फ्रांस की हर गली और हर सड़क पर फिलहाल कुछ ऐसा ही नजारा है.
- स्टूडेंट्स का आरोप है कि शिक्षा प्रणाली में असमानता और सरकारी स्कूलों में संसाधनों की भारी कमी है
- फ्रांस सरकार ने हिंसा रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी शामिल है
- भारत सरकार ने छात्रों की मांगों को मानते हुए संवाद स्थापित किया और पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाए
फ्रांस जल रहा है. उबल रहा है. गली-गली में बगावत हो रही है. सरकार और स्टूडेंट आमने-सामने हैं. स्थिति को कंट्रोल करने के लिए फ्रांस की सरकार पूरी सख्ती कर रही है, मगर हिंसा बढ़ती जा रही है. स्कूल तक जलाए जा रहे हैं. ये करीब एक सप्ताह से चल रहा है. भारत में भी स्टूडेंट्स की नाराजगी को आवाज कॉकरोच जनता पार्टी ने दी. जून में आंदोलन हुआ. लाठीचार्ज भी हुआ. अभी भी कॉकरोच जनता पार्टी लगातार एक्टिव है. शुक्रवार को ही फिर दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर मुंबई तक में रैली की. मगर दोनों स्टूडेंट प्रोटेस्ट में अंतर भी है.
सबसे पहले जानिए फ्रांस में क्या हो रहा है
- फ्रांस के 3,700 हाई स्कूलों में से लगभग 735 स्कूल किसी न किसी तरह प्रभावित हुए हैं. आंकड़ा बढ़ भी सकता है.
- आंदोलन शुरू होने के बाद से लगभग 170 छात्र घायल हुए हैं, जबकि 100 से ज्यादा हाई स्कूलों को काफी नुकसान पहुंचा है.
- कम से कम 65 टीचर्स घायल हुए हैं, जिनमें 40 हाई स्कूल प्रिंसिपल शामिल हैं.
- मार्सिले के पास ला सियोटा में एक युवक ने एक टीचर पर पेट्रोल छिड़क दिया.
- फ्रांस के कई स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया.
- शुक्रवार को 400 हाई स्कूल यानी लगभग हर 10 में से एक स्कूल बंद रहे.
- पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के काम छोड़ने के एक हफ्ते बाद, ट्रेड यूनियनों ने मंगलवार को शिक्षकों की हड़ताल का आह्वान किया है.
- पेरिस के बाहरी इलाके पैंटिन में प्रदर्शनकारियों ने बाड़ जैसी चीजों में आग लगा दी और दंगा-रोधी पुलिस पर पटाखे फेंके, और फिर वहां से भाग गए.
- शुक्रवार को पूरे फ्रांस में दंगा-रोधी पुलिस और हाई स्कूल के छात्रों के बीच झड़पें हुईं.
- पूर्वी शहर स्ट्रासबर्ग की सड़कों पर आंसू गैस फैल गई, दक्षिण में मार्सिले में पुलिस की टुकड़ियों पर आतिशबाजी की गई और पश्चिम में रेनेस में कचरे के डिब्बों में आग लगा दी गई.
- टूर्स शहर में घायल हुए एक युवक की दाहिनी आंख की रोशनी चली गई.
- यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने भी अब हाई स्कूलों के स्टूडेंट्स और मांगों का समर्थन कर दिया है.
- कई जगहों पर एसिड फेंकने और लूटपाट के भी सरकार ने दावे किए हैं.

अब जान लीजिए फ्रांस में ये क्यों हो रहा है
- स्टूडेंट्स का मानना है कि गरीब और अमीर स्टूडेंट्स के बीच का अंतर बहुत ज्यादा बढ़ गया है.
- अमीर घरों के बच्चे तो पढ़ाई कर ले रहे हैं, पर गरीब घरों के बच्चों को उस स्तर की शिक्षा नहीं मिल रही.
- सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और स्टाफ की भारी कमी है. इसके चलते ज्यादातर क्लास होती ही नहीं है.
- एक-एक क्लास में बहुत ज्यादा बच्चों का एडमिशन ले लिया गया है. स्थिति ये है कि बैठने तक की जगह नहीं मिल पाती.
- स्कूलों के टाइम-टेबल को लेकर भी स्टूडेंट्स बहुत नाराज हैं.
- स्टूडेंट्स का कहना है कि सरकार एजुकेशन सेक्टर में बहुत कम खर्च कर रही है और इसी कारण स्कूलों पर उसका ध्यान नहीं है.
- फ़्रांस में इस बात को लेकर भी चिंताएं हैं कि वहां का स्कूली सिस्टम दूसरे देशों के सिस्टम के मुक़ाबले पिछड़ रहा है.
- कमजोर तबके के बच्चों को सामाजिक रूप से आगे बढ़ने में मदद करने के अपने मकसद में नाकाम हो रहा है.

