देशभर के कई हिस्सों में मॉनसून ने दस्तक दे दी है. उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, राज्य में 20 जून से 25 जून के बीच मॉनसून दस्तक दे देगा. मॉनसून की बारिश प्रकृति और अर्थव्यवस्था के लिए वरदान होती है. कृषि और फसलों के लिए ये बारिश जितनी फायदेमंद है वहीं जल स्रोतों को भी भरने का काम करती है. इस बारिश से भूमिगत जल भी रिचार्ज हो जाता है. लेकिन मॉनसून की बारिश उत्तराखंड के लिए हमेशा कुछ ना कुछ जख्म देकर जाती है.
उत्तराखंड में मॉनसून के दौरान होने वाली बारिश से कई क्षेत्रों में पिछले लंबे समय से नुकसान होता आया है. कई ऐसे उदाहरण है, जिससे यह पता चलता है कि मॉनसून की बारिश राज्य में कितना कहर बरपाती रही है.
मॉनसून की बारिश कब-कब कहर बनकर बरसी?
- 2010 में रुद्रप्रयाग में भूस्खलन
- 2013 में केदारनाथ त्रासदी
- 2023 और 2024 में जोशीमठ में भू धंसाव
- 2025 में उत्तरकाशी में धराली आपदा
- 2025 में देहरादून में आई आपदा
मॉनसून की बारिश से होने वाले नुकसान बड़ी वजह क्या?
ये सभी घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि मॉनसून में होने वाली बारिश जहां उन्नति और अर्थव्यवस्था को तो बढ़ती है तो वही नुकसान भी पहुंचती है. एक्सपर्ट्स राज्य में मॉनसून की बारिश से होने वाले नुकसान बड़ी वजह ज्यादातर इंसानों द्वारा किए गए विकास को ही मानते हैं. इंसान ने तेजी से विकास किया है. सड़क निर्माण, बड़ी-बड़ी जल विद्युत परियोजनाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जंगलों को काट दिया. जब उत्तराखंड में बारिश होती है तो ऐसे में भूस्खलन या फिर बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं, क्योंकि यहां पर्वत श्रृंखलाएं काफी तेज ढाल वाली हैं.
आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर
यही कारण है कि मानसून सीजन के लिए उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है. इसके लिए एसडीआरएफ ,एनडीआरआई, एनडीएमए, पुलिस,फायर पुलिस, आइटीबीपी ,सेना,बिजमान बल्कि वैकल्पिक मार्गो से यात्रा सुचारू की जाए.
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