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This Article is From Mar 13, 2026

हॉर्मुज संकट के बीच पाकिस्तानी नौसेना ने युद्धपोत क्यों किए तैनात?

हॉर्मुज संकट के बीच पाकिस्तानी नौसेना ने ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर शुरू किया है. पढ़ें क्या है पूरा मामला...

हॉर्मुज संकट के बीच पाकिस्तानी नौसेना ने युद्धपोत क्यों किए तैनात?
AFP
  • हॉर्मुज संकट के बीच पाकिस्तानी नौसेना ने ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर शुरू कर जहाजों को सुरक्षा देना शुरू किया है.
  • पाकिस्तानी युद्धपोत हॉर्मुज स्ट्रेट में नहीं जा रहे, बल्कि अपने समुद्री व्यापार मार्गों की रक्षा कर रहे हैं.
  • 20% तेल आपूर्ति वाले इस मार्ग में संकट गहराता जा रहा है और पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है.

मध्य-पूर्व में ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को चरमरा दिया है. इसी संकट के बीच पाकिस्तानी नौसेना की एक गतिविधि को लेकर कई तरह की अटकलें लग रही थीं कि क्या पाकिस्तान के युद्धपोत सीधे हॉर्मुज स्ट्रेट में एस्कॉर्ट ऑपरेशन चला रहे हैं? इन अटकलों पर अब पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. पाकिस्तान मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक पाकिस्तान नौसेना अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एस्कॉर्ट ऑपरेशन जरूर चला रही है, लेकिन वह सीधे हॉर्मुज स्ट्रेट के खतरनाक इलाके में प्रवेश नहीं कर रही.

यानी पाकिस्तान ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना चाहता है, लेकिन सीधे युद्ध के जोखिम वाले क्षेत्र से दूरी बनाए रख कर. पाकिस्तान के युद्धपोत सीधे हॉर्मुज स्ट्रेट में नहीं जा रहे, बल्कि अपने समुद्री व्यापार मार्गों की रक्षा कर रहे हैं. हॉर्मुज में टकराव से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, तेल-गैस की कीमतें बढ़ीं और दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडराने लगा. ऐसे में हॉर्मुज संकट के बीच पाकिस्तान ने ऊर्जा आपूर्ति बचाने के लिए युद्धपोत की  तैनाती की है. 

तेल संकट पर पाकिस्तान का एक्शन

इस बीच पाकिस्तान भी तेल संकट से जूझ रहा है और वहां सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक वृद्धि की है. अब नई कीमतें लगभग 321.17 पाकिस्तानी रुपये (पेट्रोल) और 335.86 पाकिस्तानी रुपये (डीजल) प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं. इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों को 2 हफ्तों के लिए बंद कर दिया गया है. सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की नीति अपनाई जा रही है. वहां की मीडिया खबरों में बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में ईंधन की भारी कमी है. ऐसा बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के पास डीजल का स्टॉक केवल 28 दिनों का, कच्चे तेल का 10 दिनों का और एलपीजी का केवल 15 दिनों का ही बचा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

Photo Credit: AFP

क्या है ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर?

चलिए फिर आते हैं पाकिस्तान के युद्धपोत वाले मामले पर. दरअसल, पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने इसी सोमवार को एक खास समुद्री मिशन की घोषणा की थी, जिसका नाम है ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर. इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा, ऊर्जा आयात की निर्बाध आपूर्ति और अपने समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना है. यह मिशन पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन के साथ मिलकर चलाया जा रहा है. घोषणा के तुरंत बाद पाकिस्तान नौसेना के युद्धपोतों ने दो व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट किया, जिनमें से एक सुरक्षित रूप से कराची बंदरगाह भी पहुंच गया. यह कदम बताता है कि पाकिस्तान अपनी ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति को लेकर बेहद सतर्क हो चुका है.

