- सेना की वर्दी पहने खूबसूरत ईरानी महिलाओं के वीडियो आजकल इंटरनेट पर तहलका मचा रहे हैं
- वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ईरान की महिलाएं खुद जंग के मैदान में उतर चुकी हैं, लेकिन हकीकत अलग है
- बीबीसी ने फैक्ट-चेक के बाद बताया है कि ये वीडियो फेक हैं और एआई की मदद से तैयार किए गए हैं
Habibi, come to Iran... सेना की वर्दी पहने खूबसूरत ईरानी महिलाओं के ये शब्द आजकल इंटरनेट पर तहलका मचा रहे हैं. हाथों में हथियार और पीछे युद्ध जैसा मंजर देखकर पहली नजर में कोई भी धोखा खा जाए कि शायद ईरान की महिलाएं भी अब खुद मोर्चे पर उतर आई हैं. लेकिन क्या वाकई अमेरिका-इजरायल के खिलाफ ये ईरानी महिलाएं जंग लड़ रही हैं या फिर ये कोई डिजिटल मायाजाल है?
कोई पायलट तो कोई बनी फौजी
सोशल मीडिया पर खूबसूरत ईरानी लड़कियों के वीडियो लाखों व्यूज बटोर रहे हैं. इनमें दावा किया जा रहा है कि ईरान की महिलाएं जंग के मैदान में उतर चुकी हैं. कोई पायलट की वर्दी पहने तो कोई ईरानी आर्मी की ड्रेस पहनकर नजर आ रही है. देखने में ये जंग के मैदान से असली फौजी वीडियो जैसे लगते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है. ये महिलाएं न तो असली सैनिक हैं और न ही किसी जंग का हिस्सा हैं. बीबीसी की हालिया पड़ताल ने इनकी पोल खोल दी है.
सोशल मीडिया वीडियोज की बाढ़
बीबीसी ने फैक्ट-चेक के बाद बताया है कि ये वीडियो पूरी तरह फेक हैं और एआई की मदद से तैयार किए गए हैं. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के बाद से टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इनकी बाढ़ आ गई है. बीबीसी की जांच से पता चला कि इन वीडियोज को सुनियोजित तरीके से वायरल किया जा रहा है.
फैक्ट चेक में ऐसे खुली पोल
- बीबीसी के फैक्ट चेकर्स ने इन वीडियोज में एक जैसे कई पैटर्न देखे हैं.
- ऐसे अधिकतर सोशल मीडिया अकाउंट पिछले एक महीने में ही बनाए गए हैं.
- उनके यूजरनेम, प्रोफाइल फोटो और कैप्शन लगभग एक जैसे हैं.
- इन वीडियो में प्रोटेस्ट से संबधित हैशटैग्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
- ये वीडियो ज्यादातर ईरान के समर्थन में बनाए गए हैं.
- ये अधिकतर वीडियो इंग्लिश में हैं. साफ है कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए तैयार किया गया है.
क्या कहता है ईरान का कानून?
सोशल मीडिया पर इन खूबसूरत महिलाओं को ईरान के समर्थन में जंग के मैदान में उतरते देखकर आप भी धोखा मत खा जाइएगा. इन वीडियो में जो दिखाया जा रहा है, वो हकीकत से कोसों दूर है. असलियत ये है कि ईरान में महिलाओं को सेना में युद्धक भूमिका निभाने की इजाजत ही नहीं है. अनिवार्य सैन्य सेवा का प्रावधान सिर्फ पुरुषों के लिए है. वीडियोज में दिख रहीं महिलाओं का पहनावा भी ईरान के सख्त हिजाब कानून के विपरीत है. ईरान में 1979 की क्रांति के बाद से पब्लिक प्लेस पर सभी महिलाओं को हिजाब पहनना अनिवार्य है.
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क्या चल रहा कोई खुफिया मिशन?
ईरान की फौजी महिलाओं के इस ट्रेंड की शुरुआत टिकटॉक से हुई थी, जो धीरे-धीरे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक फैल गया. कंपनियों ने इन पर कार्रवाई भी की है. इन्हें स्पैम, फेक एंगेजमेंट और एआई जेनेरेटेड कंटेंट मानकर टिकटॉक कम से कम 52 अकाउंट्स को रिमूव कर चुका है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने भी ऐसे कई अकाउंट सस्पेंड किए हैं. कंपनी का हालांकि मानना है कि ये किसी बड़े खुफिया मिशन का हिस्सा नहीं लगता. कुछ लोगों द्वारा वायरल ट्रेंड के जरिए व्यूज और पैसा कमाने की कोशिश ज्यादा लगती है.
हमले के AI वीडियो भी वायरल
ईरान युद्ध में हमले के एआई से बने वीडियो भी सोशल मीडिया में फैल रहे हैं. हाल ही में एक वीडियो में तेल अवीव पर ईरान के मिसाइल हमले को दिखाया गया था. हालांकि रॉयटर्स की जांच में यह वीडियो फर्जी निकला था. एक्सपर्ट्स ने बताया कि वीडियो में जो इमारतें और स्काईलाइन दिख रही है, वो तेल अवीव से मेल नहीं खाती. इसके अलावा कारों की मॉर्फिंग, विकृत आकृतियां, रोबोटिक आवाज जैसी चीजें साफ बता रही थीं कि इसे एआई की मदद से तैयार किया गया था.
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