- ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने भारतीयों के साथ बढ़ते नस्लवादी व्यवहार को गंभीर समस्या माना
- सरकार ने प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए हर राजधानी शहर में खास सेंटर्स स्थापित किए हैं
- वीजा सुरक्षा व्यवस्था में सुधार किया गया है ताकि शोषण की शिकायत पर एम्प्लॉयर बदले में वीजा रद्द न कर सके
ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों के साथ नस्लवादी घटनाओं पर गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने एनडीटीवी से खास बात की. उन्होंने सरकार की तरफ से उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी. साथ ही वीजा को लेकर भी नईव्यवस्था के बारे में भी बताया. मगर साथ ही उन्होंने ये माना कि ऑस्ट्रेलिया के कुछ नेता जानबूझकर लोगों को नस्लीय तौर पर बांटने का काम कर रहे हैं और सरकार इसको लेकर चिंतित है.
ऑस्ट्रेलिया में कैसे होगी भारतीयों की सुरक्षा
NDTV की एक जांच में भारतीय मूल के ड्राइवरों को CB रेडियो पर नस्लीय टिप्पणियां, ज़ुबानी बदसलूकी और जान से मारने की धमकियां मिलने की बात सामने आई थी. इस बारे में पूछे जाने पर बर्क ने इस ट्रेंड को गंभीर सच्चाई माना. सरकार की कार्रवाई के बारे में बात करते हुए, बर्क ने ऑस्ट्रेलिया के हर राजधानी शहर में चल रहे खास सेंटर्स के नेटवर्क की ओर इशारा किया, जिन्हें खास तौर पर प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है. हमने प्रवासी मजदूरों के अधिकारों के लिए समर्पित सेंटर्स में बहुत बड़ा निवेश किया है. इन सेंटर्स को ट्रेड और लेबर काउंसिल्स से फंड मिलता है ताकि वे उन वीजा होल्डर्स तक पहुंच सकें, जिन्हें नागरिकों की तुलना में ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ता है. उन्होंने माना कि कई मजदूर सरकारी अधिकारियों से सीधे संपर्क करने में हिचकिचाते हैं और शुरुआत में चुपचाप रिपोर्ट करना पसंद करते हैं; इन सेंटर्स को इसी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है.
अपने ही देश के नेताओं को घेरा
लेकिन इन सबके बावजूद बर्क ने माना कि नस्लीय टिप्पणियां हो रही हैं. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा, "कुछ ऐसे राजनेता रहे हैं, जिन्होंने भारतीय समुदाय के बारे में बहुत ही आपत्तिजनक बातें कही हैं. जब भी ऐसा होता है, तो हमें एकजुट होकर मजबूती से खड़े रहने की जरूरत है." उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणपंथी राजनीतिक खेमे (जिसमें लिबरल, नेशनल और वन नेशन पार्टियों के नेता शामिल हैं) की उन टिप्पणियों के लिए सीधे तौर पर आलोचना की. उनके अनुसार इन बयानों के जरिए ऑस्ट्रेलियाई लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ होने के लिए उकसाया गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि समय के साथ ये तीनों दक्षिणपंथी पार्टियां इस तरह की बयानबाजी से पीछे हटेंगी.
नस्लवाद बर्दाश्त नहीं का संदेश
गृह मामलों के मंत्री के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय ने सुरक्षा चिंताओं को लेकर अपनी आवाज तेज कर दी है. जबकि दूसरी ओर पीएम मोदी की यात्रा के बाद नई दिल्ली के साथ द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं. बर्क का इस दुर्व्यवहार को केवल पुलिसिंग का मामला मानने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी को भी समस्या का एक हिस्सा बताना, कैनबरा के एक साफ और सीधे रुख को दिखाता है कि वे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि नस्लवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. और यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सद्भाव का माहौल बहुत अच्छा है.
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