फ्रांस की सरकार क्या कर रही है
- गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि शुक्रवार को 1,747 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
- फ्रांस के न्याय मंत्री जेराल्ड डरमानिन के अनुसार, इन गिरफ्तारियों में 90 प्रतिशत प्रदर्शनकारी नाबालिग (स्कूली छात्र) हैं.
- सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि प्रदर्शनों के दौरान सरकारी वकीलों द्वारा बच्चों के माता-पिता को संपत्ति के नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए और मरम्मत का खर्च उन्हीं से वसूला जाए.
- अधिकार समूहों ने पुलिस पर नाबालिगों के खिलाफ सख्ती बरतने का आरोप लगाया है, जिसमें लाठी, आंसू गैस और जानलेवा न होने वाली फ्लैश-बॉल गन का इस्तेमाल शामिल है.
- गुरुवार को सरकार द्वारा पेश किए गए 2027 के ड्राफ्ट बजट के तहत, अगले साल के लिए स्कूलों के लिए 65.5 अरब यूरो (74 अरब डॉलर) रखे गए हैं. यह रक्षा के लिए प्रस्तावित 63.4 अरब यूरो से ज्यादा है.
- कट्टर-वामपंथी उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेंशोन ने मज़बूती से छात्रों का पक्ष लिया है.
- सरकार का कहना है कि वामपंथी दल छात्रों को उकसा रहे हैं और हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं.
- कट्टर-दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने दंगाइयों के खिलाफ पुलिस को और अधिक अधिकार देने की मांग की है.
- इस अशांति के कारण राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बीच राजनीतिक मतभेद और गहरे हो रहे हैं.
- फ्रांस में अगले साल 18 अप्रैल 2027 को होने वाला है.
- राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं और फ्रांस के नियमों के कारण तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते.

अब समझिए भारत में क्या हो रहा है
- कॉकरोच जनता पार्टी को बनाने वाले अभिजीत दीपके का कहना है कि उन्हें इस आंदोलन को शुरू करने का आईडिया चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अदालत में की गई टिप्पणी से आया.
- उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी.
- सोशल मीडिया पर उन्होंने इसे मजाक में शुरू किया, लेकिन उनके साथ इतने लोग जुड़ते गए कि वो गंभीरता से कुछ करने की सोचने लगे.
- फिर उन्होंने अमेरिका से भारत लौटने की घोषणा की और 6 जून को दिल्ली पहुंचे.
- इनकी तीन मांगे थी, पहली उस समय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, नीट पेपर लीक जैसे घटनाओं पर रोक की जवाबदेही तय हो और इनके कारण सुसाइड करने वालों को मुआवजा मिले.
- 25 जुलाई को सरकार ने इनकी सभी मांगें मान ली और फिर ये आंदोलन समाप्त हुआ.
- इस आंदोलन को सभी विपक्षी दलों ने सहयोग दिया.
- इस आंदोलन के बाद पटना और रांची में भी स्टूडेंट्स ने प्रोटेस्ट किया.
- मगर कॉकरोच पार्टी के लोग उन आंदोलनों में शामिल नहीं हुए. हालांकि, उन्होंने समर्थन जरूर दिया.
- इसके बाद कॉकरोच पार्टी ने स्कूलों को लेकर आंदोलन शुरू किया.
- वो स्कूलों की बदहाली का वीडियो बनाकर जारी करने लगे.
- मगर उन पर आरोप लगे कि वो केवल बीजेपी और उसके सहयोगियों के शासित राज्यों में ही जा रहे हैं.
- अब कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है.
- शनिवार को ही उसने जंतर-मंतर और मुंबई में धरना देने की कोशिश की पर ये सफल नहीं हुआ.
- इस बार भी विपक्षी दलों ने उन्हें पूरा समर्थन दिया था.

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Photo Credit: PTI
अब समझिए भारत में ये क्यों हो रहा है
- भारत में भी सरकारी स्कूलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.
- स्कूलों में शिक्षकों और संसाधनों की भारी कमी है.
- विश्वविद्यालयों का हाल भी लगभग ऐसा ही है, पर स्कूलों से बेहतर है.
- सरकारी नौकरियों की भर्ती में कमी होना भी एक बड़ा कारण है.
- केंद्र और राज्य सरकार में कई पदों पर वैकेंसी है, मगर सरकार भर्ती कम संख्या में कर रही है.
- पेपरलीक की लगातार घटनाएं हो रही थीं, इससे स्टूडेंट्स का गुस्सा बढ़ता जा रहा था.

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भारत सरकार ने इस मसले पर क्या किया
- भारत सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी पर शुरू से ही नरम रुख अपनाया.
- प्रदर्शन करने की पूरी छूट दी. हालांकि, जब संसद मार्च करने की कॉकरोच पार्टी ने कोशिश की तो उन्हें सख्ती से रोका भी गया.
- सरकार के खिलाफ स्टूडेंट्स का गुस्सा बढ़ा तो सरकार ने तुरंत खुद को करेक्ट किया.
- कॉकरोच पार्टी से बातचीत शुरू कर दी और आखिरकार सारी मांगे मानकर गु्स्से को शांत कर दिया.
- सरकार ने ये साबित करने की कोशिश की कि वो स्टूडेंट्स के प्रति संवेदनशील है.
- सरकार ने पेपरलीक को हैंडल करने के लिए एक सख्त कानून भी बना दिया.
- इसके साथ ही सरकार ने स्टूडेंट्स और जनता को ये बताना जारी रखा कि कॉकरोच पार्टी असल में विपक्ष का मोहरा है.
- सिर्फ बीजेपी और उसके सहयोगी दलों शासित राज्यों की स्कूलों की पोल खोलकर कॉकरोच पार्टी ने बहुत हद इसे साबित भी किया.
- इसके अलावा स्टूडेंट्स के मुद्दे पर शुरू हुई कॉकरोच पार्टी अब चुनाव आयोग के मुद्दे तक पहुंच गई.
- यही कारण रहा कि शुक्रवार के दिन कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट में ज्यादा भीड़ नहीं जुटी.
- हालांकि, एक कारण ये भी रहा कि इस बार सरकार ज्यादा सतर्क रही और कॉकरोच पार्टी को भीड़ जुटाने की खुली छूट नहीं दी.
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