- इजरायल और लेबनान सीजफायर लागू करने पर सहमत हो गए हैं, लेकिन इस शर्त के साथ कि हिजबुल्लाह कोई हमला नहीं करेगा
- सीजफायर के ऐलान के बाद भी लेबनान ने गुरुवार की सुबह देश के दक्षिण में इजरायली हमलों की सूचना दी
- अगर सीजफायर टिका तो यह अमेरिका- ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा
इजरायल और लेबनान ने बुधवार, 3 जून को सीजफायर लागू करने पर सहमति जताई, लेकिन एक शर्त के साथ. शर्त यह कि ईरान समर्थित हिजबुल्लाह की तरफ से पूरी तरह से इजरायल पर गोलीबारी बंद करना जरूरी होगा. यह जानकारी अमेरिका में ट्रंप सरकार की मध्यस्थता वाली बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में दी गई. हालांकि सीजफायर के ऐलान के बाद भी लेबनान ने गुरुवार की सुबह देश के दक्षिण में इजरायली हमलों की सूचना दी. लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी ने इजरायली ड्रोन हमलों की सूचना देते हुए कहा कि कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है.
सीजफायर के बावजूद हुई इस हिंसा से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ समझौते की उम्मीदों को झटका लग सकता है. इजरायल में सरकार के अंदर ही इस सीजफायर डील का विरोध होने लगा है. ऐसे में सीजफायर लागू होगा भी या नहीं, इसपर सवाल उठने लगे हैं.
इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर
दोनों देश ने यह भी तय किया कि कुछ “पायलट क्षेत्र” बनाए जाएंगे, जहां लेबनान की सेना “पूरे इलाके पर पूरी तरह नियंत्रण” रखेगी और किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की मौजूदगी नहीं होगी. यह समझौता ऐसे समय में हुआ जब दोनों के बीच सीमा पार हमले जारी थे. जहां हिजबुल्लाह ने कहा कि उसने इजरायली सैनिकों को निशाना बनाया, वहीं इजरायली हमलों में दक्षिणी लेबनान में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई. समझौते की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ही उत्तरी इजरायल में हवाई हमले के अलार्म बजे, क्योंकि हवा में उड़ता एक संदिग्ध टारगेट देखा गया, हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ.
ईरान से समझौते की उम्मीद में ट्रंप
इस संघर्ष विराम को अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे व्यापक युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़े और सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है. इस समझौते के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी राजनीतिक डील होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. इसकी वजह है कि ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह के समझौते पर आगे बढ़ने की उसकी एक बड़ी शर्त यही है कि इजरायल और लेबनान के बीच चल रही भीषण जंग को तुरंत रोका जाए. इस सीजफायर के बाद अब वार्ता का रास्ता साफ होता दिख रहा है.
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