उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होती जा रही हैं. इसी बीच कांग्रेस ने किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए राज्यव्यापी किसान यात्रा निकालने का फैसला किया है. पार्टी की किसान इकाई 7 सितंबर से पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर से इस अभियान की शुरुआत करेगी. यह यात्रा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक जाएगी.
कांग्रेस का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसानों की भूमिका सबसे अहम है. ऐसे में पार्टी खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों को केंद्र में लाकर किसानों से सीधे संवाद स्थापित करना चाहती है.
किसानों के मुद्दों को बनाएगी बड़ा राजनीतिक विषय
कांग्रेस इस यात्रा के जरिए किसानों की कई प्रमुख समस्याओं को उठाने की तैयारी में है. पार्टी का कहना है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग भी लंबे समय से की जा रही है. पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी यात्रा का प्रमुख हिस्सा रहेगा. पार्टी आरोप लगा रही है कि किसानों का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
महंगाई और लागत बढ़ने पर सरकार को घेरेगी
कांग्रेस खेती की बढ़ती लागत को भी बड़ा चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है. पार्टी के अनुसार डीएपी खाद, बीज, कीटनाशक और बिजली की बढ़ती कीमतों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. किसान अधिक खर्च करने के बावजूद पर्याप्त मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं. इसके अलावा छुट्टा पशुओं की समस्या को भी जोरदार तरीके से उठाया जाएगा. प्रदेश के कई जिलों में किसान फसलों को बचाने के लिए रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं. कांग्रेस इसे किसानों के सामने खड़ी गंभीर चुनौती बता रही है.
गांव-गांव होगी किसान चौपाल
यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता गांवों, कस्बों और शहरों में किसान चौपाल आयोजित करेंगे. पार्टी नेताओं की योजना सीधे खेतों और गांवों में पहुंचकर किसानों की शिकायतें सुनने की है. इसके जरिए कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश करेगी.
चुनाव से पहले नया सियासी दांव
लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में कमजोर स्थिति का सामना कर रही कांग्रेस अब दलित और किसान मुद्दों को साथ लेकर नया राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है. पार्टी की रणनीति है कि चुनावी माहौल बनने से पहले किसानों के सवालों को राज्य की राजनीति के केंद्र में लाया जाए और भाजपा सरकार पर दबाव बनाया जाए.
यह भी पढ़ें- AIMIM के नेता आसिम वकार कांग्रेस में शामिल, कहा- हमारी लड़ाई बीजेपी के खिलाफ
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं