उत्तराखंड में लगातार सड़क दुर्घटनाएं बेहद चिंता का विषय बनती जा रही है. हर साल उत्तराखंड में ऐसी घटनाओं में मरने वालों की संख्या का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. सड़क दुर्घटनाओं में 2026 में जुलाई तक ही 775 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि साल 2025 में मरने वालों की संख्या 1285 थी, यानी 2026 के केवल 7 महीने में ही सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा काफी बढ़ गया है. उत्तराखंड के 13 जिलों में से देहरादून, उधम सिंह नगर ,नैनीताल और हरिद्वार ऐसे जिले हैं, जिसमें सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं और इसमें मरने वालों की संख्या है.
इस हिमालय राज्य में सड़क दुर्घटना एक बड़ी चुनौती बन गई है. इसे कम करने के लिए कई तरह के कड़े नियम भी लागू किए गए हैं, लेकिन फिर भी इन घटनाओं के पीछे की वजह ओवर स्पीड, रैश ड्राइविंग, नशे में वाहन चलना, रॉन्ग साइड पर वाहन चलाना, ओवरलोड, वाहनों का मेंटेनेंस समय पर नहीं होना, नाबालिगों का वाहन चलाना और सड़कों पर नो पार्किंग जोन पर गाड़ी खड़ी करना है. तो वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं के पीछे की वजह वाहनों को बिना रुके चलाना, ओवर स्पीड और ओवरलोडिंग, पर्वतीय मार्गों पर गलत तरीके से ओवर टेक करना, सबसे महत्वपूर्ण पर्वतीय रास्तों पर हिल लाइसेंस के बिना वाहन चलाना कारण है. इसके अलावा सड़कों पर गड्ढे, कई जगहों पर बैरियर का ना होना और रात को वाहन चलाना भी दुर्घटनाओं के आंकड़े बढ़ाने में शामिल हैं.

2026 के जुलाई महीने में सड़क दुर्घटनाओं में मौत के आंकड़ों को 2025 में हुई मौतों के आंकड़े से तुलना की जाए तो 2025 में जुलाई महीने तक 795 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2026 के जुलाई महीने तक 775 लोगों की मौत हो चुकी है. यानी मात्र 7 महीने में ही प्रतिदिन 3 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई है. वही साल 2025 में मरने वालों के आंकड़े की बात करें तो 1285 लोगों की मौत हुई थी, यानी इस हिसाब से पूरे साल औसतन प्रतिदिन तीन लोगों की मौत हुई है. ये आंकड़े बताते हैं कि किस तरह से लोग अपनी जान सड़क दुर्घटनाओं में गवां रहे हैं.
हालांकि राज्य सरकार और परिवहन विभाग लगातार सड़क दुर्घटनाओं को रोकने का प्रयास कर रहा है. सरकार ने परिवहन विभाग को करीब 800 करोड़ रुपए का बजट दिया है. जिससे राज्य में 179 ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) का सुधारीकरण किया जा रहा है, जिनमें 169 पर सुधार का काम पूरा हो चुका है. इसके साथ ही सोशल मीडिया के जरिए जागरुकता अभियान चलाने के साथ अब खतरनाक स्थानों को मानचित्र पर दिखाने और हादसे रोकने के लिए नई तकनीक के इस्तेमाल की भी तैयारी है.
- 2019 में 1353 एक्सीडेंट, 866 मौत, 1495 घायल
- 2020 में 854 एक्सीडेंट, 674 लोगों की मौत, 1041 घायल
- 2021 में 1405 एक्सीडेंट, 820 लोगों की मौत, 1091 लोग घायल
- 2022 में 1674 एक्सीडेंट, 1042 लोगों की मौत, 1613 घायल
- 2023 में 1691 सड़क दुर्घटना, 1054 लोगों की मौत, 1488 घायल
- 2024 में 1747 सड़क दुर्घटनाएं, 1090 मौत, 1547 घायल
- 2025 में 2121 सड़क दुर्घटनाएं, 1285 लोगों की मौत, 1925 घायल
उत्तराखंड में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं देहरादून, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल जिले में होती हैं. इन्हीं चार जिलों में सबसे ज्यादा मौतों का आंकड़ा भी है. देहरादून में साल 2025 और साल 2026 के जुलाई महीने के ही आंकड़े को देख तो दोनों साल 264 लोगों के मौत हुई है, उधम सिंह नगर जिले में साल 2025 और 2026 के जुलाई के महीने आंकड़े में 342 लोगों की मौत हुई है, हरिद्वार जिले में साल 2025 और 2026 के जुलाई महीने के आंकड़ों में 362 लोगों की मौत हुई है, वहीं नैनीताल जिले में 2025 और 2026 के जुलाई महीने में आंकड़े देखें तो 196 लोगों की मौत हुई है.

इसी तरह 2025 और 2026 के जुलाई महीने पर्वतीय जिलों की बात करें तो टिहरी में 88, पौड़ी में 34, चमोली में 32, उत्तरकाशी में 20, चंपावत में 21, रुद्रप्रयाग में 46, पिथौरागढ़ में 53, अल्मोड़ा 33 और बागेश्वर में 15 लोगों की मौत हुई है.
उत्तराखंड परिवहन विभाग के उप आयुक्त शैलेश तिवारी का कहना है कि उत्तराखंड में सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण रैश ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग है. सड़क पर गलत साइड में वाहन चलाना भी हादसों को बढ़ा रहा है. उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को लेकर परिवहन विभाग पुलिस विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है. इस मामले में हमने कड़े नियम भी लागू किए हैं, जगह-जगह साइन बोर्ड लगाए गए हैं. इसके अलावा जो भी गलत दिशा या ओवर स्पीड में जाता है, उसका चालान किया जा रहा है. वहीं सड़कों पर हाई स्पीड कैमरा लगाए गए हैं, जिससे तेज गति या गलत साइट पर चलने वाले वाहनों का चालान किया जाता है.
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