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हैदराबाद मानव तस्करी केस में 9 दोषियों को उम्रकैद, 8 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल; NIA कोर्ट का बड़ा फैसला

हैदराबाद की विशेष NIA अदालत ने 2019 के मानव तस्करी मामले में 9 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. दोषियों में 8 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं. महिलाओं को नौकरी का लालच देकर भारत लाकर देह व्यापार में धकेला जाता था.

हैदराबाद मानव तस्करी केस में 9 दोषियों को उम्रकैद, 8 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल; NIA कोर्ट का बड़ा फैसला
हैदराबाद मानव तस्करी केस में 9 दोषियों को उम्रकैद
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  • हैदराबाद NIA कोर्ट ने 9 दोषियों को सुनाई उम्रकैद, 8 बांग्लादेशी भी शामिल
  • बांग्लादेशी महिलाओं की तस्करी कर देह व्यापार में धकेलने वाले गिरोह पर बड़ा फैसला
  • नौकरी का झांसा देकर भारत लाई जाती थीं महिलाएं, 2019 के मामले में हुई सजा
नई दिल्ली:

हैदराबाद की विशेष एनआईए अदालत ने मानव तस्करी के एक गंभीर मामले में 9 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था, जिसमें बांग्लादेश की महिलाओं को बेहतर रोजगार और अच्छी कमाई का लालच देकर भारत लाया गया और बाद में उन्हें जबरन देह व्यापार में धकेला गया. जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया था. अदालत ने दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है. एजेंसी के अनुसार, बांग्लादेशी महिलाओं की तस्करी करके उन्हें भारत लाने और बाद में जबरन वेश्यावृत्ति में धकेलने से जुड़े मामले में कोर्ट ने गुरुवार को यह फैसला दिया.

17 सितंबर को सुनाया गया फैसला

हैदराबाद में एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने 17 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए 9 आरोपियों को दोषी करार दिया. अदालत ने सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और कुल 1 लाख 37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. अदालत ने यह भी कहा कि यदि जुर्माना जमा नहीं किया जाता है तो दोषियों को अतिरिक्त तीन महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी.

नौकरी का झांसा देकर भारत लाई जाती थीं महिलाएं

जांच के अनुसार यह गिरोह बांग्लादेश की महिलाओं को अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन का लालच देकर भारत लाता था. भारत पहुंचने के बाद इन महिलाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध देह व्यापार में धकेल दिया जाता था. एनआईए जांच में यह भी सामने आया कि यह एक संगठित मानव तस्करी नेटवर्क था, जो सीमापार स्तर पर सक्रिय था.

2019 में हुआ था मामले का खुलासा

मामले की शुरुआत सितंबर 2019 में तेलंगाना पुलिस की कार्रवाई से हुई थी. हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ थाना क्षेत्र में चलाए गए एक अभियान के दौरान जालपल्ली गांव में संचालित एक वेश्यालय से तीन बांग्लादेशी महिलाओं को मुक्त कराया गया था. इसके अलावा बालापुर के महिमूद कॉलोनी स्थित एक मकान से एक अन्य महिला को भी बचाया गया था. प्रारंभिक जांच के बाद मामले का दायरा बढ़ने पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 12 अक्टूबर 2019 को केस अपने हाथ में ले लिया और दोबारा मामला दर्ज किया.

NIA जांच में सामने आया तस्करी नेटवर्क

एनआईए ने जांच के दौरान मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए. जांच में आरोपियों की भूमिका स्थापित होने के बाद एजेंसी ने 17 अक्टूबर 2020 को आरोपपत्र दाखिल किया. चार्जशीट में कुल 12 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें कुछ आरोपी फरार भी बताए गए थे. जांच के दौरान आरोपियों को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के विभिन्न स्थानों से 2019 और 2020 में गिरफ्तार किया गया था.

कई कानूनों के तहत चला मुकदमा

दोषियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 और अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया. अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर सभी 9 आरोपियों को दोषी माना.

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