अफगानिस्तान इस समय एक ऐसी भीषण मानवीय त्रासदी से गुजर रहा है, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है. देश के घोर प्रांत में रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी और भूख का कहर इस कदर बढ़ गया है कि वहां जिंदा रहने की जद्दोजहद में इंसानी जज्बात दम तोड़ रहे हैं. लोग दिनभर कड़ाके की धूप और धूल के बीच सड़कों पर मजदूरी की आस में खड़े रहते हैं, लेकिन काम नसीब नहीं होता.
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मासूम बच्चे कई-कई दिनों तक भूखे पेट सोने को मजबूर हैं. अपनी आंखों के सामने बच्चों को तड़पता देख एक बेबस पिता ने रोते हुए कहा कि वह अपने बाकी बच्चों का पेट भरने के लिए अपनी सगी बेटियों को बेचने जैसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला फैसला लेने पर मजबूर हो चुका है.
'एक बेटी को बेचकर बाकी बच्चों को 4 साल खिला सकूंगा'
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जुमा खान नाम के एक शख्स को पिछले डेढ़ महीने में सिर्फ तीन दिन काम मिला, जिससे उन्हें बमुश्किल 150 से 200 अफगानी (लगभग 2 से 3 डॉलर) की दिहाड़ी मिली.
सूखे और बंजर पहाड़ों के बीच बने एक छोटे से घर में रहने वाले अब्दुल रशीद अजीमी ने अपनी सात साल की जुड़वां बेटियों, रोकिया और रोहिला को सीने से लगाते हुए वो सच बयां किया जिसे सुनकर किसी भी पिता का कलेजा फट जाए. अब्दुल ने रोते हुए कहा, "मैं अपनी बेटियों को बेचने के लिए तैयार हूं. मैं बेहद गरीब, कर्जदार और लाचार हूं. जब मैं काम की तलाश से थककर खाली हाथ घर लौटता हूं, तो बच्चे मुझसे कहते हैं- 'बाबा, थोड़ा ब्रेड (रोटी) दे दो'. लेकिन मैं उन्हें कहां से लाकर दूं? यहां कोई काम ही नहीं है."
तालिबान की पाबंदियां और वैश्विक मदद में भारी कटौती ने तोड़ी कमर
जब से अफगानिस्तान में तालिबान ने सत्ता संभाली है, उन्होंने लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई और महिलाओं के काम करने पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं, जिससे लड़कियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है और बाल विवाह के मामलों में तेजी से उछाल आया है.
इस त्रासदी को सबसे ज्यादा हवा अंतरराष्ट्रीय मदद में हुई ऐतिहासिक कटौती ने दी है. करीब दो साल पहले तक इन गरीब परिवारों को संयुक्त राष्ट्र और विदेशी संस्थाओं की तरफ से मुफ्त आटा, तेल और दालें मिल जाती थीं, जिससे इनका गुजारा चल जाता था. लेकिन पिछले कुछ समय में अमेरिका और ब्रिटेन सहित बड़े देशों ने अपनी सहायता लगभग पूरी तरह बंद या बेहद कम कर दी है. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र को मिलने वाली वैश्विक मदद में भारी गिरावट आई है, जिसने अफगानिस्तान के मासूम बच्चों को भूख की आग में झोंक दिया है.
यह भी पढ़ें: सिंधु जल समझौते पर रोना बंद करे पाकिस्तान, बदहाली छिपाने के लिए भारत पर मढ़ रहा दोष; फिर हुई फजीहत
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं