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फीफा वर्ल्ड कप में नहीं भारतीय टीम, लेकिन 4 भारतीयों की अलग-अलग टीम में धूम

फीफा वर्ल्ड कप में टीम इंडिया यहां से न जाने कब और कितने साल में खेलेगी, लेकिन यहां भारतीय मूल के या एंग्लो इंडियन के कुछ खिलाड़ी हैं, जो वर्तमान संस्करण का हिस्सा हैं

फीफा वर्ल्ड कप में नहीं भारतीय टीम, लेकिन  4 भारतीयों की अलग-अलग टीम में धूम
न्यूजीलैंड के लिए खेल रहे सरप्रीत के भारतीयों के बीच खासे चर्चे हैं
Source: Social media

तीन अलग-अलग देशों में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दुनिया की वर्तमान सर्वश्रेष्ठ 48 टीमें खिताब के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं, तो करोड़ों भारतीय प्रशंसकों को आईना में देखने का मौका भी मिला है. फिलहाल भारत दुनिया में हालिया रैंकिंग में 138वें नंबर पर है. वहीं, भारत इस समय एशियाई देशों में 26वें स्थान पर बना हुआ है. एशिया कप और आगामी फीफा वर्ल्ड कप 2030 के क्वालिफायर के दूसरे दौर में सीधे प्रवेश पाने के लिए भारत को टॉप-26 में अपनी जगह बचाए रखनी होगी. बहरहाल,  एक बात साफ है कि इस खेल को खेलने के लिए भारतीय मूल के खिलाड़ियों में शीर्ष स्तर के लिए जरूरी दमखम है. और यह इससे साबित हो जाता है कि विश्व कप में चार खिलाड़ी भारतीय मूल के भी खेल रहे हैं. चलिए आप जानिए ये कौन हैं, किस देश से खेल रहे हैं और इनकी क्या खासियत है. 

1. सरप्रीत सिंह (न्यूजीलैंड) 

कीवी टीम का बतौर आक्रामक मिडफील्डर के रूप में हिस्सा बन चुके सरप्रीत सिंह की जड़े जालंधर से जुड़ी हैं.  सरप्रीत सिंह का जन्म ऑकलैंड में हुआ था और उन्होंने शुरुआती सफर में बायर्न म्यूनिख के साथ रहा. सरप्रीत सिंह तब सुर्खियों में आए जब जर्मन फुटबॉल दिग्गज बायर्न म्यूनिख ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें अपने क्लब में शामिल किया. सरप्रीत ने बहुत ही कम उम्र में न्यूजीलैंड की यूथ टीम में अपनी जगह बना ली थी और 2018 में सीनियर नेशनल टीम के लिए डेब्यू किया. हाल ही में जून 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ हुए इंटरनेशनल फ्रेंडली मैच में भी वह न्यूजीलैंड की शुरुआती प्लेइंग इलेवन का हिस्सा थे. 

2. तहसीन मोहम्मद जमशेद 

 तहसीन जमशेद   की भारत से जड़े कन्नूर/थलास्सेरी (केरल) से जुड़ी हैं. महज़ 19 वर्ष की उम्र में तहसीन को कतर की फीफा वर्ल्ड कप 2026 की मुख्य स्क्वाड में शामिल किया गया है  और यह अपने आप में ऐतिहासिक बात है.  फ्रांस के विकास धोरासू (2006) के बाद वह वर्ल्ड कप टीम में जगह बनाने वाले एक और खिलाड़ी बने हैं. जमेशद के पिता पिता जमशेद थचनकंडी केरल के थलास्सेरी से हैं और खुद एक पूर्व फुटबॉलर रह चुके हैं, जो 1996 में दोहा चले गए थे.  तहसीन कतर की मशहूर एस्पायर एकेडमी के प्रोडक्ट हैं और वर्तमान में कतर स्टार्स लीग के टॉप क्लब अल-दुहैल के लिए खेलते हैं.

 


3. निशान वेलुपिल्ले 

फीफा विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया टीम का हिस्सा निशान वेलुपिल्ले की जड़े तमिलनाडु से हैं और वह एंग्लो इंडियन (आधुनिक और संवैधानिक संदर्भ में, एंग्लो-इंडियन उन लोगों को कहा जाता है जिनके पिता या पैतृक वंश (पिता की तरफ से दादा, परदादा आदि) यूरोपीय या ब्रिटिश मूल के थे, लेकिन उनकी माता भारतीय थीं और उनका परिवार भारत में ही बस गया) है. मेलबर्न में जन्मे निशान ने अक्टूबर 2024 में चीन के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था. तब उन्होंने मैदान पर आने के महज 7 मिनट बाद ही गोल दाग दिया था. वह ऑस्ट्रेलियाई घरेलू लीग  में मेलबर्न विक्ट्री क्लब के लिए खेलते हैं. वर्ल्ड कप 2026 के क्वालिफायर मुकाबलों में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन किया और चीन व इंडोनेशिया जैसी टीमों के खिलाफ अहम गोल किए हैं.

4. सैमुअल मुतुसामी

डीआर कांगो टीम के सदस्य सैमुअल मुतुसामी भी एंग्लो इंडियन हैं और अपने देश के लिए डिफेंडर के रूप में खेलते हैं. भारत में उनकी जड़ें तमिलनाडु से जुड़ी हैं.  फ्रांस में जन्मे सैमुअल कांगो की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं. उनके पास यूरोप की टॉप-टियर लीग्स का लंबा अनुभव है. वह लंबे समय तक फ्रांस के मशहूर क्लब एफसी नांत के लिए खेल चुके हैं. वर्तमान में सैमुअल ग्रीक सुपर लीग के क्लब एट्रोमिटोस के लिए खेल रहे हैं. वह अपनी नेशनल टीम (DR कांगो) के मिडफील्ड की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक हैं और लगातार मैचों में पूरे 90 मिनट तक मैदान पर टीम को मजबूती देते हैं.

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