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हॉर्मुज स्ट्रेट

हॉर्मुज स्ट्रेट
Photo Credit: AFP

हॉर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण शिराओं में से एक माना जाता है. यह संकीर्ण समुद्री मार्ग अरब खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत दैनिक तेल कारोबार को संभालता है, और वैश्विक LNG निर्यात का बड़ा हिस्सा भी यहीं से गुजरता है. लेकिन फरवरी के आखिर से हालात पूरी तरह बदल गए. अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है. हाल के दिनों में हालात और भी गंभीर हो गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हॉर्मुज के पास तीन व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए. ईरान ने जहाजों को चेतावनी दी कि वे इस मार्ग से गुजरने की कोशिश न करें. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के माइन बिछाने वाले जहाजों को निशाना बनाया. इस टकराव का असर साफ दिख रहा है. समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या अचानक सामान्य स्तर से भी बहुत कम हो गई है.

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वैश्विक ऊर्जा संकट पाकिस्तान के लिए क्यों बड़ा खतरा?

इस संकट का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें शुरुआती दौर में 10 प्रतिशत से ज्यादा उछल गईं. यूरोप और एशिया में प्राकृतिक गैस की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हॉर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है. ऐसी स्थिति 1970 के दशक के तेल संकट जैसी हो सकती है. अगर जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं मिलती है, तो उन्हें अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप से होकर लंबा रास्ता लेना पड़ेगा.

इसका असर न केवल यात्रा की अवधि बढ़ने में देखने को मिलेगा, बल्कि शिपिंग लागत में भारी वृद्धि होगी जिससे वैकल्पिक रास्तों से ईंधन मंगाने वाले देशों में कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है. 

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर काफी निर्भर है. देश के करीब 90 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते होता है. अधिकांश कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद मध्य-पूर्व से आयात किए जाते हैं. ऐसे में हॉर्मुज संकट पाकिस्तान के लिए सीधा आर्थिक खतरा बन सकता है. ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच पाकिस्तान सरकार ने पहले ही कई सख्त कदम उठाए हैं. सरकार ईंधन बचाने के लिए भी सख्ती बरत रही है. पाकिस्तान ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं. वहां कुछ इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं. कार्य सप्ताह में बदलाव किए जा रहे हैं. ईंधन बचत के लिए सरकारी निर्देश दिए जा रहे हैं. 

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कराची से खाड़ी और लाल सागर तक सुरक्षा

पाकिस्तान नौसेना ने अपनी एस्कॉर्ट रणनीति को बेहद सीमित और रणनीतिक रखा है. नौसेना फिलहाल कराची से खाड़ी क्षेत्र और कराची से लाल सागर मार्गों पर जहाजों को सुरक्षा दे रही है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान सीधे हॉर्मुज के खतरनाक इलाके में नहीं जा रहा, बल्कि अपने व्यापारिक मार्गों की रक्षा पर ध्यान दे रहा है.

ऊर्जा से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्गो लेकर चलने वाले पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन के जहाज अब पाकिस्तान नौसेना के आधुनिक फ्रिगेट और अन्य युद्धपोत सुरक्षा दे रहे हैं. पाकिस्तान सेना ने कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं जिनमें युद्धपोत व्यापारिक जहाजों के साथ चलते हुए दिखाई दे रहे हैं. इसका मकसद सप्लाई चेन को हर हाल में चालू रखना है.

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अन्य देशों की अलग रणनीति

दुनिया के कई देश इस संकट से निपटने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रहे हैं. फ्रांस ने भविष्य में एस्कॉर्ट मिशन भेजने की बात कही है. अमेरिका ने फिलहाल नियमित हॉर्मुज ट्रांजिट से दूरी बनाई है. इसके मुकाबले पाकिस्तान की रणनीति साफ तौर पर रक्षात्मक और सीमित है. हॉर्मुज संकट का असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा. दक्षिण एशिया के कई देश, जो खाड़ी से तेल पर निर्भर हैं, इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं.

इसका संभावित असर यह होगा कि पाकिस्तान जैसे देशों में महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी होगी, ईंधन की कमी होगी और उद्योग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. इससे पहले से चरमराई अर्थव्यवस्था को और बड़ा झटका लगेगा. इसलिए जानकारों का मानना है कि इस संकट से निकलने का एकमात्र रास्था ये है कि हॉर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही की सुरक्षित बहाली सुनिश्चित हो. पर ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव की वजह से निकट भविष्य में समाधान तो मुश्किल दिखाई पड़ता है. ऐसे में पाकिस्तान जैसे देशों के लिए ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर जैसी पहल एक अहम सुरक्षा कवच बन गई है.

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