर नहीं डाला जा सकता.
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अब आगे क्या?
फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, जिसे मंजूरी मिलना अभी बाकी है. लेकिन यह साफ संकेत है कि दुनिया की आर्थिक राजधानी भी अब ‘जमीन बेचो या किराए पर दो' वाले मॉडल की ओर झुक रही है.
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