- डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बोर्ड ऑफ पीस बनाया था, जिसमें 17 अरब डॉलर का फंड शामिल था
- अमेरिकी और अरब देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर देने का वादा किया था
- रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार फंडिंग में देरी और कमी के कारण बोर्ड ऑफ पीस की योजना प्रभावित हो रही है
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' बनाया था. मकसद था कि जंग से तबाह हुए गाजा को फिर से बसाना. इस बोर्ड ऑफ पीस के लिए 17 अरब डॉलर का फंड बनाया गया था. लेकिन खबर है कि इसके लिए फंड ही नहीं मिल रहा है, जिससे ट्रंप गाजा के भविष्य के लिए अपनी योजना को आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल हमलों से 10 दिन पहले ट्रंप ने वॉशिंगटन में एक समिट की थी. इसमें खाड़ी और अरब देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर देने का वादा किया था.
इस योजना में हमास के हथियार डालने के बाद और इजरायली सैनिकों की वापसी के बाद गाजा पर बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण किया जाएगा. यह रकम नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के लिए भी थी. यह कमेटी फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स का एक समूह है, जिसका समर्थन अमेरिका करता है. इसका मकसद हमास से गाजा का नियंत्रण अपने हाथ में लेना है.
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बोर्ड ऑफ पीस ने क्या कहा?
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान जंग के कारण बोर्ड ऑफ पीस के लिए फंड नहीं मिल पा रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट छपने के बाद शुक्रवार को सोशल पर जारी एक बयान में बोर्ड ऑफ पीस ने इस बात से इनकार किया है कि उसे फंडिंग से जुड़ी कोई समस्या है.
Fundamentally incorrect and misleading reporting by @Reuters today.
— Board of Peace (@BoardOfPeace) April 10, 2026
The Board of Peace is a lean, execution-focused organization that calls capital as needed. There are no funding constraints. To date, all funding requests have been met immediately and in full.
To be sure, far…
बयान में कहा गया है, 'बोर्ड ऑफ पीस एक सुगठित और काम पर केंद्रित संगठन है, जो जरूरत के हिसाब से फंड जुटाता है. फंडिंग को लेकर कोई रुकावट नहीं है. अब तक फंडिंग के लिए की गई सभी मांगें तुरंत और पूरी तरह से पूरी की गई हैं.'
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अभी कोई पैसा नहीं है!
रॉयटर्स ने सूत्रों ने हवाले से बताया है कि बोर्ड ऑफ पीस के लिए जिन 10 देशों ने फंड देने का वादा किया था, उनमें से सिर्फ तीन- संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मोरक्को और अमेरिका ने ही फंड दिया है. अब तक 1 अरब डॉलर से भी कम फंड मिला है. सूत्र ने कहा कि ईरान युद्ध ने हर चीज पर असर डाला है, जिससे पहले से चली आ रही फंड की दिक्कतें और बढ़ गई हैं.
सूत्र ने बताया कि फंड की कमी की वजह से NCAG गाजा में दाखिल नहीं हो पाया. उसने बताया कि बोर्ड ने हमास और दूसरे फिलिस्तीनी गुटों को जानकारी दी है कि फंड की कमी की वजह से NCAG अभी गाजा में दाखिल नहीं हो सकता. उसने बताया कि बोर्ड के दूत निकोले म्लादेनोव ने फिलिस्तीनी गुटों को जानकारी दी है 'अभी कोई पैसा नहीं है.'
हमास ने बार-बार कहा है कि वह शासन की बागडोर NCAG को सौंपने के लिए तैयार है. NCAG की अगुवाई अली शाथ कर रहे हैं, जो फिलिस्तीनी अथॉरिटी के पूर्व उप-मंत्री हैं. फिलिस्तीनी अथॉरिटी अभी इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में शासन चला रही है. NCAG का काम गाजा के मंत्रालयों का नियंत्रण अपने हाथ में लेना और वहां की पुलिस फोर्स को चलाना है. इस कमेटी में 14 सदस्य हैं.
गाजा के लिए खर्च होने हैं 70 अरब डॉलर
गाजा में ढाई साल से इजरायल और हमास की जंग जारी है. इजरायली बमबारी में गाजा की 80% इमारतें तबाह हो गई हैं. अनुमान है कि गाजा पुनर्निर्माण में लगभग 70 अरब डॉलर की जरूरत है.
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