- ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स की रिपोर्ट: ऑनलाइन नेटवर्क और सोशल मीडिया युवाओं में कट्टरपंथ तेजी से बढ़ा रहे
- 2025 में यूरोप और उत्तर अमेरिका में आतंकवाद से जुड़े मामलों में 42 प्रतिशत मामले बच्चों और किशोरों से संबंधित
- युवाओं में कट्टरपंथ बनने की प्रक्रिया पहले एक साल या अधिक लेती थी, अब यह कुछ हफ्तों में हो रही है
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स की हालिया रिपोर्ट के आतंकवाद से होने वाली मौतों पर दिए आकंड़े थोड़ा राहत भले पहुंचा रहे हों पर साथ ही साथ एक और खतरे की ओर संकेत किया है. ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है कि युवाओं में तेजी से कट्टरपंथ फैल रहा है और इसे बढ़ाने में ऑनलॉइन नेटवर्क और सोशल मीडिया का बड़ा हाथ है. रिपोर्ट में पता चला है कि 2025 में यूरोप और उत्तर अमेरिका में आतंकवाद से जुड़े कुल मामलों में 42% मामले बच्चों और किशोरों से जुड़े थे,जो 2021 की तुलना में तीन गुना ज्यादा है.
स्टडी में पता चला है कि पहले कट्टरपंथी बनने की प्रक्रिया एक साल या उससे भी अधिक समय लेती थी, लेकिन बदलते वक्त के साथ अब यह प्रक्रिया कुछ ही हफ्तों में हो सकती है. इसके पीछे के मुख्य कारण-
➤शॉर्ट-फॉर्म ऑनलाइन प्रोपेगेंडा
➤सोशल मीडिया एल्गोरिदम का तेज प्रसार
➤युवाओं की उम्र से जुड़ी मानसिक और भावनात्मक कमजोरियों का फायदा उठाना
डिजिटल माहौल ने कट्टरपंथ (radicalisation) की गति और तरीके दोनों को बदल दिया है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लोग बहुत आसानी से कट्टरपंथ फैलाने वाले कंटेंट तक पहुंच जाते हैं. रिपोर्ट कहती है कि युवाओं में कट्टरपंथ के तेज फैलने की यह समस्या इन्हीं ऑनलाइन सिस्टम की वजह से सबसे ज्यादा बढ़ी है.
कौन लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे?
कट्टरपंथ का शिकार बनने वाले युवाओं की प्रोफाइल भी कई महत्वपूर्ण पैटर्न दिखाती है. पश्चिमी देशों में युवाओं में उग्रवाद की ओर झुकाव का सबसे बड़ा कारण है अकेलापन और समाज से दूरी. रिपोर्ट के अनुसार 87% कट्टरपंथ से प्रभावित नाबालिगों ने बचपन में उपेक्षा या मानसिक शोषण झेला था.77% बच्चों ने किसी न किसी तरह का त्याग या अकेलेपन का अनुभव किया था. यही कारण है कि ऐसे बच्चे और किशोर, जिन्हें पहले से ही भावनात्मक सहारा नहीं मिलता,ऑनलाइन मिलने वाले कंटेंट के प्रभाव में बहुत जल्दी आ जाते हैं.
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कट्टरपंथ की ओर झुकने के कारण अलग-अलग
एक ही समय पर, युवाओं में कट्टरपंथ बढ़ने के कारण हर क्षेत्र में एक जैसे नहीं हैं.सब‑सहारा अफ्रीका में कट्टरपंथ की ओर खिंचने के कारण बिल्कुल अलग हैं.71% युवाओं ने बताया कि राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की ओर से किए गए मानवाधिकार उल्लंघन उनके किसी उग्रवादी समूह में शामिल होने का सबसे बड़ा कारण थे. 25% युवाओं ने बेरोजगारी और अवसरों की कमी को वजह बताया.
युवाओं की बढ़ती भागीदारी आतंक हमलों की प्रकृति बदल रही है. 2022 से 2025 के बीच, नाबालिगों की ओर से शामिल 97% आतंकी साजिशें विफल की गईं,जबकि केवल वयस्कों की ओर से रची गई साजिशें 68% मामलों में ही नाकाम हुईं. इसका मतलब यह है कि बच्चों या किशोरों की ओर से बनाई गई योजनाएं कम जटिल होती हैं, इसलिए उन्हें रोकना आसान होता है, लेकिन युवाओं में कट्टरपंथ का तेज और भारी पैमाने पर फैलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए समग्र खतरे को कम नहीं होने देता. आतंकवाद अभी भी कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित है.दुनिया में होने वाली कुल आतंकवादी मौतों में करीब 70% मौतें सिर्फ पांच देशों में होती हैं,लेकिन इसकी गतिविधियों के पैटर्न बदल रहे हैं.
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ऑनलाइन कट्टरपंथ और वास्तविक दुनिया की परिस्थितियां मिलकर खतरे को बढ़ा रही हैं.ऑनलाइन कट्टरपंथ और जमीनी हालात के बीच संबंध अब और अधिक स्पष्ट हो गया है. रिपोर्ट बताती है कि:
➤राजनीतिक ध्रुवीकरण,
➤बढ़ती यहूदी‑विरोधी हिंसा (antisemitic violence)
➤अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का तनाव पश्चिमी देशों में फैलना
इन सबने ऐसा माहौल बना दिया है जहां उग्रवादी विचारधाराएं आसानी से पकड़ बना लेती हैं. डिजिटल दुनिया इन समस्याओं को और बढ़ा देती है, क्योंकि:
➤उग्रवादी विचार बहुत तेजी से फैलते हैं
➤एल्गोरिदम इन्हें और आगे बढ़ाते हैं
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