दूध लगभग हर भारतीय घर की जरूरत है. सुबह की चाय से लेकर बच्चों के गिलास और दही-पनीर तक, हर दिन लाखों परिवार इसका इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के अलग-अलग राज्यों में दूध की कीमतों में भारी अंतर है? कहीं एक लीटर दूध 42 रुपये में मिल जाता है, तो कहीं इसके लिए 58 से 60 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं.उपलब्ध खुदरा मूल्य आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक उन राज्यों में शामिल है जहां उपभोक्ताओं को सबसे सस्ता पैकेट वाला दूध मिलता है. वहीं दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों में दूध काफी महंगा है. क्यों है इतना अंतर और कहां कितनी कीमत है जानते हैं इस रिपोर्ट में
सबसे सस्ता दूध कहां मिलता है?
अलग-अलग दूध कंपनियों की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में बिकने वाला नंदिनी टोंड दूध करीब 42 से 44 रुपये प्रति लीटर के बीच मिलता है. यह कीमत देश के कई बड़े राज्यों की तुलना में काफी कम है. दिल्ली-एनसीआर में जहां मदर डेयरी और अमूल का टोंड दूध 56 से 58 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है, वहीं कर्नाटक के उपभोक्ता लगभग 12 से 14 रुपये प्रति लीटर कम कीमत चुका रहे हैं. यानी अगर एक परिवार रोज 2 लीटर दूध खरीदता है तो सिर्फ दूध पर ही उसे साल भर में हजारों रुपये की बचत हो सकती है.
अलग-अलग राज्यों में कितने हैं दूध के दाम?
उपलब्ध रिटेल डेटा के अनुसार दूध की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है.

आंकड़े बताते हैं कि उत्तर भारत के बड़े शहरों में रहने वाले उपभोक्ता दक्षिण भारत के कुछ राज्यों के मुकाबले दूध के लिए कहीं ज्यादा कीमत चुका रहे हैं.
आखिर राज्यों में इतना अंतर क्यों?
देशभर में दूध की कीमत एक जैसी नहीं होती, क्योंकि इसकी लागत कई चीजों पर निर्भर करती है. सबसे बड़ा कारण पशुओं का चारा है. डेयरी सेक्टर के जानकारों के मुताबिक दूध उत्पादन की कुल लागत का बड़ा हिस्सा चारे और पशु देखभाल पर खर्च होता है.
जिन राज्यों में दूध उत्पादन और उपभोग केंद्र के बीच दूरी ज्यादा है, वहां यह लागत और बढ़ जाती है. इसके अलावा डेयरी मॉडल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. गुजरात का अमूल, बिहार का सुधा, पंजाब का वेरका और कर्नाटक का नंदिनी जैसे सहकारी ब्रांड किसानों से सीधे खरीद करते हैं, जिससे लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. वहीं कुछ बाजारों में पैकेजिंग, ब्रांडिंग और शहरी वितरण पर ज्यादा खर्च होता है, जिसका असर खुदरा कीमत पर पड़ता है.
दिल्ली में दूध इतना महंगा क्यों?
दिल्ली देश के सबसे बड़े दूध उपभोक्ता बाजारों में से एक है, लेकिन यहां उत्पादन सीमित है. राजधानी में बिकने वाला बड़ा हिस्सा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों से आता है. यानी दिल्ली को बड़े पैमाने पर बाहरी आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है. दूध को दिल्ली तक पहुंचाने, प्रोसेस करने, पैक करने और शहरभर में वितरित करने की लागत भी कम नहीं होती. इसके अलावा गोदाम, किराया, बिजली, ईंधन और श्रम जैसे शहरी खर्च देश के कई दूसरे हिस्सों के मुकाबले ज्यादा हैं. यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर में मदर डेयरी और अमूल जैसे ब्रांडों का टोंड दूध 56-58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता है. आसान भाषा में कहें तो दिल्ली में दूध सिर्फ दूध की कीमत पर नहीं बिकता, बल्कि उसमें ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, कोल्ड-चेन और बड़े शहरी बाजार की अतिरिक्त लागत भी जुड़ी होती है. यही कारण है कि कुछ राज्यों के मुकाबले यहां उपभोक्ताओं को प्रति लीटर 10-15 रुपये तक अधिक भुगतान करना पड़ता है.
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