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निर्वासन की जिंदगी गुजार रही अफगान महिला फुटबॉलरों को FIFA ने दी गुड न्यूज, तालिबान के लिए बड़ा झटका

वैंकूवर में हुई फीफा परिषद की बैठक में फुटबॉल के नियमों में एक बड़ा संशोधन किया गया है. अब तक का नियम यह था कि किसी भी राष्ट्रीय टीम को तभी मान्यता मिलती थी जब उस देश का अपना फुटबॉल महासंघ उसे मान्यता दे.

निर्वासन की जिंदगी गुजार रही अफगान महिला फुटबॉलरों को  FIFA ने दी गुड न्यूज, तालिबान के लिए बड़ा झटका

FIFA Rule For Afghan Women Footballer: अफगानिस्तान की महिला फुटबॉलरों के लिए पांच साल का लंबा इंतजार और निर्वासन का दर्द अब खत्म होने वाला है. फीफा (FIFA) ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अफगानिस्तान की महिला टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है. यह फैसला उन दर्जनों खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की एक नई सुबह की तरह है जो तालिबान के डर से ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोप के अलग-अलग इलाकों में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर थीं.

सीएनएन के मुताबिक, वैंकूवर में हुई फीफा परिषद की बैठक में फुटबॉल के नियमों में एक बड़ा संशोधन किया गया है. अब तक का नियम यह था कि किसी भी राष्ट्रीय टीम को तभी मान्यता मिलती थी जब उस देश का अपना फुटबॉल महासंघ उसे मान्यता दे. चूंकि अफगानिस्तान फुटबॉल महासंघ वर्तमान में तालिबान के प्रभाव में है और उसने महिला टीम को मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया था, इसलिए ये खिलाड़ी मैदान से दूर थीं. लेकिन अब फीफा ने विशेष परिस्थितियों में सीधे टीम को रजिस्टर करने का अधिकार अपने पास ले लिया है.

'रिफ्यूजी' टैग से आजादी

फीफा अध्यक्ष गियान्नी इन्फेंटिनो ने इसे विश्व खेल जगत में एक अभूतपूर्व कदम बताया है. उन्होंने कहा कि फीफा अब सिद्धांतों को हकीकत में बदल रहा है ताकि उन खिलाड़ियों को सुरक्षित किया जा सके जो अपनी मर्जी के बिना राजनीतिक स्थितियों के कारण खेल से बाहर कर दिए गए थे.

महिला खिलाड़ी अब तक 'अफगान विमेन यूनाइटेड' नाम की एक शरणार्थी टीम के तौर पर खेल रही थीं. खिलाड़ियों ने पहले ही शिकायत की थी कि वे 'रिफ्यूजी' कहलाते-कहलाते थक चुकी हैं और अपनी असली पहचान यानी अपने देश के नाम से खेलना चाहती हैं. खिलाड़ी जैनब मुजफ्फर ने कहा था कि यह बदलाव उनकी पहचान और गरिमा को वापस दिलाने वाला है.

कैप्टन खालिदा पोपल की लड़ाई

इस पूरी लड़ाई के पीछे पूर्व टीम कप्तान और कार्यकर्ता खालिदा पोपल का बड़ा हाथ रहा है. 2021 में जब तालिबान सत्ता में लौटा, तो महिलाओं के खेलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. उस समय अपनी जान बचाने के लिए खिलाड़ियों ने अपने मेडल और जर्सी तक जमीन में दबा दिए थे. खालिदा ने ही इन खिलाड़ियों को देश से बाहर निकालने में मदद की थी.

हालांकि, यह फैसला 2027 के महिला विश्व कप के लिए थोड़ा देरी से आया है, लेकिन अफगान बेटियां अब 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर सकती हैं. टीम की अगली बड़ी चुनौती जून के पहले सप्ताह में न्यूजीलैंड में होने वाला ट्रेनिंग कैंप है, जहां वे कुक आइलैंड्स का सामना करेंगी. फीफा ने अगले दो सालों के लिए टीम को वित्तीय और तकनीकी सहायता देने का वादा भी किया है.

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