विज्ञापन

पाकिस्तान को 160 भागों में बांटने की तैयारी में मुनीर, लोकतंत्र का जनाजा निकालने पर तुले आर्मी चीफ

पहले से ही पाकिस्तान पर असली कंट्रोल रखने वाली सेना अपनी ताकत और बढ़ाने की तैयारी में है. बांटो और राज करो का जो फॉर्मूला अंग्रेज काम में लाते थे, अब उसी की बदौलत पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर बचे-खुचे लोकतंत्र का गला घोंटने पर अमादा हैं.

पाकिस्तान को 160 भागों में बांटने की तैयारी में मुनीर, लोकतंत्र का जनाजा निकालने पर तुले आर्मी चीफ
पाकिस्तान आर्मी के चीफ जनरल असीम मुनीर अपने देश को 160 हिस्सों तक में बांटना चाहते हैं (फोटो- एएफपी)
  • पाकिस्तान के सेना प्रमुख मुनीर देश के चार मुख्य प्रांतों को कई छोटे प्रांतों में बांटने की योजना बना रहे हैं
  • मुनीर का मानना है कि बड़े प्रांतों के कारण शासन चलाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए छोटे प्रांत जरूरी हैं- रिपोर्ट
  • पाकिस्तान में सेना का प्रभाव बहुत अधिक है और यह देश की राजनीतिक तथा आर्थिक व्यवस्था पर गहरा नियंत्रण रखती है

एक वक्त था जब भारत में अंग्रेजों ने 'बांटो और राज करो' की नीति अपनाई थी. आज पाकिस्तान में उनकी इस नीति के वंशज पनपे हुए हैं. पाकिस्तान के सबसे ताकतवर व्यक्ति भी अंग्रेजों से अलग नहीं हैं. 'द इकोनॉमिस्ट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, जिनके पास राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के मुकाबले असल ताकत कहीं ज्यादा है, उन्होंने देश के चार प्रांतों को बांटकर एक दर्जन या उससे ज्यादा प्रांत बनाने की योजना बनाई है.

पाकिस्तान में अभी चार मुख्य प्रशासनिक प्रांत हैं- पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान. 1947 के बंटवारे से पाकिस्तान के बनने के बाद से ही ये वैसे ही बने हुए हैं. सबसे ज्यादा आबादी वाले प्रांत पंजाब की आबादी 12.8 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का आधे से थोड़ा ज्यादा है. जबकि सबसे कम आबादी वाले प्रांत बलूचिस्तान में सिर्फ 1.5 करोड़ लोग रहते हैं, जो कुल आबादी का लगभग 6 प्रतिशत है.

सुधार चाहने वालों का लंबे समय से कहना रहा है कि इस व्यवस्था से शासन चलाना मुश्किल हो जाता है. अब मुनीर कथित तौर पर देश का नक्शा पूरी तरह बदलना चाहते हैं. वे चार प्रांतों की जगह 12, 15 या 160 छोटे प्रांत बनाना चाहते हैं.

चाल कुछ और है?

यह तर्क तो सही लगता है, लेकिन आलोचकों को इसके पीछे की मंशा पर शक है. 'द इकोनॉमिस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नए छोटे प्रांतों का शासन चुने हुए प्रमुख, प्रांतीय या जिला असेंबली, या फिर 'सरकार' के चुने हुए लोगों के हाथ में हो सकता है. लेकिन यहां सरकार का मतलब असल में खुद फील्ड मार्शल ही हैं.

मुनीर का कहना है कि प्रांत इतने बड़े हैं कि उन्हें ठीक से चलाना मुश्किल है, और इसीलिए देश की हालत इतनी खराब है. देश की खराब हालत के बारे में उनकी बात सही है- महंगाई दर डबल डिजिट में है और विकास दर भारत की तुलना में आधी से भी कम है. लेकिन जानकारों का कहना है कि इसकी एक बड़ी वजह वही संस्था है जिसका मुनीर प्रतिनिधित्व करते हैं. 'द इकोनॉमिस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सेना टैक्स देने वालों के पैसे पर ऐश करती है, देश की सबसे कीमती जमीन के बड़े हिस्सों की मालिक है, और ऐसे कारोबार चलाती है जो अपने कंपटीटर को डराते-धमकाते हैं.

राज सेना का, काम सेना का, फिर जिम्मेदार कौन

पाकिस्तान अपने अस्तित्व के बड़े हिस्से में सीधे सेना के शासन में रहा है. और बाकी समय में भी ऐसी नागरिक सरकारें जो सेना को नाराज करने से डरती रही हैं. उदाहरण के लिए शहबाज शरीफ की मौजूदा सरकार है. पाकिस्तान सेना भारत के साथ संबंध भी खराब रखना चाहती है. यह देश के विकास के लिए तो बहुत बुरा हो सकता है, लेकिन रक्षा बजट के लिए बहुत फायदेमंद है. फ्रायड के मनोविश्लेषण की भाषा में कहें तो, पाकिस्तान की सेना उसी समस्या का प्रतिनिधित्व करती है जिसे हल करने का वह दावा करती है.

'द इकोनॉमिस्ट' की रिपोर्ट में बताया गया है कि आसिम मुनीर की योजनाओं को लेकर सावधान रहने के दो बड़े कारण हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पहला कारण देश में विविधता की कमी है, जिसकी वजह से बड़े प्रांत केंद्र के सामने एक जरूरी संतुलन बनाने का काम करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, "पंजाब और सिंध दो लंबे समय से चली आ रही पार्टियों, PML(N) और PPP के गढ़ रहे हैं. मिलिट्री तानाशाहों के दौर में भी, उन्होंने एक हद तक सत्ता के वैकल्पिक केंद्र बनाए रखे. इसमें कोई शक नहीं कि इसी वजह से फील्ड मार्शल की नजर इन पर है."

इस योजना को लेकर सावधान रहने का दूसरा कारण यह है कि यह फील्ड मार्शल मुनीर की चालाकी का नतीजा है. रिपोर्ट में उन्हें ऐसे व्यक्ति के तौर पर बताया गया है जो अपने हाथों में सत्ता को मजबूत करने के मामले में बेरहम रहे हैं.

इसलिए, रिपोर्ट में कहा गया कि मुनीर द्वारा पाकिस्तान को बांटने की किसी भी योजना का मकसद प्रांतीय सरकारों को मजबूत करके पाकिस्तानियों की मदद करना नहीं है. बल्कि, इस कदम से मुनीर ऐसी छोटी-छोटी सरकारें तैयार करना चाहते हैं जो उनके हंटर से डरें, उनकी मांगों को माने.

यह भी पढ़ें: जब पाकिस्तान में घुसा भारतीय खुफिया जेट, स्पीड ऐसी कि कुछ कर न सकी पाक वायुसेना- पायलट ने पहली बार सुनाई कहानी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Pakistan, Asim Munir, Pakistan Army
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com