Tiddi Attack News: भारत में पश्चिमी राजस्थान- गुजरात और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में हर साल फसलों को अपनी चपेट में लेने वाले टिड्डी दल से इस बार किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है. क्षेत्रीय टिड्डी नियंत्रण कार्यालय द्वारा किए गए सघन सर्वे और मॉनिटरिंग के आधार पर यह पुख्ता किया गया है कि इस वर्ष टिड्डियों के हमले की आशंका न के बराबर है. एनडीटीवी से खास बातचीत में राजस्थान के क्षेत्रीय टिड्डी सह-आईपीएम केंद्र के उप निदेशक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग की पूर्व तैयारियों और जमीनी रिपोर्ट के अनुसार, इस साल टिड्डियों का दल भारत की सीमा में प्रवेश नहीं करेगा. इससे किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा.
इन जिलों के किसानों को बड़ी राहत
आमतौर पर हर साल मई और जून के महीनों में पड़ने वाली तल्ख गर्मी के दौरान खाड़ी देशों से उड़कर टिड्डियां पाकिस्तान के रास्ते भारत में दाखिल होती हैं. इनका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही और पाली जैसे जिलों में देखने को मिलता था. ये दल खेतों में खड़ी और कटाई के कगार पर पहुंच चुकी फसलों को शत-प्रतिशत तक चट कर जाते थे. लेकिन इस बार विभाग के सकारात्मक दावों के बाद इन क्षेत्रों के किसानों ने चैन की सांस ली है. प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम में न आएं और पैनिक न हों.
टिड्डी और ग्रसशॉपर में जानें अंतर
अक्सर जानकारी के अभाव में किसान टिड्डी (Locust) और ग्रसशॉपर (Grasshopper) के बीच का अंतर नहीं समझ पाते हैं. टिड्डी नियंत्रण कार्यालय लगातार इस विषय पर किसानों को जागरूक कर रहा है. दरअसल, ग्रसशॉपर बहुत ही सीमित संख्या में होते हैं और फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. इसके विपरीत, टिड्डियां बेहद खतरनाक होती हैं जो हजारों और लाखों की तादाद में एक साथ झुंड बनाकर फसलों पर हमला करती हैं. कुछ ही घंटों में पूरा का पूरा खेत साफ करने की क्षमता सिर्फ टिड्डी दल में होती है.
ड्रोन से सरकार ने करवाया सर्वे
भले ही इस साल टिड्डियों के आने की संभावना नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भारत सरकार और संबंधित विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं. उप निदेशक वीरेंद्र सिंह के अनुसार, विभाग ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 55 विशेष वाहनों को पूरी तरह तैयार कर रखा है. गौरतलब है कि भारत में अब तक 20 से अधिक बार टिड्डियों का बड़ा हमला हो चुका है, जिसमें पहला हमला साल 1812 में दर्ज किया गया था.
इसके बाद साल 1993 और फिर वर्ष 2019-20 में हुए सबसे भीषण हमलों ने किसानों को भारी क्षति पहुंचाई थी. उसी कड़वे अनुभव से सीख लेते हुए भारत सरकार ने पहली बार आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर लाखों हेक्टेयर क्षेत्र का हवाई सर्वे करवाया है ताकि टिड्डियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा सके.
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