- महोबा में सवा बीघा जमीन को लेकर परिवार के दो पक्षों में विवाद प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है
- मृतक हरीश कुमार के पिता ने आरोप लगाया कि बहू ने सात साल के जीवित पोते का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया है
- रजनी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुष्पराज का प्रमाण पत्र जारी हुआ था जिसकी मृत्यु 7 माह में हो चुकी है
महोबा शहर के महतवानापुरा मोहल्ले में स्थित सवा बीघा बेशकीमती जमीन को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है. आईटीआई कॉलेज के पास स्थित इस जमीन को लेकर परिवार के दो पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं. मामला इतना उलझ गया है कि एक पक्ष जीवित बच्चे को कागजों में मृत दिखाने का आरोप लगा रहा है जबकि दूसरा पक्ष मृत बच्चे के नाम का इस्तेमाल कर भूमि पर कब्जे की साजिश का दावा कर रहा है.
जीवित पोते का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप
मृतक हरीश कुमार चौरसिया के पिता कुंवर बहादुर चौरसिया ने एसडीएम से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उनकी बहू रजनी देवी ने अपने भाइयों के साथ मिलकर सात साल के जीवित बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया है. उनका कहना है कि 7 जनवरी को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली.
कुंवर बहादुर के अनुसार उनके बेटे की छह साल पहले मृत्यु हो चुकी है और उसके बाद यह जमीन उनके पोते के नाम आई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन की कीमत अधिक होने के कारण उसे बेचने की नीयत से उनके पोते को दस्तावेजों में मृत दिखाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि रजनी का भाई रवि जमीन बेचने के लिए लोगों को लेकर आता है और दबाव बनाता है. दादा ने अपने पोते की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है.
मां ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर रजनी देवी अपने भाइयों के साथ तहसील पहुंचीं और सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना है कि 7 जनवरी 2026 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र उनके बड़े बेटे पुष्पराज का है जिसकी 3 मार्च 2019 को महज सात माह की उम्र में मौत हो गई थी.
रजनी का आरोप है कि उनके पति की बीमारी के दौरान सास-ससुर और जेठ ने पूरी जमीन पुष्पराज के नाम वसीयत करवा ली थी ताकि बाद में उसे आसानी से बेचा जा सके. उन्होंने दावा किया कि जब जमीन बेचने की कोशिश सफल नहीं हुई तो उनके दूसरे जीवित बेटे युवांश के आधार कार्ड में बदलाव कर उसका नाम पुष्पराज दर्ज करा दिया गया.
आधार रिकॉर्ड में बदलाव का लगाया आरोप
रजनी के भाई रवि चौरसिया का कहना है कि बच्चे के स्कूल रिकॉर्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों में अब भी उसका नाम युवांश दर्ज है. उनका आरोप है कि वर्ष 2020 से 2026 तक आधार कार्ड में भी युवांश नाम था जिसे हाल ही में बदला गया. उनका दावा है कि यह बदलाव जमीन से जुड़े विवाद में फायदा उठाने के उद्देश्य से किया गया.
एसडीएम ने गठित की जांच टीम
दोनों पक्षों की शिकायतों और दस्तावेजों में सामने आए विरोधाभास को देखते हुए एसडीएम शिव ध्यान पांडे ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. प्रशासन ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड में हुए बदलाव तथा खतौनी से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल के लिए विशेष टीम गठित की है. एसडीएम का कहना है कि सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष भी प्रस्तुत की जाएगी.
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