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ओह तो अब आप वर्चुअली पेश होने लगीं? जब CJI सूर्यकांत ने टीएमसी सांसद मेनका गुरुस्वामी से बीच बहस पूछ लिया

मेनका गुरुस्वामी ने विनम्रता से जवाब दिया, “बस इस बार के लिए. मैं तहे दिल से माफी चाहती हूं.” CJI ने तुरंत मुस्कराते हुए कहा, “नहीं-नहीं, ठीक है.”

ओह तो अब आप वर्चुअली पेश होने लगीं? जब CJI सूर्यकांत ने टीएमसी सांसद मेनका गुरुस्वामी से बीच बहस पूछ लिया
  • CJI सूर्यकांत ने सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी के वर्चुअल पेश होने पर हल्का-फुल्का मजाक किया.
  • मेनका गुरुस्वामी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया गया.
  • मेनका गुरुस्वामी 27 नवंबर 1974 को जन्मी हैं और सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट के रूप में कार्यरत हैं.
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने एक मामले में सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी जब वर्चुअली पेश हुईं तो CJI सूर्यकांत यह देखकर मुस्कुरा उठे और हल्का-फुल्का मजाक भी कर दिया. उन्होंने कहा, “ओह, तो अब आप वर्चुअली पेश होने लगी हैं. आप तो हमेशा हमारी सहायता के लिए खुद यहां मौजूद रहती थीं.”

इस पर मेनका गुरुस्वामी ने विनम्रता से जवाब दिया, “बस इस बार के लिए. मैं तहे दिल से माफी चाहती हूं.” CJI ने तुरंत मुस्कराते हुए कहा, “नहीं-नहीं, ठीक है.”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्यसभा चुनाव के लिए सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी को उम्मीदवार बनाया है.फिर वह राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुनी गईं हैं.

27 नवंबर 1974 को जन्मी मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट हैं. 2017 से 2019 तक वह न्यूयॉर्क के कोलंबिया लॉ स्कूल में बीआर आंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर थीं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सामने कई अहम मामलों में अपनी दलीलें रखी हैं. इसमें धारा 377 का मामला है, जिसे 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था और समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था. 

कौन हैं मेनका गुरुस्वामी?

मेनका गुरुस्वामी के पिता मोहन गुरुस्वामी पूर्व बीजेपी सांसद यशवंत सिन्हा के स्पेशल एडवाइजर थे. उनकी मां मीरा गुरुस्वामी हैं. मेनका गुरुस्वामी ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की है. 

मेनका और अरुंधति को 2018 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद दुनियाभर में तारीफ मिली. सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को निरस्त कर दिया. इसके बाद दोनों का नाम TIME मैग्जीन के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया गया था.

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