देहरादून के सहस्रधारा रोड पर महिला के अपहरण प्रयास के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. शुरुआती तौर पर यह मामला महिला के जबरन अपहरण की कोशिश का लग रहा था, लेकिन जांच में सामने आया कि इसके पीछे डेयरी कारोबार में हुए नुकसान और पैसों के लेनदेन का विवाद था. पुलिस ने इस मामले में एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है जबकि चार अन्य आरोपी अभी फरार हैं.
CCTV में कैद हुई थी वारदात
23 सितंबर की सुबह करीब 6:50 बजे सहस्रधारा रोड स्थित नालापानी चौक के पास एक महिला को जबरदस्ती कार में बैठाने का प्रयास किया गया था. घटना के दौरान महिला ने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया. आसपास मौजूद सफाई कर्मचारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया, जिसके बाद कार सवार मौके से भाग निकले. घटना का CCTV वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया. वीडियो में काले रंग की एक कार से दो युवक उतरते हुए दिखाई दिए, जो महिला को जबरन वाहन में बैठाने की कोशिश कर रहे थे.
पुलिस ने बनाई तीन टीमें
पीड़ित महिला की शिकायत पर रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तीन अलग-अलग टीमें गठित कीं. जांच के दौरान CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई, संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई और घटना में इस्तेमाल वाहन की पहचान की गई.
लगातार जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 26 सितंबर को पुलिस ने अन्नू उर्फ चाहत नाम की महिला को सहस्रधारा रोड क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान उसके बयान से दीपक पासवान, सुशांत उर्फ लक्की, आदित्य वशिष्ठ और प्रियांशु के नाम सामने आए. पुलिस इन सभी आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है.
डेयरी कारोबार से शुरू हुआ विवाद
पूछताछ में गिरफ्तार महिला ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से दीपक पासवान को जानती है. दोनों मिलकर अपना कारोबार शुरू करना चाहते थे. इसी दौरान उनकी मुलाकात सुषमा वर्मा से हुई और अठूरवाला-भानियावाला स्थित एक डेयरी खरीदने का सौदा 7.50 लाख रुपये में हुआ.
आरोप है कि डेयरी में 11 गायें थीं और बताया गया था कि उनसे प्रतिदिन करीब 150 लीटर दूध निकलता है. इसके भरोसे दोनों ने पांच लाख रुपये नकद और ढाई लाख रुपये का चेक दिया. साथ ही दूध एक तय व्यवस्था के तहत पुष्पा नेगी को ही बेचा जाना था. लेकिन कारोबार शुरू होने के बाद गायों से अपेक्षा के मुताबिक दूध नहीं निकला. इससे आमदनी प्रभावित हुई और कारोबार घाटे में जाने लगा. आरोपियों के अनुसार उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन उन्हें लगातार आश्वासन मिलता रहा.
पैसों की जरूरत ने बढ़ाई परेशानी
इसी दौरान अन्नू की तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इलाज और अन्य खर्चों के लिए पैसों की जरूरत बढ़ गई. आरोप है कि दूध की बिक्री के करीब 1.22 लाख रुपये भी उन्हें नहीं मिले. दूसरी ओर डेयरी में लगाया गया पैसा ब्याज पर उधार लिया गया था, जिसकी वापसी के लिए लोगों का दबाव लगातार बढ़ रहा था.
डराने की साजिश बनी कांड की वजह
पुलिस के अनुसार आर्थिक दबाव और पैसों के विवाद से परेशान होकर आरोपियों ने सुषमा वर्मा को डराने की योजना बनाई. इसके लिए कारगी चौक क्षेत्र से एक काली स्विफ्ट कार किराये पर ली गई. गारंटी के तौर पर अन्नू ने अपनी स्कूटी जमा कराई थी. योजना को अंतिम रूप देने के लिए आरोपी हरिद्वार के रोशनाबाद गए और वहां अन्य साथियों से मिले. इसके बाद 23 सितंबर की सुबह दीपक, आदित्य और लक्की कार से सहस्रधारा पहुंचे. आरोपियों का दावा है कि उनका मकसद महिला को डराना था, लेकिन जब उसने शोर मचाया और आसपास लोग इकट्ठा होने लगे तो पकड़े जाने के डर से सभी मौके से फरार हो गए.
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