उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में दलित युवक केतन की मौत का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. केतन के परिजनों का आरोप है कि दूसरी जाति के लोगों ने उनके बेटे को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दीं, जिसके कारण उसका दम टूट गया. यह मामला न केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, बल्कि उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग तक भी पहुंच गया है. आयोग ने इस संबंध में गढ़वाल पुलिस से रिपोर्ट तलब की है.
न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, केतन के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनके बेटे के नाखून उखाड़ दिए, पैरों में कीलें ठोक दीं और उसके गुप्तांगों पर गंभीर चोटें पहुंचाईं. शव पर पीठ, छाती और हाथ-पैर में गहरी चोटों के निशान मिले थे. इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने बौराड़ी जिला अस्पताल का घेराव किया और पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग को लेकर शुरुआत में अंतिम संस्कार के लिए शव लेने से इनकार कर दिया था. इस बीच, उत्तराखंड सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए 8.25 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है.
केतन लाल हत्याकांड क्या है?
पुलिस के अनुसार, मृतक केतन लाल की पिछले छह महीने से प्रतापगढ़ ब्लॉक के खोलगढ़ गांव की एक लड़की से कथित तौर पर दोस्ती थी और दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. रविवार रात लगभग 11 बजे लड़की ने केतन को फोन करके अपने गांव बुलाया. केतन अपने मित्र दिवाकर डिमरी के साथ खोलगढ़ गया. जब वे दोनों वहां पहुंचे, तो लड़की के परिवार के सदस्यों ने उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया और डंडों से उनकी बेरहमी से पिटाई की. अस्पताल ले जाते समय केतन की मौत हो गई.
पुलिस ने इस मामले के दो मुख्य संदिग्धों लड़की के पिता यशवीर सिंह और दादा विद्या सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित राय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द ही आ जाएगी.
भावुक हुए पिता: "यहीं न्याय चाहिए"
मीडिया से बातचीत में केतन के पिता धनपाल लाल भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि "मैं यहां से तब तक शव नहीं ले जाऊंगा, जब तक कि सभी दोषियों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता. चाहे इसमें चार दिन लगें या दस दिन. मैं एक गरीब आदमी हूं, मेरे पास वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने के पैसे नहीं हैं. मैं चाहता हूं कि मुझे यहीं न्याय मिले, तभी मैं अपने बेटे का शव ले जाऊंगा."
हालांकि, बाद में प्रशासन द्वारा उचित और सख्त कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद, परिजनों ने शव स्वीकार किया और बुधवार को कोटी कॉलोनी घाट पर केतन का अंतिम संस्कार कर दिया गया.
प्रताड़ना के गंभीर आरोप
पुलिस ने बताया कि केतन अनुसूचित जाति समुदाय से था और यशवीर सिंह की नाबालिग बेटी के साथ उसके प्रेम संबंध थे. दोनों पिछले छह महीने से फोन के जरिए संपर्क में थे. धनपाल लाल ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने ‘प्लास' का इस्तेमाल करके उनके बेटे के हाथों और पैरों के नाखून उखाड़ दिए थे.
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच, न्याय और पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन घनसाली की उप-जिलाधिकारी मंजू राजपूत को सौंपा. टिहरी की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने बताया कि दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है. इसके साथ ही, पुलिस टीमों और फॉरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञों ने साक्ष्य जुटाने के लिए घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है.
परिवार की मांगें और प्रशासन का आश्वासन
पोस्टमार्टम के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने से मना करते हुए प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी थीं.
- दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.
- पीड़ित परिवार को स्थायी पुलिस सुरक्षा मिले.
- परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए.
बुधवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार, क्षेत्राधिकारी चंद्रमोहन सिंह, कोतवाल ऐश्वर्यपाल और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मध्यस्थता के बाद यह गतिरोध समाप्त हुआ. अधिकारियों ने परिवार को आश्वस्त किया कि उनका मांग-पत्र राज्य सरकार को भेज दिया गया है. दो मुख्य आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे जा चुके हैं, जबकि कुछ अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
उत्तराखंड के समाज कल्याण मंत्री खजान दास, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह और राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने पीड़ित के पिता धनपाल लाल से फोन पर बात कर उन्हें हरसंभव सरकारी सहयोग और न्याय का भरोसा दिलाया है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं