- पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर देश के चार प्रांतों को विभाजित कर छोटे प्रांत बनाने की योजना बना रहे हैं
- मुनीर का तर्क है कि बड़े प्रांतों की वजह से विकास नहीं हो पा रहा और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ रही हैं
- छोटे प्रांत बनाने से पाकिस्तान के राजनीतिक संतुलन में बदलाव होगा और मुनीर की पकड़ मजबूत हो सकती है
अपनी कमजोर होती नीतियों की वजह से एक बार फिर पाकिस्तान टुकड़े-टुकड़े होने के लिए तैयार हो रहा है.इस बार पाकिस्तान को तोड़ने वाला कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं. दशकों पहले से चली आ रही तोड़ो और शासन चलाने की रणनीति अब पाकिस्तान में भी हावी हो रही है. ताकतवर नेता हमेशा इस मुहावरे को सार्थक बनाते हुए दिखाई देते हैं. अपने फायदे के लिए चाहे लोगों के बीच में फूट डालना हो चाहे देश के टुकड़े करना हो खुद को स्थापित करने के लिए नेता हो या फिर किसी के देश का तानाशाह सैन्य अधिकारी हमेशा से अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए तोड़ने से पीछे कभी नहीं हटते हैं. ऐसा ही कुछ पाकिस्तान में होने जा रहा है.
मुनीर की पाकिस्तान को बाटंने की तैयारी
दरअसल पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के चार प्रांतों को खत्म करना चाहते हैं. ये सभी प्रांत पाकिस्तान के पैदा होने से पहले से ही हैं. इन्हीं चार प्रांतों को तोड़कर 12 या 15 प्रांतों में बांटा जा सकता है या फिर 160 छोटी इकाइयों में भी बांटा जा सकता है. ऐसा करने से असीम मुनीर की ताकत में इजाफा हो सकता है क्योंकि इलाके छोटे होंगे तो चुनें हुए नेता, जिला असेम्बलियां या फिर सरकार के चुनें हुए लोगों को मुनीर आसानी से अपना फरमान मानने के लिए मजबूर कर सकते हैं. बड़े जिलों में बड़ी आबादी में यह करना अभी मुश्किल हो रहा है. हालांकि अभी तक कोई ठोस प्लान सामने नहीं आया लेकिन इस प्लान से फायदा किसे होगा यह तो अभी से स्पष्ट हो चुका है.
बलूचिस्तान की जनता पहले ही सड़कों पर
इस सिद्धांत के पीछे असीम मुनीर के अपने तर्क हैं. वर्तमान की बात की जाए तो पंजाब प्रांत में सबसे ज्यादा आबादी रहती है, जो देश की कुल जनसंख्या में आधे से अधिक है. यहां 12.8 करोड़ लोग रहते हैं. सबसे कम आबादी वाला बलूचिस्तान है, जहां 1.5 करोड़ लोग रहते हैं. ये लगभग कुल आबादी का 6 फीसदी है, जो बुनियादी सुविधाओं से बहुत दूर हैं. आए दिन वहां प्रदर्शन की खबरें आती हैं. यहां लोगों का जीवन नर्क जैसा है. ना पढ़ाई ना दवाई ना कमाई हर चीज के लिए पाकिस्तान से वहां की जनता लड़ाई लड़ रही है.
मुनीर कह रहे- प्रांत बड़े हैं, विकास नहीं हो रहा
मुनीर का कहना है पाकिस्तान के प्रांत बहुत बड़े हैं. इतनी बड़ी आबादी पर शासन चलाना उनके लिए प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है. लोगों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए घंटों का सफर करना पड़ता है. पंजाब के 25% से कम लोगों को साफ पीने का पानी बड़ी मुश्किल से मिल पाता है. प्रांत इतने बड़े हैं कि वहां सरकार भी नहीं पहुंच पाती है और इन्हें चलाना नामुमकिन हो रहा है. मुनीर को लगता है इसी वजह से विकास नहीं हो रहा. लेकिन सवाल ये है कि 70 साल से ज्यादा हो गए तो ऐसे हालात के लिए जिम्मेदार कौन है ? द इकोनॉमिस्ट का कहना है जिन समस्याओं को आज असीम मुनीर वजह बता रहे हैं उनकी वजह भी तो पाकिस्तान की सेना है. आख़िरकार पाकिस्तान के इन इलाकों में सुविधाएं क्यों नहीं हैं? क्यों कि इन समस्याओं को पैदा करने वाली भी पाकिस्तान की आर्मी है. देश की बेशकीमती जमीन, कारोबार और लगभग सभी सरकारी संस्थाओं में सेना का कब्जा है.
