- ब्रिटेन की महिला को 21 साल की उम्र में डॉक्टर्स ने ब्रेन ट्यूमर होने की बात कहकर कीमोथैरेपी दी
- महिला के दिमाग में सूजन थी, 11 साल तक कीमोथेरेपी देकर उसका कैंसर का इलाज किया गया
- 34 साल की उम्र में उसे पता चला कि उसे कैंसर था ही नहीं, उसने अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज कराया
कैंसर एक ऐसी बीमारी, जिसका नाम सुनते ही दिमाग में ही उम्र घटने लगती है. इस बीमारी का नाम सुनते ही मरीज दहशत में आ जाता है. सोचिए कोई 11 साल तक इस बीमारी का इलाज करा रहा हो और बाद में पता चले कि उसे तो कैंसर था ही नहीं तो उस पर क्या बीतेगी. उसे गुस्सा आएगा या बीमारी न होने का सुकून मिलेगा. ब्रिटेन की एक महिला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. 11 साल तक उनके स्ट्रगल और उसके बाद जो हुआ वो आपके भी हैरान कर देगा.
डॉक्टर बोला- ब्रेन ट्यूमर है, कीमो कराओ
ब्रिटेन की रहने वाली बेकी जोन्स जब 21 साल की थीं तब उनको पता चला कि उनको ब्रेन ट्यूमर है. उनकी ये बीमारी ठीक नहीं हो सकती. बेकी के पास जीने के लिए कुछ ही दिन बचे हैं. बेकी के सारे सपने जैसे धुंधले आने लगे. वह पुलिस में अपना करियर बनाने का सपना देख रही थीं, जो चंद पलों में टूट सा गया था. लेकिन बेकी ने जीने की उम्मीद नहीं छोड़ी और इलाज के लिए एक अच्छे कैंसर कंसल्टेंट से मिलने पहुंच गईं. जांच के बाद उन्होंने 11 साल तक कीमोथेरेपी कराई. इस बीमारी से उनकी जिंदगी एकदम बदल गई. उनको बहुत बीमार महसूस होने लगा. वह इतना टूट चुकी थीं कि उनका परिवार कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाती थीं. उनका करियर तो जैसे थम सा गया था. वह डरी सहमी रहने लगीं.
21 साल में इलाज शुरू किया, 34 में पता चला कैंसर था ही नहीं
बेकी की जिंदगी 34 साल की उम्र में एकदम बदल गई. उनको जब पता चला कि जिस कैंसर की बीमारी का वह सालों से इलाज करा रही थीं वो बीमारी तो उनको कभी थी ही नहीं. उनके दिमाग में तो सिर्फ सूजन थी. जिसका इलाज तो स्टेरॉयड से किया जा सकता था. बेकी के मुताबिक, डॉक्टर्स उनसे ये कहते रहे कि अगर उन्होंने कीमोथेरेपी नहीं कराई तो उनकी मौत हो जाएगी.
हॉस्पिटल के खिलाफ कराया केस दर्ज
साल 2025 में उनको सच्चाई का पता तब चला जब ब्राउन से जुड़े ट्रस्ट में कैंसर के मामलों की समीक्षा की जा रही थी. दरअसल बेकी उन 40 से ज्यादा मरीजों में शामिल हैं, जो लंबे समय तक गैर जरूरी कैंसर की बीमारी के इलाज की वजह से के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स कोवेंट्री एंड वारविकशायर (UHCW) NHS ट्रस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं.
झूठे कैंसर का इलाज करता रहा डॉक्टर
बेकी ने बताया कि कैंसर के इलाज के लिए जब वह वहां पहुंचीं तो हॉस्पिटल में कंसल्टेंट प्रोफेसर इयान ब्राउन ने उनसे कहा था कि कीमोथेरेपी से वह अपनी बाकी की जिंदगी बिता सकती हैं. उनको छह महीनों में छह बार कीमो कराने का सुझाव डॉक्टर ने दिया था.
कैंसर था ही नहीं, झूठी बीमारी ने की जिंदगी बर्बाद
सच्चाई का पता चलते ही जब उन्होंने कई स्कैन को लेकर सवाल किए, जिनमें ट्यूमर का कोई सबूत नहीं था. तो कंसल्टेंट ने कहा कि बिना किसी उपकरण के वह नंगी आंखों से नहीं दिखेगा. बेकी ने कहा कि उनको तो कभी ब्रेन ट्यूमर था ही नहीं. उनको गलत बीमारी बताई गई. उनके जीवन का कीमती वक्त इलाज में ही निकल गया. इस झूठी बीमारी ने उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी. सालों तक TMZ लेने की वजह से उनको कई तरह की गंभीर मेडिकल समस्याएं हो गईं.
दिमाग में सूजन थी, डॉक्टर बोला कैंसर है
बेकी ने बताया कि साल 2012 में तेज माइग्रेन होता था, जिसकी वजह से वह डॉक्टर के पास गईं. एक प्राइवेट न्यूरोसर्जन ने उनकी ब्रेन बायोप्सी की और उनको कैंसर की खतरनाक बीमारी के बारे में बताया. प्रोफेसर ब्राउन ने टेस्ट की रिपोर्ट आए से पहले ही कह दिया कि उनको 'ग्रेड फ़ोर ग्लियोब्लास्टोमा' है, जो ब्रेन कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है.
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