
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश में रह रहे 50 लाख से ज्यादा अवैध प्रवासियों को वैध दर्जा उपलब्ध करवाने के क्रम में अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कई प्रशासनिक सुधारों की घोषणा की।
इन प्रवासियों में भारत से आए लोग भी शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अपनी कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किए गए इन फैसलों को आव्रजन पर उनके द्वारा उठाए गए बड़े कदमों में से एक बताया जा रहा है।
ऐसी संभावना जताई जा रही है कि उनके इस कदम से तकनीकी क्षेत्र में मौजूद भारतीयों की एक बड़ी आबादी को मदद मिलेगी। यह मदद उन लोगों के लिए खासतौर पर महत्वपूर्ण होगी, जिनके पास एच-1बी वीजा हैं। कार्यकारी शक्ति का इस्तेमाल करके उठाए गए इन कदमों से बिना वैध दस्तावेजों वाले अनुमानित 1.1 करोड़ कर्मचारियों में से 50 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है।
गुरुवार शाम को टीवी के जरिये राष्ट्र के नाम दिए संबोधन में ओबामा ने कहा कि समग्र आव्रजन सुधारों की दिशा में कांग्रेस के मार्ग में रिपब्लिकन सदस्यों द्वारा बाधा पैदा किए जाने के बाद वह (ओबामा) ये कदम उठा रहे हैं। उन्होंने तीन बड़े कदमों की घोषणा की।
ओबामा ने कहा, सबसे पहले, हम हमारे कानून प्रवर्तन कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त संसाधनों के साथ सीमा पर प्रगति की दिशा में काम करेंगे, ताकि वे अवैध ढंग से सीमा में होने वाले प्रवेश को रोक सकें और सीमा में घुस आने वाले लोगों की वापसी तेज कर सकें।
उन्होंने कहा, दूसरे, मैं उच्च कौशलवान प्रवासियों, स्नातकों और उद्यमियों के लिए यहां रहना और हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान देना आसान एवं तीव्र बनाऊंगा। उद्योग जगत के बहुत से नेतृत्वकर्ताओं द्वारा ऐसा प्रस्ताव दिया गया है। तीसरे, हम बिना वैध दस्तावेज के हमारे देश में रहने वाले लाखों प्रवासियों की जिम्मेदारी के संदर्भ में भी कदम उठाएंगे।
ओबामा ने कहा कि अमेरिका प्रवासियों का देश है, इसके साथ ही यह नियमों का भी देश है। बिना वैध दस्तावेज के रहने वाले कर्मचारी देश के आव्रजन नियमों को तोड़ते हैं और उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। खासकर उन लोगों को, जो खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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