Cyber Frauds News: भारत में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों के खिलाफ गुजरात पुलिस को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है. राज्य की पुलिस ने एक ऐसे संगठित और हाईटेक साइबर ठगों के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार देशभर के करीब 982 धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े हुए हैं. 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत की गई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई में अब तक 13 मुख्य आरोपियों को दबोचा जा चुका है. पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह फर्जी कंपनियों (Shell Companies) और बेनामी बैंक खातों (Mule Accounts) के जरिए ₹631.86 करोड़ से अधिक के अवैध वित्तीय लेनदेन को अंजाम दे चुका है.
साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर 'साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने इस विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की थी. साइबर क्राइम के पुलिस अधीक्षक (SP) राजदीपसिंह झाला ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) और खुफिया जानकारी के आधार पर इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. पुलिस की अलग-अलग टीमों ने एक साथ अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, भरूच और राजकोट में छापेमारी की. पिछले चार दिनों में इस मामले में चार अलग अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं, जिसके बाद इन 13 जालसाजों को गिरफ्तार किया गया.
Gandhinagar, Gujarat: Under Operation Mule Hunt 2.0, Gujarat Police arrested 13 accused from multiple cyber fraud gangs across Ahmedabad, Surat, Gandhinagar, Bharuch, and Rajkot. The accused were linked to online fraud worth over ₹631 crore. Police recovered bank passbooks and… pic.twitter.com/NTRWBhc8MZ
— IANS (@ians_india) May 23, 2026
फर्जी कंपनियों की आड़ में चलता था 'कमीशन' का धंधा
जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने पैसे को ठिकाने लगाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था. गिरोह के सदस्य 'सौरथ ओवरसीज', 'एसएनबी एक्वा शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड' और 'जेपलीन ओवरसीज शिपिंग' जैसी फर्जी फर्में बनाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे. इन खातों का इस्तेमाल केवल साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने और उसे व्हाइट मनी में बदलने के लिए किया जाता था. इस पूरी प्रक्रिया के बदले गिरोह के गुर्गों को 4% से लेकर 8% तक का मोटा कमीशन मिलता था.
टेलीग्राम से डेटा चोरी कर खेतले थे सोशल इंजीनियरिंग का खेल
इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद आधुनिक और खतरनाक था. गिरोह के मुख्य किरदार टेलीग्राम चैनलों और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लीक हुए डेटाबेस को खरीदते थे. वहां से उन्हें बैंक ग्राहकों के मोबाइल नंबर और आईडी मिल जाते थे. इसके बाद, 'सोशल इंजीनियरिंग' यानी बातचीत में फंसाने की कला का इस्तेमाल कर ये पीड़ितों को फर्जी क्रेडिट कार्ड ऑफर करते थे. बातों-बातों में पीड़ितों से वन टाइम पासवर्ड (OTP) हासिल कर लिया जाता था और पलक झपकते ही उनके बैंक खाते का पासवर्ड बदलकर पूरा पैसा उड़ा दिया जाता था.
28 राज्यों तक फैले हैं ठगी के तार
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) के आंकड़ों के मिलान से पता चला है कि इस गिरोह ने किसी एक राज्य को नहीं, बल्कि पूरे देश को अपना निशाना बनाया था. इस नेटवर्क के खिलाफ पूरे भारत में 982 शिकायतें और 200 से अधिक FIR दर्ज हैं. इनके खिलाफ महाराष्ट्र में 137 शिकायतें, कर्नाटक में 126 शिकायतें, उत्तर प्रदेश में 87 शिकायतें, तमिलनाडु में 83 शिकायतें, गुजरात में 77 शिकायतें, दिल्ली में 53 शिकायतें दर्ज हैं. इसके अलावा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब समेत देश के कुल 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस गिरोह ने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है.
भारी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय दस्तावेज जब्त
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से अपराध में इस्तेमाल होने वाली भारी सामग्री बरामद की है. जब्त किए गए सामानों में ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए 28 स्मार्टफोन, 39 चेकबुक और 12 एटीएम/डेबिट कार्ड, फर्जी कंपनियों के नाम की 4 आधिकारिक मोहरें (Stamps), 2 लैपटॉप और पासबुक शामिल हैं.
अब तक ये आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
अहमदाबाद और सूरत से गिरफ्तार किए गए लोगों में मनीष लोढ़ा (39), अंकित लोढ़ा (28), नवीन वैष्णव, मोहित नाहर, माधवजी कोटादिया, नयन इटालिया, निमेश जेतानी और विमल जाड़ा शामिल हैं. वहीं, वडोदरा और भरूच से अरबाज पीरजादा, फैजान सोडागर, कासिफ अली शेख और मोहम्मद मेमन को गिरफ्तार किया गया, जबकि हार्दिक सरवैया को राजकोट से गिरफ्तार किया गया. ये आरोपी अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट से अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहे थे. .
इस मौके पर SP राजदीपसिंह झाला ने बताया कि यह एक बेहद सुव्यवस्थित साइबर इकोसिस्टम था, जिसे केवल अवैध कमाई को छुपाने के लिए डिजाइन किया गया था. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस पैसे को आगे कहां भेजा गया और इस रैकेट में और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं. इसके साथ ही पुलिस विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी, इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड या मोबाइल पर आया OTP साझा न करें. एक छोटी सी लापरवाही आपको बड़े आर्थिक नुकसान में डाल सकती है.
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