- हरिद्वार के श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट में दो साल के नर बाघ को जहर देकर मारने का मामला सामने आया है
- आरोपियों ने मरी हुई भैंस पर जहर लगाया था, जिसे खाने के बाद बाघ की मौत हुई है
- वन विभाग की कार्रवाई में एक आरोपी वन गुज्जर को गिरफ्तार किया गया जबकि दूसरा फरार है
उत्तराखंड के हरिद्वार में करीब 3-4 साल बाद बाघ के शिकार का सनसनीखेज मामला सामने आया है. श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट में 2 साल के नर बाघ को जहर देकर मार दिया गया और उसके चारों पंजे काट दिए गए. इस मामले में एक वन गुज्जर को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसका साथी फरार है.
जानकारी के मुताबिक, बाघ को मारने के लिए अपराधियों ने भैंस का सहारा लिया. एक मरी हुई भैंस पर अपराधियों ने जहर डाल दिया था. जब बाघ ने उसे खाया तो उसकी भी मौत हो गई.
ऐसे हुआ शिकार का खुलासा
वन विभाग को सजनपुर बीट में वन गुज्जरों की संदिग्ध गतिविधियों और मुखबिर से सूचना मिली थी. इसके बाद चलाए गए सर्च ऑपरेशन में बाघ का शव बरामद हुआ. मौके पर एक मरी हुई भैंस भी मिली.
हरिद्वार डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि बाघ ने पहले भैंस पर हमला कर उसे मारा था. इसके बाद दोनों आरोपियों ने मरी हुई भैंस पर जहर डाल दिया. जब बाघ दोबारा भैंस को खाने आया तो जहर खाने से उसकी मौत हो गई.

खाल-दांत निकालने से पहले पकड़े गए आरोपी
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बाघ के चारों पंजे काट लिए थे और रात में खाल व दांत निकालने की योजना बना रहे थे. लेकिन मुखबिर की सूचना पर वन विभाग और पुलिस की SOG टीम ने ट्रैप लगाकर कार्रवाई की. एक आरोपी आलम उर्फ फम्मी पुत्र शमशेर, निवासी गुज्जर डेरा श्यामपुर को मौके से पकड़ लिया गया.
दूसरा आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां पुत्र मायी, निवासी गुज्जर डेरा श्यामपुर कम्पार्टमेंट-3 फरार हो गया. उसकी तलाश में वन विभाग की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.
NTCA प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम
बाघ के शव को कब्जे में लेकर NTCA प्रोटोकॉल के अनुसार पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. डीएफओ ने बताया कि शुरुआती जांच में जहर से मौत की पुष्टि हुई है. बाघ की खाल और दांत सुरक्षित मिले हैं.
उत्तराखंड में बाघों पर मंडरा रहा खतरा
उत्तराखंड में कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व समेत अन्य वन क्षेत्रों में करीब 560 बाघ हैं. लेकिन शिकारियों से खतरा लगातार बना हुआ है. 2012 से 2025 तक राज्य में 139 बाघों की मौत हुई है. इनमें 59 प्राकृतिक मौत, 22 शिकार के कारण, 11 आपसी संघर्ष से और 12 अन्य कारणों से हुई हैं. 35 मामलों की जांच अभी चल रही है.
श्यामपुर रेंज संवेदनशील इलाका माना जाता है. इस घटना ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
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