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चीन और रूस मिलकर तोड़ने जा रहे अमेरिका का साइंस और टेक वाला दबदबा? पुतिन-जिनपिंग ने बना लिया प्लान

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में चीन का दौरा किया था और वहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. इस दौरान 40 अहम समझौतों पर दस्तखत हुए थे.

चीन और रूस मिलकर तोड़ने जा रहे अमेरिका का साइंस और टेक वाला दबदबा? पुतिन-जिनपिंग ने बना लिया प्लान
रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग. (फाइल फोटो)
IANS
  • रूस और चीन ने विज्ञान, तकनीक, ऊर्जा और शिक्षा में सहयोग बढ़ाने के लिए 40 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं
  • रूस और चीन की न्यूरोटेक्नोलॉजी में साझेदारी वैश्विक वैज्ञानिक परिदृश्य को बदल सकती है
  • क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका को रूस और चीन की बढ़ती ताकत के कारण दबाव का सामना करना पड़ रहा है
नई दिल्ली:

पूरी दुनिया में अगर अमेरिका के दो बड़े दुश्मनों का नाम लिया जाए तो उनमें चीन और रूस होंगे. अब यही चीन और रूस मिलकर अमेरिका के साइंस और टेक वाले दबदबे को खत्म करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो दुनिया का 'पावर सेंटर' पश्चिम से खिसकर पूरब में आ जाएगा.

ये सारी बातें इसलिए हो रही हैं, क्योंकि हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन गए थे. वहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों देशों के बीच 40 समझौतों पर दस्तखत किए थे. इनमें इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, साइंस और एजुकेशन के सेक्टर में सहयोग बढ़ाना शामिल है.

जानकारों का मानना है कि साइंस और टेक्नोलॉजी में चीन और रूस का साथ आना, अमेरिका के लिए टेंशन बढ़ा सकता है. वह इसलिए क्योंकि अभी तक दुनिया में साइंस-टेक में अमेरिका और यूरोप यानी 'वेस्ट' का दबदबा है. चीन और रूस चाह रहे हैं कि ये पावर 'ईस्ट' में आ जाए. यानी, फ्यूचर की हर बड़ी खोज, स्पेस मिशन, AI और न्यूक्लियर टेक जैसी चीजों में चीन और रूस लीड करें.

क्या है पूरा प्लान?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के फेडरल सेंटर ऑफ ब्रेन रिसर्च एंड न्यूरोटेक्नोलॉजी के डायरेक्टर सेवोलोद बेलोसाव ने कहा कि रूस और चीन ऐसे देश हैं, जिनके पास दुनिया का सबसे बड़ा 'वैज्ञानिक भंडार' है.

उन्होंने कहा कि जहां रूस फंडामेंटर न्यूरोसाइंस और बायोलॉजिकल सिस्टम की मैथमैटिकल मॉडलिंग में एक्सपर्ट है, वहीं चीन तेज तकनीकी स्केलिंग और एडवांस बायोटेक्नोलॉजिकल मैनुफैक्चरिंग के लिए एक इकोसिस्टम देता है.

उन्होंने कहा कि न्यूरोटेक्नोलॉजी में दोनों देशों के बीच तालमेल वैश्विक वैज्ञानिक परिदृश्य को बदल सकता है. अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए इसका मतलब बायोटेक्नोलॉजिकल इनोवेशन का पावर सेंटर पूरब की ओर शिफ्ट होना होगा. उन्होंने कहा कि बाकी दुनिया के लिए दोनों का साथ आना एक शक्तिशाली विकल्प देता है, जिसमें दिमाग के सबसे गहरे रहस्यों को सुलझाने की खोज की जाएगी.

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क्वांटम टेक्नोलॉजी में भी वेस्ट को मिलेगी मात!

रूस और चीन के बीच जो समझौता हुआ है, उससे क्वांटम टेक्नोलॉजी में भी अमेरिका और पश्चिमी दुनिया को मात मिल सकती है.

SCMP के मुताबिक, रशियन क्वांटर सेंटर के CEO मैक्सिम ओस्त्रास ने कहा कि पांच साल पहले तक अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देश क्वांटम टेक्नोलॉजी में हावी थे, लेकिन अब चीजें बदल रही हैं. 

उन्होंने कहा कि क्वांटन टेक्नोलॉजी अमेरिका, चीन और रूस के बीच एक 'जंग का अखाड़ा' बन गई है. अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दोनों देशों के क्वांटम कंप्यूटिंग सेक्टर पर प्रतिबंध भी लगा दिए थे. ओस्त्रास ने कहा कि 'इन प्रतिबंधों के लिए हमें उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए. हमें अलग-थलग करने के बजाय प्रतिबंध अनजाने में एक ज्यादा लचीला और आत्मनिर्भर यूनियन बना रहे हैं.'

उन्होंने चीन के 'जिउझांग 4.0' कम्प्यूटर का जिक्र करते हुए इसे क्वांटम टेक्नोलॉजी में 'असाधारण' बताया. 'जिउझांग 4.0' दुनिया का सबसे तेज क्वांटम कम्प्यूटर होगा. उन्होंने कहा कि चीन जिस तरह से इनोवेशन कर रहा है, उससे पुष्टि हो रही है कि कंप्यूटिंग का भविष्य इसी महाद्वीप पर लिखा जा रहा है.

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रूस-चीन के बीच वीजा-फ्री पॉलिसी

रूस और चीन के बीच पिछले साल 'वीजा-फ्री पॉलिसी' पर भी सहमति बनी थी. इसके तहत, रूस और चीन के वैज्ञानिक एक-दूसरे के देश में बगैर वीजा के भी आ-जा सकते हैं. इसे ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया था. यह पॉलिसी इसी साल खत्म होने वाली थी. लेकिन हाल ही में मीटिंग के दौरान रूस और चीन ने इस पॉलिसी को एक साल और बढ़ाने का ऐलान किया है. इस पॉलिसी के बाद रूस और चीन के वैज्ञानिक कई सारी चीजों पर मिलकर रिसर्च कर रहे हैं.

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अमेरिका के लिए भी है मौका?

SCMP ने यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के प्रोफेसर वैलेरी फोकिन के एक इंटरव्यू के हवाले से लिखा है कि चीन और रूस के बीच वैज्ञानिक सहयोग अमेरिका के लिए भी अच्छा हो सकता है, क्योंकि ये अमेरिका को आइसोलेट करने की बजाय इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करता है.

उन्होंने कहा कि वह किसी भी अलायंस को देखकर खुश होंगे, चाहे वह रूस-चीन, रूस-अमेरिका या अमेरिका-चीन  या तीनों के बीच हो, क्योंकि अगर वैज्ञानिक शक्तियां पहला कदम उठाती हैं तो बाकियं के पास उसमें शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

फोकिन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग विज्ञान की 'जीवनरेखा' है. उन्होंने कहा कि कोल्ड वॉर के सबसे मुश्किल वक्त में भी खेल, कला, विज्ञान और शिक्षा जैसी चीजों के लिए दरवाजे हमेशा खुले रहे. उन्होंने कहा कि 'असल में ताकत साथ होने से आती है, न कि अलग-अलग अपना विज्ञान करने से.' वैज्ञानिक उपलब्धियां पूरी मानवता की होती हैं.

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