मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द मामले को लेकर लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि वोट चोरी और सरकार चोरी के बाद अब बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत ने 'सीट चोरी' के जरिए मुकाबले को शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया है.
चुनाव आयोग पर उठाया सवाल
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में जो हुआ, उसे देखिए. कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन जी ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे. उन पर कोई केस भी पेंडिंग नहीं था. फिर भी चुनाव आयोग ने बीजेपी की एक बेबुनियाद आपत्ति पर उनका नॉमिनेशन रद्द कर दिया. वहीं, बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी जी ने फॉर्म में अपना नाम ही गलत लिखा और कई जरूरी जानकारी देना भी छोड़ दिया. इसके बावजूद, चुनाव आयोग ने उन्हें सब कुछ ठीक करने के लिए और समय दे दिया.
After Vote Chori and Sarkar Chori - the BJP-EC jugalbandi has finished the contest before it has even begun with Seat Chori.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 11, 2026
Look at what happened in the recent Rajya Sabha elections.
Congress candidate Meenakshi Natarajan ji submitted every document. No pending cases. The EC…
उन्होंने आगे लिखा कि चुनाव आयोग वही है. उम्मीदवार दो हैं. एक को बिना सुनवाई के ही अयोग्य घोषित कर दिया गया. दूसरे को नियमों का पालन न करने के बावजूद फायदा पहुंचाया गया. जब कांग्रेस ने मीटिंग की मांग की, तो चुनाव आयोग ने पहले तो हमें टालने की कोशिश की. जब आखिरकार हमारी मीटिंग हुई, तो उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा. आगे भी ऐसा ही बहुत कुछ देखने को मिल सकता है, क्योंकि BJP के लिए चुनाव जीतने के मुकाबले चुनाव में धांधली करना कहीं ज़्यादा आसान है.
मीनाक्षी नटराजन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीट के लिए चुनाव 18 जून को होना है. इस मामले में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया जब शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोपों के चलते मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया.
राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपना शपथपत्र अधूरा दाखिल किया था, उन्होंने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में अदालत में लंबित एक शिकायत का उल्लेख नहीं किया था.
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