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सऊदी की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनी अरामको पर फिर हमले का दावा, जानिए कौन हैं हूती और क्यों कर रहे बार-बार हमले

यह ग्रुप 1990 के दशक में यमन के सुदूर उत्तरी इलाके में शिया इस्लाम के जैदी पंथ को फिर से मजबूत करने वाले आंदोलन के तौर पर उभरा. जैदी पंथ ने कभी यमन पर शासन किया था, लेकिन उनका उत्तरी गढ़ गरीबी और हाशिए पर धकेल दिया गया था.

सऊदी की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनी अरामको पर फिर हमले का दावा, जानिए कौन हैं हूती और क्यों कर रहे बार-बार हमले
सऊदी के अरामको प्लांट की तस्वीर. (फाइल फोटो)
  • यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी अरब की अरामको साइट्स पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया
  • हूती समूह ने रियाद और खुराईस में हमलों को सफल बताते हुए निशाना बनाई गई साइट्स पर भीषण आग लगने की जानकारी दी
  • यह संगठन 1990 के दशक में शिया इस्लाम के जैदी पंथ को पुनर्जीवित करते हुए यमन में सक्रिय हुआ था

यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने रविवार को कहा कि उनके समूह ने सऊदी अरब की बड़ी एनर्जी कंपनी अरामको की राजधानी रियाद और देश के पूर्वी हिस्से में तेल से समृद्ध खुराईस इलाके में मौजूद साइट्स पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया.  प्रवक्ता ने 'X' पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा, "दोनों ऑपरेशन अपने मकसद में कामयाब रहे. हमले सटीक थे, जिनसे निशाना बनाई गई साइट्स पर भीषण आग लग गई."

कौन हैं हूती

हूती एक मिलिट्री, पॉलिटिकल और धार्मिक आंदोलन है, जो उत्तर-पश्चिम यमन के ज्यादातर हिस्से पर राज करता है. इसने लाल सागर में कार्गो जहाजों और टैंकरों पर हमले करके ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी मार्केट में खलल डाला है. इसने नवंबर 2023 में लाल सागर में जहाजों पर गोलीबारी और इजरायल पर ड्रोन और मिसाइलें दागना शुरू किया. उनका कहना था कि वे ऐसा पिछले महीने शुरू हुई गाजा में इजरायल की जंग के दौरान फिलिस्तीनियों के समर्थन में कर रहे थे. लाल सागर में शिपिंग और सऊदी अरब पर ये हमले इस साल फिर से शुरू हुए, जो हूती के करीबी सहयोगी ईरान के खिलाफ अमेरिका की जंग के जवाब में थे.

कब बना इनका संगठन

यह ग्रुप 1990 के दशक में यमन के सुदूर उत्तरी इलाके में शिया इस्लाम के जैदी पंथ को फिर से मजबूत करने वाले आंदोलन के तौर पर उभरा. जैदी पंथ ने कभी यमन पर शासन किया था, लेकिन उनका उत्तरी गढ़ गरीबी और हाशिए पर धकेल दिया गया था. इसने यमन की राष्ट्रीय सेना के खिलाफ कई गुरिल्ला युद्ध लड़े और सुन्नी सऊदी अरब के साथ सीमा पर एक छोटा संघर्ष भी किया. जब 2011 के "अरब स्प्रिंग" विरोध प्रदर्शनों में यमन के लंबे समय तक राष्ट्रपति रहे अली अब्दुल्ला सालेह को सत्ता से हटा दिया गया, तो इस ग्रुप ने खाड़ी देशों के समर्थन वाले राजनीतिक बदलाव को ठुकराते हुए उत्तरी यमन पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया.

क्या है इनकी सऊदी से दुश्मनी

इस बीच, ईरान के समर्थन से, ग्रुप के गुप्त नेता अब्दुल मलिक अल-हौथी ने पहाड़ी लड़ाकों के अपने गुट को हजारों लोगों की एक बड़ी सेना में बदल दिया. 2014 में उन्होंने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को दक्षिण में अदन की ओर खदेड़ दिया. इसके बाद सऊदी अरब ने यमन सरकार की समर्थन में सैन्य कार्रवाई कर दी. हूतियों और सऊदी अरब के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई ने यमन के ठंडे पड़े गृहयुद्ध को दोबारा भड़का दिया. इसके बाद से ही हूती लगातार सऊदी पर हमले कर रहे हैं. लाल सागर में जहाज़ों की आवाजाही के लिए खतरा बढ़ा दिया है. इससे मध्य पूर्व से होने वाले ऊर्जा निर्यात में और रुकावट आ रही है, जो पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की वजह से बाधित था.

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