- जब श्रीलंका अपने सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब IMF मदद देने को लेकर शुरू में बेहद हिचकिचा रहा था.
- श्रीलंका के पूर्व वित्त मंत्री अली साबरी ने एक पॉडकास्ट में बताया कि तब कैसे निर्मला सीतारमण ने मदद की थी.
- भारत के वित्तीय आश्वासन से श्रीलंका के लिए IMF मदद का रास्ता मजबूत हुआ.
श्रीलंका 2022 में जब अपने सबसे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF से मदद हासिल करना आसान नहीं था. IMF के अधिकारी श्रीलंका को लेकर काफी नकारात्मक नजरिया रखते थे. ऐसे समय में भारत ने न सिर्फ श्रीलंका का साथ दिया, बल्कि IMF से आर्थिक मदद का रास्ता खोलने में भी अहम भूमिका निभाई. श्रीलंका के पूर्व वित्त मंत्री अली साबरी ने एक पॉडकास्ट में उस दौर की पूरी कहानी साझा की है. उनके मुताबिक, भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक हस्तक्षेप ने IMF के साथ श्रीलंका की बेहद अहम बैठक का माहौल ही बदल दिया था.
IMF अधिकारियों का रुख था बेहद नकारात्मक
अली साबरी के मुताबिक, श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान उन्हें IMF नेतृत्व के साथ बातचीत की जिम्मेदारी दी गई थी. वह वॉशिंगटन पहुंचे और IMF के क्षेत्रीय निदेशकों के साथ बैठक की. लेकिन बैठक का अनुभव उनके लिए निराशाजनक रहा.
साबरी ने बताया कि IMF के अधिकारियों का रवैया श्रीलंका को लेकर काफी नकारात्मक था. उनका कहना था कि श्रीलंका पहले भी कई बार इसी तरह की स्थिति में फंसा था और इस बार भी उन्हें भरोसा नहीं था कि चीजें अलग होंगी.
साबरी के मुताबिक, उन्हें लगा कि IMF अधिकारी श्रीलंका की स्थिति को समझने के लिए तैयार नहीं थे और उनमें पर्याप्त सहानुभूति नहीं थी. यही वजह थी कि आगे होने वाली IMF नेतृत्व के साथ बैठक को लेकर भी श्रीलंकाई पक्ष काफी चिंतित था.
फिर हुई निर्मला सीतारमण से मुलाकात
अली साबरी के मुताबिक, उन्हें IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा और IMF की तत्कालीन डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ के साथ दोपहर 3 बजे महत्वपूर्ण बैठक करनी थी. इससे पहले उनकी मुलाकात भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से हुई.
साबरी ने बताया कि सीतारमण ने उनसे पूछा कि IMF के साथ बैठक कैसी रही. जब उन्होंने बताया कि IMF का रुख सकारात्मक नहीं है और कई मुद्दों को लेकर वहां हिचकिचाहट है, तो सीतारमण ने उन्हें भरोसा दिया कि वह खुद जॉर्जीवा से पहले मुलाकात करेंगी और श्रीलंका के मामले में बात रखेंगी.
Sri Lanka's former Finance Minister Ali Sabry reveals how the IMF was initially reluctant to provide assistance to Sri Lanka during its 2022 economic crisis.
— Facts (@BefittingFacts) August 26, 2026
He says India and FM @nsitharaman stepped in, with Nirmala Sitharaman meeting IMF chief Kristalina Georgieva and pushing… pic.twitter.com/ImhXN6bNpv
IMF बैठक में अचानक बदल गया माहौल
अली साबरी के मुताबिक, जब वह IMF की शीर्ष नेतृत्व के साथ अगली बैठक में पहुंचे तो वहां का पूरा माहौल बदला हुआ था.
उन्होंने बताया कि बातचीत का अंदाज, माहौल और IMF का रवैया पहले की तुलना में काफी सकारात्मक था. क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने उन्हें बताया कि उनकी अभी-अभी निर्मला सीतारमण के साथ बैठक हुई है. साबरी के अनुसार, जॉर्जीवा ने कहा कि उस बैठक का करीब 70 से 80 फीसद हिस्सा भारत के बजाय श्रीलंका के मुद्दे पर था.
यानी भारत की वित्त मंत्री ने अपनी बातचीत में श्रीलंका की आर्थिक स्थिति और उसे तत्काल मदद की जरूरत को प्रमुखता से उठाया.
भारत ने IMF के सामने दिया अहम भरोसा
श्रीलंका की आर्थिक स्थिति उस समय बेहद खराब थी. देश के पास जरूरी आयात के लिए विदेशी मुद्रा की भारी कमी थी. ईंधन, भोजन और दवाइयों जैसी जरूरी चीजों की किल्लत हो रही थी और सरकार को अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत थी.
ऐसे समय में IMF से वित्तीय पैकेज हासिल करने के लिए श्रीलंका को अपने प्रमुख कर्जदाताओं से वित्तीय आश्वासन की जरूरत थी.
भारत ने इस मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण कदम उठाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत IMF को वित्तीय आश्वासन देने वाला पहला प्रमुख द्विपक्षीय कर्जदाता बना. इससे श्रीलंका के लिए IMF कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का रास्ता मजबूत हुआ.
बाद में IMF ने श्रीलंका के लिए करीब 3 अरब डॉलर के विस्तारित फंड सुविधा कार्यक्रम को मंजूरी दी.

श्रीलंका के पूर्व वित्त मंत्री अली साबरी
Photo Credit: AFP
भारत की भूमिका के दूसरे पहलू
श्रीलंका के संकट के दौरान भारत की भूमिका केवल IMF के सामने समर्थन देने तक सीमित नहीं रही. भारत ने संकट के सबसे मुश्किल दौर में श्रीलंका को जरूरी सामान और वित्तीय सहायता भी दी.
लेकिन अली साबरी की कहानी भारत की भूमिका के एक दूसरे पहलू को सामने लाती है. उनके मुताबिक, भारत ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सामने श्रीलंका की स्थिति को समझाने और उसके लिए समर्थन जुटाने में भी सक्रिय भूमिका निभाई.
यही वजह है कि साबरी उस IMF बैठक को श्रीलंका की आर्थिक रिकवरी की नींव रखने वाला महत्वपूर्ण क्षण मानते हैं.
क्यों अहम है अली साबरी की यह बात?
श्रीलंका के आर्थिक संकट को आमतौर पर देश की गलत आर्थिक नीतियों, विदेशी मुद्रा संकट और भारी कर्ज के संदर्भ में देखा जाता है. लेकिन अली साबरी का यह अनुभव बताता है कि संकट से बाहर निकलने में कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी कितना महत्वपूर्ण था.
उनके मुताबिक, जिस IMF से उन्हें शुरुआत में निराशा मिली थी, उसी के शीर्ष नेतृत्व का रुख भारत की पहल के बाद काफी बदल गया.
यह कहानी भारत और श्रीलंका के रिश्तों के उस पहलू को भी सामने लाती है, जिसमें नई दिल्ली ने आर्थिक संकट के दौरान पड़ोसी देश को केवल मानवीय और वित्तीय सहायता ही नहीं दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उसका साथ दिया.
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