- मोदी सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट मॉडल को केंद्र में रखा, जहां पैसा सीधे खाते में पहुंचा.
- टेक्नोलॉजी, आधार और मोबाइल के जरिए सरकारी योजनाओं की डिलीवरी को डिजिटल बनाया गया.
- गरीब कल्याण को राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ा गया.
2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे, तब उनका सबसे बड़ा नारा था- सबका साथ, सबका विकास. 12 साल बाद मोदी सरकार की पहचान है- टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व. आज जन-कल्याण योजनाओं को लॉन्च करने और उनका सुचारू संचालन मोदी सरकार के काम करने के केंद्र में है. और सबसे बड़ी बात तो ये कि मोदी 3.0 में फोकस केवल गरीब कल्याण तक ही सीमित नहीं है. सरकार ने एक बड़ा लक्ष्य विकसित भारत 2047 रखा है. यानी ऐसा भारत जो इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, डिजिटल इकोनॉमी, रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और सामाजिक सुरक्षा में दुनिया की बड़ी ताकतों के बराबर खड़ा हो.
इस पूरे मॉडल की जड़ें 2014 से अब तक शुरू हुई उन योजनाओं में हैं, जो सीधे गरीब, गांव, महिला, किसान और मध्य-वर्ग को लक्ष्य करता है. जनधन खाते से लेकर मुफ्त राशन, उज्ज्वला गैस, आयुष्मान भारत, घर, शौचालय, नल से जल और डिजिटल भुगतान तक, मोदी सरकार ने वेलफेयर पॉलिटिक्स को डेटा और टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर एक नया राजनीतिक मॉडल खड़ा किया.

Photo Credit: PIB
जनधन से शुरू हुआ सबसे बड़ा सोशल इंजीनियरिंग मॉडल
2014 में मोदी सरकार ने सबसे पहले बैंकिंग सिस्टम में उन करोड़ों लोगों को जोड़ने पर फोकस किया जिनके पास बैंक अकाउंट ही नहीं थे. प्रधानमंत्री जनधन योजना इसी सोच से शुरू हुई. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2015 में करीब 14.72 करोड़ जनधन खाते थे, जो 2025 तक बढ़कर 55.22 करोड़ से ज्यादा हो गए. यही योजना बाद में मोदी मॉडल की रीढ़ बनी. क्योंकि कोरोना काल हो या किसान सम्मान निधि, गैस सब्सिडी हो या महिलाओं को सहायता, पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा गया.
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मोदी सरकार ने पहली बार वेलफेयर स्कीम्स को टेक्नोलॉजी के साथ इतने बड़े पैमाने पर जोड़ा. इससे लीकेज कम हुआ और सरकार को डायरेक्ट डिलीवरी वाली छवि मिली.

Photo Credit: ANI
मुफ्त राशन ने बदली राजनीतिक बहस
कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना मोदी सरकार की सबसे प्रभावशाली योजनाओं में गिनी जाती है. सरकार का दावा है कि 81 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है.
भारतीय राजनीति में लंबे समय तक जाति और क्षेत्रीय समीकरण हावी रहे, लेकिन मुफ्त राशन जैसी योजनाओं ने गरीब वोटर के बीच ये धारणा मजबूत की कि सरकार सीधे मदद कर रही है. कई राज्यों के चुनावों में भी इसका असर दिखाई दिया. बीजेपी ने इसे गरीब कल्याण के सबसे बड़े मॉडल के रूप में पेश किया.

