- अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि खामेनेई को अपने बेटे मोजतबा की नेतृत्व क्षमता पर भरोसा नहीं था.
- इजरायली हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई सुप्रीम लीडर बनाए गए हैं.
- ऐसे में अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान में फिलहाल असली ताकत रिवोल्यूशनरी गार्ड के हाथ में हो सकती है.
कोलंबिया ब्रॉडकास्टिंग न्यूज की इस रिपोर्ट के मुताबिक यह खुफिया जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी अधिकारियों को भी दी गई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आयतुल्लाह अली खामेनेई को लगता था कि उनका बेटा मुजतबा खामेनेई सुप्रीम लीडर बनने के लिए न तो पर्याप्त रूप से योग्य है और न ही उतना सक्षम. इस रिपोर्ट के मुताबिक अली खामेनेई को डर था कि अगर उनका बेटा सत्ता में आया तो वह उस स्तर की नेतृत्व क्षमता नहीं दिखा पाएगा जिसकी ईरान को जरूरत है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उन्हें अपने बेटे की बुद्धिमत्ता और योग्यता को लेकर भी संदेह था. इतना ही नहीं, खुफिया सूत्रों के अनुसार अली खामेनेई को अपने बेटे की निजी जिंदगी से जुड़ी कुछ परेशानियों की जानकारी भी थी. यही वजह थी कि वे अपने बेटे को देश का अगला सुप्रीम लीडर बनाने के पक्ष में नहीं थे.
इन सब के बावजूद पिछले हफ्ते ईरान के धार्मिक नेताओं की परिषद ने 56 वर्षीय मुजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया. यह फैसला उस समय आया जब करीब आठ दिन पहले एक बड़े हमले में उनके पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी.
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हमले में घायल हुए मुजतबा, तलाश में अमेरिका
खबरों के मुताबिक, उसी हमले में मुजतबा खामेनेई भी घायल हो गए थे. हालांकि इसके बाद से वे सार्वजनिक रूप से ज्यादा नजर नहीं आए हैं. मुजतबा के घायल होने की खबर पर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी बताया कि, "मुजतबा खामेनेई घायल हैं और संभव है कि उनका चेहरा भी गंभीर रूप से जख्मी हुआ हो.”
वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिया कि उस हमले में वे घायल हुए थे, लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है.
इसी बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया. अमेरिकी सरकार ने मुजतबा खामेनेई और ईरान के नौ अन्य प्रमुख अधिकारियों की जानकारी देने वालों के लिए 10 मिलियन डॉलर (करीब 80 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित किया है.
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ट्रंप का बड़ा बयान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान का पहला नेतृत्व खत्म हो चुका है, दूसरा भी खत्म हो गया है. अब तीसरा नेतृत्व भी संकट में है, और यह वही व्यक्ति है जिसे उसके पिता भी नहीं चाहते थे.”
ट्रंप ने मुजतबा खामेनेई को हल्का नेता बताते हुए कहा कि वे ईरान के लिए कबूल करने लायक नेता नहीं हैं.

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क्या अभी ईरान में कोई नेता ही नहीं?
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप निजी बातचीत में यह भी कह चुके हैं कि उन्हें यकीन नहीं है कि मुजतबा खामेनेई अभी जिंदा भी हैं. उनका मानना है कि फिलहाल ईरान लगभग नेतृत्वहीन स्थिति में है.
अमेरिकी प्रशासन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अभी असली सत्ता ईरान की ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के हाथ में हो सकती है. अगर ऐसा है तो यह ईरान की सत्ता संरचना में एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि 1979 की क्रांति के बाद से देश एक धार्मिक तानाशाही व्यवस्था के तहत चलता रहा है.
मुजतबा खामेनेई, अयातुल्लाह खुमैनी और अयातुल्लाह अली खामेनेई के बाद ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर बने हैं. यह उत्तराधिकार इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 1979 की इस्लामी क्रांति ने जिस राजशाही को खत्म किया था, उसी तरह की परिवार आधारित सत्ता की छवि अब फिर उभरती दिख रही है.
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