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ट्रंप के बेडरूम तक पहुंचते हैं कॉमेडियन के जोक्स, फिर भी नहीं कर सकते कुछ! जानिए अमेरिकियों की यह पावर

अमेरिका में बोलने की आजादी भारत से अलग क्यों है? यहां समझिए क्या है अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन की ताकत, जिसे द फर्स्ट अमेंडमेंट भी कहा जाता है.

ट्रंप के बेडरूम तक पहुंचते हैं कॉमेडियन के जोक्स, फिर भी नहीं कर सकते कुछ! जानिए अमेरिकियों की यह पावर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप की फोटो
  • अमेरिका में लेट नाइट शोज राष्ट्रपति के विवादित फैसलों पर कॉमेडी के जरिए कड़े सवाल उठाते हैं और आलोचना करते हैं
  • अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट बोलने, धर्म, प्रेस, शांतिपूर्ण विरोध और याचिका दायर करने की आजादी देता है
  • फर्स्ट अमेंडमेंट 1791 में अमेरिकी Bill of Rights के साथ जोड़ा गया था ताकि बोलने की आजादी सरकार न छीन सके

अमेरिका में लेट नाइट शोज का बड़ा क्रेज है. जिमी किमेल, जिमी फैलन और स्टीफन कोलबर्ट जैसे बहुत फेमस लेट नाइट होस्ट हैं. यह सभी अमेरिकी राष्ट्रपति को निशाने पर लेते हैं, उनके हर विवादित फैसले को कॉमेडी की चाशनी में लिपटाकर एक पत्रकार की भूमिका निभाते हैं, कड़े सवाल पूछते हैं. हालांकि इस कॉमेडी में राष्ट्रपति तक पर कुछ ऐसे प्रहार होते हैं जिसकी कल्पना हम भारत में नहीं कर सकते हैं. उनके प्राइवेट पार्ट और सेक्सुअल लाइफ तक पर तंज होता है. जवाब में डोनाल्ड ट्रंप जुबानी हमला तो करते हैं लेकिन अरेस्ट करने जैसा काम चाहकर भी नहीं कर पाते.

सवाल है कि अमेरिका में कॉमेडियंस को यह पावर कहां से मिली है. जवाब है अमेरिकी संविधान और खासकर उसमें हुआ पहला संशोधन, जिसे फर्स्ट अमेंडमेंट कहा जाता है. चलिए आपको बताते हैं अमेरिका का यह फर्स्ट अमेंडमेंट क्या है.

अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट

अमेरिका के संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट लोगों की कुछ बुनियादी आजादियों की रक्षा करता है. इसे 1791 में अमेरिकी संविधान के Bill of Rights (अधिकार पत्र) के साथ जोड़ा गया था. उस समय अमेरिका बनने के बाद यह चिंता थी कि सरकार लोगों की बोलने और अपने विचार रखने की आजादी पर रोक न लगा दे. इसलिए फर्स्ट अमेंडमेंट में कहा गया कि सरकार धर्म को लेकर किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं दे सकती और लोगों को धर्म मानने की आजादी होगी. साथ ही लोगों को अपनी बात कहने, प्रेस के जरिए खबर और विचार सामने रखने, शांतिपूर्वक जमा होने और सरकार से अपनी शिकायत रखने का अधिकार दिया गया.

बहुत आसान भाषा में समझें तो फर्स्ट अमेंडमेंट का मकसद यह है कि सरकार लोगों की आवाज, धर्म, प्रेस और शांति से विरोध की आजादी को मनमाने तरीके से नहीं छीन सकती. वैसे इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह की बात पर कोई सीमा नहीं हो सकती. अमेरिकी अदालतों ने समय के साथ तय किया है कि इन अधिकारों की सीमाएं क्या होंगी. इसके बावजूद अमेरिका में बोलने की आजादी का जो दायरा है, वह भारत की तुलना में बहुत बड़ा है.

अमेरिका में फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत मिली आजादी का इस्तेमाल करने के लिए किसी खास उम्र तक पहुंचने की जरूरत नहीं होती. ये आजादी आपको अमेरिका में पैदा होते ही मिल जाती है. फ्री स्पीच सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार फर्स्ट अमेंडमेंट से मिलने वाली सुरक्षा के लिए नागरिकता की भी कोई शर्त नहीं है. अगर आप अमेरिका में हैं, तो आपको बोलने, धर्म, प्रेस, जमा होने और याचिका दायर करने की आजादी है. यह अमेरिकी सरकार को आपको ऐसी बात कहने के लिए मजबूर करने से रोकता है जो आप नहीं कहना चाहते. वहां की सरकार आपको दूसरों की बातें सुनने या पढ़ने से भी नहीं रोक सकती, भले ही आप खुद कभी कुछ न बोलें, आपको जानकारी पाने का अधिकार है.

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