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Cyber Fraud: बीएसए बनकर ट्रांसफर के नाम पर गुरुओं को लगाया करोड़ों का चूना, साइबर गैंग ऐसे वारदात को देते थे अंजाम

Cyber Fraud News: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शिक्षा विभाग का अधिकारी (बीएसए) बनकर शिक्षकों से ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. यह गिरोह ट्रांसफर के नाम पर शिक्षकों को डराकर उनसे मोटी रकम वसूलता था.  जांच के बाद साइबर पुलिस ने अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अब भी फरार है.

Cyber Fraud: बीएसए बनकर ट्रांसफर के नाम पर गुरुओं को लगाया करोड़ों का चूना, साइबर गैंग ऐसे वारदात को देते थे अंजाम
बीएसए बनकर ट्रांसफर के नाम पर करोड़ों की ठगी, अंतरराज्यीय साइबर गैंग का ऐसे हुआ भंडाफोड़
AI Generated

उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में शिक्षा विभाग के नाम पर बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा होने से हड़कंप मचा हुआ है. दरअसल, यहां फर्जी अधिकारी बनकर शिक्षकों को स्थानांतरण का डर दिखाने वाला एक अंतरराज्यीय गिरोह बेनकाब हुआ है. अब तक जानकारी के मुताबिक इस गिरोह ने प्रदेशभर के करीब 90 शिक्षकों से डेढ़ से दो करोड़ रुपये की ठगी की है.

पीड़ित की बेटी ने दिखाया हौसला

घटना 21 मार्च की है, जब एक महिला रोली ने दोहरीघाट के कंपोजिट विद्यालय रियान में सहायक अध्यापिका के पद पर पदस्थ अपनी मां चिंता देवी के साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज कराई. आरोप है कि एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को शिक्षा विभाग का अधिकारी बताकर शिक्षिका को जबरन मऊ से लखनऊ स्थानांतरण करने की धमकी दी. साथ ही कहा कि यदि वह ट्रांसफर नहीं चाहती हैं, तो तुरंत भेजे गए स्कैनर पर 50 हजार रुपये जमा करें. भयवश शिक्षिका ने रकम ट्रांसफर कर दी, जिसके बाद आरोपी का मोबाइल नंबर स्विच ऑफ हो गया, जिससे ठगी का एहसास होने पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया.

पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा, एक फरार

मऊ पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने बताया कि पीड़िता की बेटी की ओर से दी गई तहरीर पर घोसी कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की. जांच के दौरान पुलिस ने बरेली जनपद निवासी आरोपी नरेंद्र पाल और उसके सहयोगी सौरभ पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. वहीं, गिरोह का एक अन्य सदस्य आर्य नगर दिल्ली निवासी विक्रम मिश्रा अब भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं.

ठग लोगों को ऐसे लगाता था चूना

पुलिस पूछताछ में आरोपी नरेंद्र पाल ने खुलासा किया कि वह कंप्यूटर की पढ़ाई कर चुका है और शिक्षा विभाग के पोर्टल व मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर शिक्षकों को निशाना बनाता था. वह विभागीय कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे पैसे ऐंठता और बाद में मोबाइल बंद कर देता था. ठगी की रकम को वह अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर कमीशन के आधार पर बांटता था.

कई राज्यों में सक्रिय था यह  गिरोह

पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने बताया कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और इनके खिलाफ विभिन्न जिलों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं. जनपद के 10 से 15 शिक्षकों को इस गिरोह ने कॉल कर ठगी की कोशिश की, लेकिन केवल एक शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. फरार आरोपी की तलाश के साथ ही पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रयास जारी हैं.

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इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या सरकारी अधिकारी बनकर मांगी गई रकम पर भरोसा न करें और तुरंत इसकी सूचना संबंधित थाने में दें.

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