सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल सप्लाई से जुड़े ठिकानों पर हमलों ने दुनिया भर के ऑयल मार्केट की चिंता बढ़ा दी है. यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों और समुद्र में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी साफ दिख रहा है. ऐसे में सवाल है कि क्या भारत में पेट्रोल और डीजल फिर महंगे होंगे?
कच्चा तेल 105 डॉलर के पार
आज यानी सोमवार, 12 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 105.48 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. इसमें 0.73% की तेजी रही. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.64% बढ़कर 92.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.भारत के लिए कच्चा तेल पहले से महंगा पड़ रहा है. अक्टूबर में भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट का औसत भाव 121.85 डॉलर प्रति बैरल बताया गया है. 9 अक्टूबर को यह 124.22 डॉलर प्रति बैरल था.
एयरपोर्ट पर हमले से बढ़ाई टेंशन
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया. रविवार को भी नए हमले की खबर आई. रियाद एयरपोर्ट पर करीब 300 उड़ानें रद्द होने की बात कही गई. जवाब में सऊदी गठबंधन ने यमन में हूतियों के 82 ठिकानों पर हवाई हमले किए.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शनिवार को हूतियों के खिलाफ सऊदी हमलों में अमेरिका के शामिल होने की संभावना जताई.
तेल सप्लाई पर डबल अटैक
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है, लेकिन उसकी सप्लाई पर कई तरफ से दबाव है. होर्मुज स्ट्रेट में ईरान से जुड़े संघर्ष और बाब-अल-मंदाब में हूतियों के खतरे ने तेल की आवाजाही को मुश्किल बनाया है.होर्मुज से बचने के लिए सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन अहम है, जो पूर्वी सऊदी अरब से तेल को लाल सागर के यनबू बंदरगाह तक पहुंचाती है. 10 सितंबर 2026 को इस पाइपलाइन पर हमले की खबर भी सामने आई थी.
भारत में पेट्रोल-डीजल फिर होगा महंगा?
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर तेल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. नायरा एनर्जी और जियो-बीपी पहले ही पेट्रोल में ₹5 और डीजल में ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर चुकी हैं. पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में पेट्रोल के दाम ₹109 प्रति लीटर के पार पहुंच गए हैं. हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों में बदलाव नहीं किया है. इस साल मई में पेट्रोल-डीजल दोनों के दाम करीब ₹7.50 प्रति लीटर बढ़ाए थे लेकिन इसके बाद कीमतें जस की तस बनी हुई है.
तेल टैंकरों पर हमलों और शिपिंग पर दबाव से सप्लाई की चिंता बढ़ी है. सऊदी कंपनी अरामको की ओर से नुकसान की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने पर भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. गोल्डमैन सैक्स ने दिसंबर के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान 85 डॉलर से बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है. हालांकि, उसका मानना है कि मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई धीरे-धीरे संभलने पर कीमतें घट सकती हैं. भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं, यह कच्चे तेल की कीमतों, सप्लाई और तेल कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करेगा.
यह भी पढ़ें | RBI ने गिरते रुपये को थामने के लिए खेला बड़ा दांव! सरकारी तेल कंपनियों के लिए खोली स्पेशल डॉलर विंडो
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं