- अगस्त 2025 में धराली में आई आपदा ने भारी तबाही मचाई और आज भी यहां वीरानी छाई हुई है
- नए साल 2026 पर धराली पूरी तरह सुनसान रहा, कोई पर्यटक नहीं आया और रोजगार के साधन समाप्त हो गए.
- स्थानीय लोगों के होटल, मकान और व्यापार सैलाब में बह गए, जिससे उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित हुई है.
नए साल के मौके पर उत्तराखंड की ज्यादातर जगहें पर्यटकों से गुलजार रहीं, लेकिन धराली का हाल बिल्कुल अलग था. वहां नए साल के मौके पर भी मायूसी, वीरानी छाई हुई है. हर तरफ सुनसान पड़ा है. साल 2026 धराली के लिए कितनी खुशिया लाएगा, ये तो समय बताएगा. हालांकि साल 2026 की शुरुआत धराली के लिएअ मायूसी भरी हुई है.
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आपदा के 5 महीने बाद भी धराली में वीरानी
5 अगस्त 2025 कोई धराली में आई आपदा को सबने देखा था, पहाड़ से आए सैलाब में इमारतों को दफन कर दिया. धराली का मंजर शायद ही कोई भुला पाया हो.लोगों की चीख पुकार अब तक जहन में ताजा है.ऐसा लगता है कि जैसे ये घटना कल की ही हो. आपदा को गुजरे 5 महीने हो गए हैं. दुनिया नए साल का जश्न मना रही है. सब अपने-अपने तरीके से नए साल का स्वागत कर रहे हैं लेकिन धराली के लोग आज भी 5 अगस्त 2025 को आई आपदा को याद करते ही सहम जाते हैं. इस सैलाब में कई लोगों ने अपनों को खो दिया. धराली के के लोगों के लिए नया साल बिल्कुल वैसा ही है. यहां के लोग यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि नया साल में एक बार फिर से धारली दोबारा पटरी पर लौट सके.
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नए साल पर धराली में कुछ भी नहीं बदला
1 जनवरी 2026 को धराली वैसा ही जर आया, जैसा 5 अगस्त 2025 को आई आपदा के बाद था.,चारों तरफ सैलाब का मलबा पड़ा है, कुछ जगहों पर मलबा हटाने का काम हुआ है. मलबे में दबी कार, मकान, घर का सामान निकाला जरूर है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ दबा हुआ है. लोग आज भी अपने पुनर्वास और तबाह हो चुके रोजगार की चिंता लगातार कर रहे हैं. यहां के लोगों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है. सवाल यही है कि क्या एक बार फिर से धराली की रौनक दोबारा लौट पाएगी.
धराली में कैसा था 2025 का नया साल?
बता दें कि 2025 नया साल मनाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक धराली पहुंचे थे. उस समय यहां पर काफी स्नोफॉल हुआ था. यही वजह है कि स्नोफॉल और यहां की सुंदरता को देखते हुए बड़ी तादाद में र्दी और गर्मियों में में पर्यटक पहुंचते थे. लेकिन 2026 के नए साल पर धराली सुनसान है. जहां देखो वहां बड़े-बड़े बोल्डर, मिट्टी रेत और लोगों के दबे घर ही दिख रहे हैं.

मलबे में होटल समा गया, रोजगार का साधन नहीं
धराली में फिलहाल सब कुछ मलबे और रेत के नीचे दबा हुआ है. चारों तरफ रेत उड़ रही है. लोगों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है. स्थानीय निवासी महेश पवार का कहना है कि जब उनका यहां पर होटल था तब पर्यटक आते थे. इससे उनकी इनकम होती थी. लेकिन अगस्त 2025 में आये सैलाब में सब कुछ बह गया. मलबे में उनका होटल भी समा गया और आज उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं है. पिछले 5-6 महीने से उनको यही नहीं पता है कि सरकार उनके लिए क्या करना चाहती है. सरकार ने अभी तक उनके होटल और रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं की है.
धराली के लोगों का दर्द सुनिए
धराली के ही जयदेव पवार ने कहा कि सैलाब में लोगों का सब कुछ तबाह हो गया. पहले नया साल मनाने यहां बहुत सारे पर्यटक आते थे, लेकिन इस साल कोई पर्यटक नहीं आया. क्योंकि यहां पर सिर्फ रेत और मालबा बचा है. वह भी उन अन्य होटल कारोबारियों की तरह ही है, जिनका होटल इस सैलाब में बह गया. जयदेव पवार ने बताया कि आज तक यहां पर कोई काम नहीं हुआ है आज भी लोग बेघर हैं. 67 लोग आज भी इस मलबे में दफन हैं. उन्होंने कहा कि धराली में केदारनाथ की तर्ज पर ही काम होना चाहिए ताकि साल 2026 को हम एक बार फिर उसी तरह मान सके जिस तरह हम पिछले सालों में मानते आए हैं.
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