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बारूद के शोर में 'आजादी' की उम्मीद, ईरान पर ट्रंप के हमले से खामेनेई विरोधियों में जगी आस

ईरान में खामेनेई विरोधियों को उम्मीद थी कि पिछले प्रदर्शन के दौरान ट्रंप ने जिस तरह से मदद का वादा किया था, वह उसे निभाएंगे. अब अमेरिका इजरायल के हमले के बाद उनकी उम्मीदें बढ़ गई हैं.

बारूद के शोर में 'आजादी' की उम्मीद, ईरान पर ट्रंप के हमले से खामेनेई विरोधियों में जगी आस

सात हफ्ते पहले की बात है. ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ पूरे देश में जबर्दस्त प्रदर्शन हो रहे थे. सड़कों से लेकर कॉलेजों तक में लोग सरकार के खिलाफ झंडे लेकर उतर आए थे. फिर खामेनेई सरकार ने डंडा चलाया, अपनी वफादार सेना उतार दी और प्रदर्शन को सख्ती से कुचल दिया. इसके बाद छिटपुट प्रदर्शन की खबरें ही बाहर आईं. 

शनिवार को हमले से पहले तक ईरान में सरकार के विरोध में आवाजें गूंज रही थीं. पिछले हफ्ते कम से कम 10 कॉलेज कैंपसों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनों की वजह से कई यूनिवर्सिटी बंद करनी पड़ीं और ऑनलाइन क्लास चलानी पड़ीं. कई सरकारी कर्मचारियों ने भी खामेनेई की खिलाफत की, लेकिन सरकार ने सख्ती से उनका मुंह बंद कराना जारी रखा. 

ईरान में सरकार के विरोधियों को ट्रंप से उम्मीदें थीं. उन्हें लग रहा था कि पिछले प्रदर्शन के दौरान ट्रंप ने जिस तरह से प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया था और मदद देने का वादा किया था, वह उसे निभाएंगे. अमेरिका ने जिस तरह से मिडिल ईस्ट में अपनी फौज तैनात करके ईरान की घेराबंदी की, उससे लग रहा था कि ट्रंप ईरान की खामेनेई सरकार को बख्शेंगे नहीं.  

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और आखिर वो दिन आ ही गया. शनिवार सुबह जब ईरान में आम दिनों जैसा माहौल था, सड़कों पर गाड़ियों की भरमार थी, लोग अपने-अपने काम पर जाने की जद्दोजहद में जुटे थे. तभी अचानक धमाके गूंजने लगे. अफरातफरी मच गई. प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से आईं मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आवास के आसपास के कई घरों से गहरा काला धुआं निकलता नजर आया. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले शुरू हो चुके थे. 

खबरों के मुताबिक, इसके बाद जगह जगह से धमाकों की खबरें आने लगीं. चीख-पुकार मच गई. दुकानें बंद होने लगीं. लोग जल्द से जल्द सुरक्षित ठिकानों की तरफ दौड़ने लगे. जगह जगह से धमाकों की खबरें आने लगीं. चीख-पुकार मच गई. दुकानें बंद होने लगीं. सरकार ने अफवाहें फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट बंद कर दिया. फोन सेवाएं भी सीमित कर दीं. 

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ईरान पर बमबारी के कुछ देर बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो मैसेज जारी किया. खामेनेई सरकार को चेतावनी देने के अलावा उन्होंने ईरानियों के नाम संदेश दिया और कहा कि आजादी का वक्त आ गया है. ट्रंप ने कहा कि ईरान के महान और गौरवशाली लोगो, ... मुझे बस लोगों के लिए आजादी चाहिए. मुझे एक सुरक्षित देश चाहिए,  और हमें वह मिलेगा. 

ट्रंप ने नागरिकों को घर के अंदर रहने की चेतावनी दी. कहा कि सुरक्षित रहें. घर से बाहर न निकलें. बाहर बहुत खतरा है. किसी भी जगह बम गिर सकते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि जब हमारा काम पूरा हो जाए, तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लें.  यह पूरी तरह आपकी होगी. शायद पीढ़ियों तक यही आपका इकलौता मौका होगा.

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इस बीच ईरान में सरकार समर्थक कुछ लोग सड़कों पर उतर आए. खामेनेई के सपोर्ट में तेहरान में झंडे लहराए और अपना समर्थन व्यक्त किया. 

कुछ देर बाद ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का भी बयान आ गया. उन्होंने ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान की जनता से मदद का जो वादा किया था, वो अब पूरा किया जा रहा है. ये मानवीय मदद है और इसका निशाना ईरान का इस्लामिक शासन है न कि ईरान की जनता. 

उन्होंने आगे कहा कि अंत में जीत ईरान के लोगों की ही होगी. देश में बदलाव लाने की जिम्मेदारी जनता की है. रेजा ने लोगों से अपील की कि वे सतर्क और तैयार रहें. सही समय आने पर वह खुद लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए कहेंगे. उन्होंने कहा कि अंतिम जीत अब करीब है और वह जल्द ही लोगों के बीच आकर ईरान को दोबारा बनाने में साथ देना चाहते हैं. 

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