Photo Credit: PIB
उज्ज्वला योजना: धुएं से गैस तक का सफर
2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का मकसद गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन देना था. सरकार का दावा है कि अब तक 10.51 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं. सरकार ने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान से जोड़ा. गांवों में चूल्हे के धुएं से होने वाली बीमारियों को कम करने का तर्क दिया गया. हालांकि कुछ रिसर्च रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि सिलेंडर रीफिल की लागत गरीब परिवारों के लिए चुनौती बनी रही. इस योजना ने एलपीजी की पहुंच तो बढ़ाई लेकिन व्यवहारिक और आर्थिक चुनौतियां भी बनी रहीं.
ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से बदली रसोई की तस्वीर, 10.5 करोड़ से ज्यादा घरों में पहुंचा LPG सिलेंडर

Photo Credit: PIB
आयुष्मान भारत: गरीबों के इलाज का बड़ा दांव
मोदी सरकार ने हेल्थ सेक्टर में सबसे बड़ा दांव आयुष्मान भारत पर लगाया. इस योजना के तहत गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर दिया गया. इसे दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना कहा गया. सरकार का दावा है कि इससे करोड़ों गरीब परिवारों को बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिली. खासकर हार्ट सर्जरी, कैंसर और गंभीर बीमारियों में गरीबों को राहत मिली. हालांकि कई राज्यों में अस्पतालों के भुगतान, निजी अस्पतालों की भागीदारी और फर्जी क्लेम जैसे सवाल भी उठे. लेकिन राजनीतिक रूप से यह योजना बीजेपी की सबसे मजबूत वेलफेयर योजनाओं में शामिल हो गई.
इस योजना के तहत फरवरी 2026 तक अस्पतालों की संख्या 36,229 हो गई है जबकि कुल 11.69 करोड़ लोगों का इलाज किया जा चुका है.
ये भी पढ़ें: Ayushman Card: ऐसे पता करें अपने इलाके के आयुष्मान कार्ड वाले अस्पतालों की सूची, नए धारकों के लिए सरल है अप्लाई करना

हर घर जल: मोदी सरकार का नया ग्रामीण मिशन
2019 में शुरू हुई जल जीवन मिशन मोदी सरकार के सबसे बड़े ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 में सिर्फ 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल का पानी पहुंचता था, जो 2025 तक बढ़कर 15.62 करोड़ घरों तक पहुंच गया.
सरकार इसे महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और गांवों की जिंदगी बदलने वाला मिशन बताती है. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं में कई राज्यों में शिकायतें सामने आईं कि नल तो लगा लेकिन पानी नहीं आया. तो चुनौती सिर्फ पाइपलाइन बिछाने की नहीं, बल्कि लगातार साफ पानी पहुंचाने की है.
ये भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा संवेदनशील गांव को मिला पानी, नक्सल के अंत के साथ पहुंच रहा विकास.
Women across Assam are living with dignity and ease with PM Awas Yojana providing secure homes, while Ujjwala Yojana ensuring smoke-free kitchens for lakhs of families.
— Chief Minister Assam (@CMOfficeAssam) July 19, 2025
🎥 Real stories of empowerment from grassroot Assam. pic.twitter.com/w1Gyz0z9fM
पीएम आवास: गरीब के पक्के घर
मोदी सरकार गरीबों को लगातार पक्का घर देने के वादे को पूरा करने में लगी है. पीएम आवास योजना के तहत 3.78 करोड़ ग्रामीण और 1.17 करोड़ शहरी घर स्वीकृत किए गए हैं. गांवों में बीजेपी की बढ़ती पकड़ के पीछे इस योजना को भी अहम माना जाता है. क्योंकि लाभार्थियों के बीच यह धारणा बनी कि सरकार ने घर दिया.