पाकिस्तान की हालत बहुत खराब है. विकास भारत के मुकाबले आधे से भी कम है. महगाई दर दो अंकों में है. कर्ज चुकाने में देश की कमाई का बड़ा हिस्सा जा रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण भी सेना है. ये संस्था टैक्स देने वालों के पैसे पर चलती है. जबकि देश की बेशकीमती जमीन के बड़े हिस्सों की मालिक सेना है और इनके धंधे भी चल रहे हैं. साथ में दूसरी कंपनी को डराते धमकाते भी हैं, जिससे कोई और मार्केट में अपना बिजनेस चला ना पाए. सेना भारत के साथ दुश्मनी बनाये रखने में बहुत इंट्रस्टेड रहती है, क्योंकि उसके नाम पर बड़ा मोटा बजट मिलता है, जो सेना के अधिकारियों के फायदेमंद है. लेकिन जनता के लिए भारी पड़ता है. हकीकत यही है कि पाकिस्तान की सेना ही असली समस्या की जड़ है, जो समाधान करने का दिखावा फिलहाल कर रही है.
पाकिस्तान में सरकार नहीं, सेना की चलती है
पाकिस्तान के इतिहास में सेना दो तिहाई से ज्यादा समय तक देश को अपने कब्जे में रखा था. जब सरकारें चुनी भी गई तो सेना की छत्रछाया में ही रहीं. लेकिन पिछले कुछ सालों से बलूचिस्तान में हो रहे प्रदर्शन से सेना असहज हुई है और वहां नियंत्रण पाने में नाकाम रही है. लेकिन अब प्रांतों में विकास और बुनियादी सुविधाओं के बहाने टुकड़े-टुकड़े करके उन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाना चाहती है.
पाकिस्तान में चार प्रांत केवल प्रशासनिक व्यवस्था के हिस्से नहीं हैं बल्कि ये बड़े राजनीतिक गढ़ हैं. पंजाब नवाज़ शरीफ की पार्टी PMLN का गढ़ है, तो सिंध में PPP का दबदबा है. सैन्य शासन के खिलाफ इन दोनों प्रांतों में सेना के एकाधिकार के खिलाफ बड़ी राजनीतिक शक्तियों के रूप में काम किया है. इसीलिए छोटे-छोटे टुकड़े में बांटने की बात राजनीतिक रूप बड़ी संवेंदशील है. ये राज्य हमेशा के सैन्य और केंद्र सरकार पर लगाम लगाने का काम करते रहे हैं. लेकिन अब इनका प्रभाव कम हो सकता है. अब सवाल यह है कि क्या छोटे प्रांतों को केंद्र और सेना के लिए नियंत्रित करना आसान हो जाएगा. ऐसा होता तो भी वहां की राजनीतिक पार्टियों के लिए झटका है. तीसरी पार्टी पीटीआई, जिसके मुखिया इमरान खान को असीम मुनीर ने जेल में डाल रखा है. फिलहाल के लिए PMLN और PPP को असीम मुनीर ने अपने साथ जरूर मिला लिया है लेकिन ये दल हमेशा से विकल्प के रूप में काम करते रहे हैं.इसीलिए कहा जा सकता है कि मुनीर की नजर इन पर टेढ़ी है.
मुनीर का पाकिस्तान के टुकड़े करने का प्लान
पाकिस्तान के राजनीतिक नक्शे में बदलाव का विचार कोई नया नहीं है. इसके पहले भी मंत्री अहसान इकबाल 16 प्रांत बनाने की जरूरत पर बात कर चुके हैं. लेकिन यह चर्चा तब हो रही है जब आसिम मुनीर ने पाकिस्तान की सत्ता पर मजबूत पकड़ बना ली है. चुनी हुई सरकार भले ही हो लेकिन कमान मुनीर के हाथों में ही है. मुनीर अपनी ताकत को पाकिस्तान के कोने-कोने में ले जाना चाहते हैं. आसिम मुनीर के खिलाफ बलूचिस्तान और POK में लगातार प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं. इस प्रस्ताव के बाद वहां हालात और भी खराब हो सकते हैं. छोटे प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर आसिम मुनीर के तर्क भले ही कुछ भी हों लेकिन इससे पूरे पाकिस्तान का राजनीतिक संतुलन जरूर बिगड़ जाएगा जो मुनीर के लिए फायदेमंद साबित होगा.
ये वीडियो भी देखें-
ये भी पढ़ें-पाकिस्तान को 160 भागों में बांटने की तैयारी में मुनीर, लोकतंत्र का जनाजा निकालने पर तुले आर्मी चीफ
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं