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BSF जवान ने की थी पत्‍नी की हत्‍या, पहले नौकरी गई, अब मिली उम्रकैद की सजा

मुजफ्फरनगर की अदालत ने पत्नी आकांक्षा की हत्या के मामले में निलंबित BSF जवान मनोज कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. आरोपी ने कथित तौर पर लोहे की रॉड से हत्या कर इसे सड़क हादसा बताया था.

BSF जवान ने की थी पत्‍नी की हत्‍या, पहले नौकरी गई, अब मिली उम्रकैद की सजा
पत्नी की हत्या में BSF जवान को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाई सजा
प्रतीकात्मक तस्वीर
  • पत्नी की हत्या कर सड़क हादसा बताने वाला BSF जवान उम्रकैद की सजा का दोषी
  • लोहे की रॉड से पत्नी की हत्या, सात साल बाद उजड़ गया परिवार
  • मुजफ्फरनगर कोर्ट ने लगाया ₹50 हजार का जुर्माना
मुजफ्फरनगर:

मुजफ्फरनगर में पत्नी की हत्या के मामले में एक निलंबित बीएसएफ जवान को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने पाया कि आरोपी मनोज कुमार ने अपनी पत्नी आकांक्षा की लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी थी और बाद में इसे सड़क हादसा बताने की कोशिश की थी. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया. अदालत ने आजीवन कारावास के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

2024 में हुई थी हत्या

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 अप्रैल 2024 को मुजफ्फरनगर के कासिमपुर गांव में मनोज कुमार ने अपनी पत्नी आकांक्षा की लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी थी. हत्या के बाद आरोपी ने आकांक्षा के परिजनों को बताया था कि उसकी मौत एक सड़क दुर्घटना में हुई है. हालांकि बाद में मामले की सच्चाई सामने आने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई.

पिता ने दर्ज कराया था मुकदमा

आकांक्षा के पिता सुभाष ने घटना के बाद मनोज कुमार, उसके पिता अजब सिंह, मां मिथलेश और चाचा बाबू के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आकांक्षा की हत्या की गई है और मामले को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई.

2017 में हुई थी शादी

अभियोजन के मुताबिक, आकांक्षा और मनोज कुमार की शादी 6 फरवरी 2017 को हुई थी. शादी के करीब सात साल बाद यह मामला सामने आया, जिसने पूरे इलाके में चर्चा पैदा कर दी थी.

सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी अजब सिंह की मौत हो गई. वहीं अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण मिथलेश और बाबू को बरी कर दिया. अदालत ने माना कि उनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं थे.

मनोज कुमार पर आरोप साबित

सरकारी वकील के अनुसार, अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया. सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार ने मनोज कुमार को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया.

उम्रकैद और जुर्माने की सजा

अदालत ने दोष सिद्ध होने के बाद मनोज कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. अभियोजन के अनुसार, घटना के बाद मनोज कुमार को बीएसएफ से निलंबित कर दिया गया था. अदालत के फैसले के बाद अब उसे सजा भुगतनी होगी.

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