Photo Credit: ANI
स्वच्छ भारत: राजनीतिक ब्रांडिंग
2014 में शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन मोदी सरकार का सबसे बड़ा जन अभियान बना. करोड़ों शौचालय बनाए गए और इसे महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान से जोड़ा गया. एक्सपर्ट मानते हैं कि यह मोदी सरकार की मास मोबिलाइजेशन पॉलिटिक्स का बड़ा उदाहरण भी था. पहली बार किसी सरकार ने सफाई जैसे मुद्दे को राष्ट्रीय आंदोलन की तरह पेश किया.
डिजिटल इंडिया: मोदी मॉडल का टेक्नोलॉजी चेहरा
मोदी सरकार की सबसे बड़ी पहचान सिर्फ वेलफेयर नहीं, बल्कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन भी है. यूपीआई, डिजिटल पेमेंट, आधार आधारित वेरिफिकेशन, ऑनलाइन गवर्नेंस और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर ने सरकारी कामकाज का तरीका बदला. सरकार का दावा है कि इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका कम हुई. डिजिटल इंडिया के जरिए सरकार ने गांवों तक इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ाने पर जोर दिया. इसी मॉडल ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बदल दिया.
बुनियादी ढांचे: हाईवे, एक्सप्रेसवे और अर्थव्यवस्था
मोदी सरकार ने वेलफेयर के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़े पैमाने पर खर्च किया. हाईवे, एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट, सेमी हाईस्पीड ट्रेन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और बंदरगाहों पर लगातार निवेश किया गया. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे समेत 15 से अधिक एक्सप्रेसवे पूरे हो चुके हैं या आंशिक रूप से चालू हैं, जिनकी कुल लंबाई 3,500 किलोमीटर से अधिक है.
वहीं रेलवे के मामले में 2014 से अब तक (नई लाइनें, दोहरीकरण और गेज परिवर्तन मिलाकर) 31,000 किलोमीटर से अधिक नई पटरियां बिछाई जा चुकी हैं. स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 7,545 प्रोजेक्ट पूरे होने का दावा किया गया है. सरकार का तर्क है कि इंफ्रास्ट्रक्चर ही विकसित भारत की नींव बनेगा.
आत्मनिर्भर भारत और ग्लोबल इंडिया
कोरोना के बाद मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पर जोर बढ़ाया. मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी में भारत को वैश्विक हब बनाने की कोशिशें तेज हुईं. सरकार का दावा है कि भारत अब सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग पावर बनने की दिशा में बढ़ रहा है. जी20 की मेजबानी, ग्लोबल साउथ की राजनीति, क्वाड और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ती साझेदारी को भी मोदी सरकार अपनी वैश्विक उपलब्धि के रूप में पेश करती है.
सवाल भी कम नहीं
सरकार की बड़ी और बढ़ी कोशिशों के बावजूद मोदी मॉडल की आलोचना भी लगातार होती रही है. विपक्ष और कई अर्थशास्त्री मुफ्त योजनाओं पर सवाल उठाते रहे हैं तो यह पूछते भी रहे हैं कि क्या इस दौरान रोजगार वृद्धि उतनी तेज हुई जितना दावा किया गया था? साथ ही यह भी पूछा जाता रहा कि क्या योजनाओं की ग्राउंड डिलिवरी हर राज्य में समान है? और क्या ग्रामीण आय में समुचित सुधार हुआ है? काम होगा तो सवाल तो उठेंगे ही लेकिन राजनीतिक तौर पर मोदी सरकार ने लाभार्थी वर्ग की एक नई सामाजिक ताकत जरूर खड़ी की है.
मोदी 3.0 का आगे लक्ष्य क्या?
सरकार का लक्ष्य है भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना, AI व सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी में दुनिया का नेतृत्व करना, रक्षा और टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता बनना, और संकल्प है कि देश को 2047 तक विकसित भारत बनाना. यानी मोदी सरकार का लक्ष्य वैश्विक भारत को गढ़ना है.
12 साल में मोदी मॉडल ने भारतीय राजनीति का नैरेटिव जरूर बदला है. राजनीति में केवल वादे से आगे बढ़कर अब योजनाओं का लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित किया गया है. और शायद यही मोदी 3.0 की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी भी है.
ये भी पढ़ें: मोदी 3.0: कानून बनाने की स्पीड पर ब्रेक लगा, लेकिन गरीबों-गांवों के विकास की रफ्तार हुई दोगुनी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं