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मुंह में राम बगल में छुरी! दोस्त सऊदी के खिलाफ हूतियों से चीन की साठगांठ का खुलासा

UN ने हूती विद्रोहियों को हथियार बेचने पर बैन लगा रखा है और चीन का कहना है कि वह इसका पालन करता है. लेकिन एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि हूती विद्रोही चीन से मिले पुर्जों का इस्तेमाल करके अपनी खुद की एडवांस्ड मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

मुंह में राम बगल में छुरी! दोस्त सऊदी के खिलाफ हूतियों से चीन की साठगांठ का खुलासा
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो- एएफपी)
  • हूती विद्रोही चीन से मिले पुर्जों से एडवांस्ड मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं- रिपोर्ट
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि हूती मिसाइल की रेंज 1200 मील तक पहुंच सकती है, इजरायल और सऊदी जद में होगा
  • चीन की प्रिसिजन-मेटल कंपनी से हथियार पुर्जे मिल रहे हैं, जो हूतियों के हथियार निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं

क्या सऊदी अरब के लिए चीन को दोस्त मानना, उसके साथ रिश्तों को मजबूत करना बैकफायर कर गया है. यमन में बसे और ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही इस समय सऊदी पर जबरदस्त हमला कर रहे हैं. ऐसे में एक रिपोर्ट सामने आई है जो हूतियों से चीन की साठगांठ का खुलासा करती है. इस नई रिपोर्ट से पता चलता है कि हूती विद्रोही चीन से मिले पुर्जों का इस्तेमाल करके अपनी खुद की एडवांस्ड मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहे हैं. यह एक ऐसी तकनीकी तरक्की है जिससे सऊदी के लिए ईरान समर्थित इस गुट से पैदा होने वाला खतरा और बढ़ जाएगा.

रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

वॉल स्ट्रीट जनरल की खबर के अनुसार 'कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च' ने यह रिपोर्ट छापी है. यह रिपोर्ट बताती है कि हूती विद्रोहियों ने एक चीनी सप्लायर से कई ऐसे पुर्जे मंगवाए हैं जिनकी जरूरत ईरान के सबसे ताकतवर हथियारों में से एक, 'खेबर शेकन' का वर्जन बनाने के लिए होती है. अगर हूती ने यह मिसाइल बना ली तो उस मिसाइल की रेंज लगभग 1,200 मील तक होगी, जिससे पूरा सऊदी अरब और इजरायल इसकी जद में आ जाएंगे.

गौरतलब है कि 'कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च' संघर्ष वाले इलाकों में काम करने वाला और हथियारों के इस्तेमाल व उनकी सप्लाई चेन पर रिपोर्ट देने वाला एक ग्रुप है. रिपोर्ट के अनुसार इसके सीनियर एनालिस्ट फैबियन हिंज ने कहा कि हूती विद्रोहियों के हथियार बनाने के ठिकाने इतनी अच्छी तरह से छिपाए गए हैं कि यह पता लगाना मुश्किल है कि प्रोडक्शन कितना आगे बढ़ चुका है. 

लेकिन शिपिंग डॉक्यूमेंट्स से चीन की एक प्रिसिजन-मेटल बनाने वाली कंपनी की पहचान हुई है, जिसका नाम रिपोर्ट में नहीं बताया गया है. UN की रिपोर्ट और हथियारों के जानकारों द्वारा इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के लिए जब्त किए गए सामान का सबसे बड़ा सोर्स अब चीनी कंपनियां हैं. डेटा से पता चलता है कि हूथी विद्रोहियों को ड्रोन के पुर्जे सप्लाई करने वाली ज्यादातर कंपनियां, जिन पर अमेरिका ने बैन लगाया है, वे चीन में स्थित हैं.

UN के यमन प्रतिबंध पैनल के पूर्व एक्सपर्ट हेनरी थॉम्पसन ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि हूती विद्रोही कम से कम दो साल से चीन से सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइलों के पुर्जे मंगा रहे हैं.

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सऊदी-चीन में मजबूत हो रहे रिश्ते

सऊदी अरब और चीन के रिश्ते पिछले एक दशक में तेजी से मजबूत हुए हैं. 2016 में दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की, जिसके बाद ऊर्जा, व्यापार, निवेश और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा. सऊदी अरब चीन को कच्चे तेल के प्रमुख सप्लायर्स में शामिल है, जबकि चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. 

2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 107.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया. अब दोनों देश तेल के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और पर्यटन में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं. यह साझेदारी सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने की कोशिश और चीन की ऊर्जा जरूरतों, दोनों के लिहाज से अहम है.

चीन हूतियों की मदद पर क्या कहता है?

चीन का आधिकारिक स्टैंड है कि वह हूती विद्रोहियों पर लगे UN के हथियारों के प्रतिबंध का पालन कर रहा है. हालांकि, हूती विद्रोहियों द्वारा मंगाए गए कुछ पुर्जे 'डुअल-यूज' यानी दोहरे इस्तेमाल वाले थे. इनका इस्तेमाल आम कामों के लिए भी किया जा सकता है, लेकिन कुछ पुर्जे खास तौर पर मिसाइल के इस्तेमाल के लिए ही बनाए गए थे.

'होराइजन एंगेज' में रिसर्च हेड माइकल नाइट्स ने कहा है कि बैलिस्टिक मिसाइलों में चीन के पुर्जों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि बीजिंग के पास अपनी डुअल-यूज टेक्नोलॉजी के आखिरी इस्तेमाल को कंट्रोल करने की न तो इच्छाशक्ति है और न ही साधन.

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