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ब्रह्मपुत्र पर ड्रैगन का ‘सुपर डैम’ या तबाही का सामान? चीन में ही उठने लगे सवाल, क्या कह रहे एक्सपर्ट

ब्रह्मपुत्र (यारलुंग सांगपो) नदी पर चीन के डैम को लेकर अब खुद देश के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं. वैज्ञानिकों ने इस डैम के निर्माण से पहले चेतावनी दी है.

ब्रह्मपुत्र पर ड्रैगन का ‘सुपर डैम’ या तबाही का सामान? चीन में ही उठने लगे सवाल, क्या कह रहे एक्सपर्ट
ये प्रस्तावित बांध चीन की विशाल थ्री गॉर्जेस बांध से तीन गुना ज्यादा बिजली पैदा कर सकेगी.
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चीन का महत्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट और दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत डैम इस वक्त अपने ही देश के वैज्ञानिकों के निशाने पर आ गया है. तिब्बत में ब्रह्मपुत्र (यारलुंग सांगपो) नदी पर बन रहे इस मेगा डैम को लेकर अब चीन के भीतर से ही खतरे की बड़ी घंटी बज चुकी है. 

चीनी सरकार के समर्थन वाले भूवैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जिस जमीन पर यह विशालकाय डैम खड़ा किया जा रहा है, ठीक उसी के नीचे एक खतरनाक और सक्रिय ‘पाईझेन फॉल्ट लाइन' मौजूद है. जमीन के नीचे छिपी यही दरार आने वाले समय में भयानक तबाही और सैलाब का सबब बन सकती है.

जमीन के नीचे क्या है, जिससे मंडराया बड़ा खतरा?

‘सेडिमेंट्री जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित इस हालिया स्टडी को ‘चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी' और ‘चाइना जियोलॉजिकल सर्वे' के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. स्टडी के मुताबिक, सक्रिय पाईझेन फॉल्ट लाइन हिमयुग (प्लीस्टोसिन काल) से ही सक्रिय है और आज भी इसमें हलचल हो रही है. वैज्ञानिकों ने पाया कि 9,500 साल पहले भी इसमें बड़ी गतिविधि हुई थी.
इस इलाके की भूगर्भीय बनावट काफी कमजोर और ढीली है. फॉल्ट लाइन की वजह से आसपास की चट्टानों में दरारें आ चुकी हैं और उनकी मजबूती खत्म हो चुकी है.

चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने की तैयारी पूरा कर चुका है.

चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने की तैयारी पूरा कर चुका है.
Photo Credit: AFP

वैज्ञानिकों ने कहा कि जब डैम के जलाशय में अरबों लीटर पानी भरेगा, तो पानी के लंबे समय तक रिसाव और दबाव के कारण पहाड़ों के ढलान अचानक दरक सकते हैं. जरा सी भूकंपीय हलचल भी विशालकाय भूस्खलन और तबाही ला सकती है. इतना ही नहीं, यह इलाका पहले से ही हिमालयी भूकंपीय क्षेत्र में आता है. साल 2017 में तिब्बत के मिलिन में आया 6.9 तीव्रता का भीषण भूकंप इसी फॉल्ट लाइन के उत्तरी सिरे पर हुआ था. जो इस बात का सबूत है कि यह क्षेत्र कभी भी बड़े भूकंप से दहल सकता है.

300 अरब किलोवाट बिजली बनाने के प्लान

चीन ने पिछले साल तिब्बत के पठार पर इस मेगा-डैम का निर्माण शुरू किया था. दावा है कि इससे हर साल 300 अरब किलोवाट-घंटे बिजली पैदा होगी. ये चीन के ही मशहूर ‘थ्री गॉर्जियस डैम' से भी तीन गुना ज्यादा है.

लेकिन इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आड़ में चीन पर्यावरण, सुरक्षा और मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज कर रहा है. इस प्रोजेक्ट से कितने लोग बेघर होंगे, स्थानीय पारिस्थितिकी पर क्या असर पड़ेगा और तिब्बती लोगों की पवित्र मानी जाने वाली जैव-विविधता को कितना नुकसान पहुंचेगा, चीन ने इसका कोई ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है. भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और आगे बांग्लादेश में पानी की सप्लाई और पर्यावरण को लेकर पहले से ही भारी चिंताएं जताई जा रही हैं.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

विदेश मामलों के जानकार और चीन की गतिविधियों पर करीब से नजर रखने वाले रॉबिन्द्र सचदेव डैम बनाने पर खतरे की ओर इशारा करते हैं.

रॉबिन्द्र ने एनडीटीवी को बताया,  "धरती के किसी हिस्से में अगर आप इतना पानी एक साथ जमा कर लेते हैं कि उसे संभालना मुश्किल हो जाए, तो इसके खतरे भी काफी सारे हैं. तिब्बत के इस हिस्से में पहले से कई डैम बनाए जा चुके हैं. ये इलाके हिमालय की तराई में हैं और अगर तराई का हिस्सा ही पानी से भरा हो और हिमालय पर कोई गहरा प्रभाव पड़े, तो फिर भूकंप के खतरे का अंदेशा लगातार बना रहता है. चीन ने इन चिंताओं को लेकर क्या कदम उठाए हैं, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी तो नहीं है, लेकिन इस जगह डैम बनाने से भूकंप और प्राकृतिक आपदा का खतरा हमेशा मंडराता रहेगा."

हमें यह भी समझना होगा कि हिमालयी क्षेत्र बहुत संवेदनशील है. जब आप एक एक्टिव फॉल्ट लाइन के ऊपर इतना भारी ढांचा खड़ा करते हैं और अरबों टन पानी का कृत्रिम दबाव बनाते हैं, तो आप खुद तबाही को न्योता दे रहे होते हैं. अगर किसी दिन बड़ा भूकंप आता है और यह डैम क्षतिग्रस्त होता है, तो निचले इलाकों यानी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश में ऐसा जलजला आएगा जिसकी भरपाई कर पाना नामुमकिन होगा. चीन आर्थिक और तकनीकी ताकत के घमंड में भूगर्भीय चेतावनियों को नजरअंदाज कर रहा है, जो पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक टिकिंग टाइम बम साबित हो सकता है.

रॉबिन्द्र सचदेव

विदेश मामलों के जानकार, अध्यक्ष, थिंक टैंक इमेजिन इंडिया

चीनी वैज्ञानिकों ने ही दी मजबूत सुरक्षा की सलाह

चिंता की बात यह है कि सरकारी संस्थाओं से जुड़े वैज्ञानिकों ने खुद अपनी ही सरकार और इंजीनियरों को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि केवल डैम बना देना काफी नहीं होगा, बल्कि निर्माण के दौरान ढलानों को मजबूत करना, चट्टानों को खिसकने से रोकने के लिए रिटेनिंग बैरियर बनाना और सुरक्षा के कड़े इंतजाम करना बेहद जरूरी है. अगर ऐसा नहीं किया गया तो निर्माण में लगे कर्मचारियों से लेकर भविष्य में पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा दांव पर लग जाएगी.

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