योगी आदित्यनाथ सरकार ने NCR में आने वाले उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में वाहनों के प्रदूषण के खिलाफ बड़ा फैसला किया है. गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़ समेत इन जिलों में बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगी. इन जिलों में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा), गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली शामिल हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की ओर से यह आदेश जारी किया गया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से पूरे एनसीआर के उसके जिलों में लागू होगा. अगर किसी वाहन चालक ने जबरन पेट्रोल-डीजल भरवाने की कोशिश की तो कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. हरियाणा सरकार ने भी एनसीआर के सभी जिलों के सभी 2780 पेट्रोल पंपों पर नो पीयूसीसी, नो फ्यूल पॉलिसी लागू करने का ऐलान किया है. इसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, रोहतक, करनाल में लागू किया जा रहा है.
गाजियाबाद में जमीनी तैयारी, वाहन मालिकों को आगाह किया
गाजियाबाद में प्रशासन ने 1 अक्टूबर की समयसीमा से पहले ही इसका जमीनी अभ्यास शुरू कर दिया है. पेट्रोल पंप कर्मचारियों को मोबाइल ऐप के जरिए नंबर प्लेट स्कैन कर प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांचने की ट्रेनिंग दी जा रही है. इन 8 जिलों के सभी 1041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) यानी स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली वाले विशेष कैमरे लगाए जाएंगे.जैसे ही कोई वाहन ईंधन भरवाने पहुंचेगा, ये कैमरे गाड़ी का नंबर स्कैन कर सीधे सड़क परिवहन विभाग के केंद्रीय डेटाबेस (VAHAN Portal) से कनेक्ट करेंगे.अगर वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) एक्सपायर होगा तो पेट्रोल पंप की मशीनें ऑटोमैटिक फ्यूल देना बंद कर देंगी या कर्मचारी तेल देने से साफ इनकार कर देंगे.
हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट भी अनिवार्य
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) भी जरूरी होगी. इसके बिना वाहनों का नया प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) भी नहीं बनेगा. 1 अक्टूबर की समयसीमा से पहले अपने वाहन की नंबर प्लेट और पीयूसी दोनों अपडेट कराना जरूरी होगा. बिना वैध पीयूसी के वाहन चलाते पकड़े गए तो 10 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगेगा.
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मोबाइल ऐप से मिलेगा सारा रिकॉर्ड
गाजियाबाद में जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे 30 सितंबर से पहले अपने वाहनों की प्रदूषण सर्टिफिकेट की वैधता जांच करा लें. अगर प्रमाणपत्र खत्म हो चुका है, या जल्द समाप्त होने वाला है तो समय रहते उसका रिन्यू करा लें. तिवारी ने कहा कि जनपद के सभी पेट्रोल पंपों पर एक विशेष ऐप डाउनलोड कराया गया है. पेट्रोल पंप पर वाहन का नंबर स्कैन करने के बाद ऐप से सारी जानकारी मिल जाएगी. वाहन स्वामी 30 सितंबर तक अपने दस्तावेजों की जांच कराकर कार्यवाही पूरी कर लें ताकि एक अक्टूबर से पेट्रोल या डीजल लेने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
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